Monday, 10 March 2014

दिल्ली तक पहुंची जींद के किसानों की कीट साक्षरता की गूंज

राहुल गांधी के बाद अब भाजपा पार्टी ने किसानों को भेजा निमंत्रण

नौ मार्च को दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ मुलाकात करेंगे जींद के किसान


जींद। जींद जिले से शुरू हुई कीट ज्ञान की मुहिम की आवाज दिल्ली तक पहुंच गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब भाजपा नेताओं ने कीट साक्षरता की इस मुहिम से रूबरू होने के लिए कीटाचार्य किसानों को दिल्ली बुलाया है। भाजपा नेताओं की तरफ से मिले निमंत्रण पर जिले के कीटाचार्य किसान नौ मार्च को भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के दिल्ली स्थित आवास पर भाजपा नेताओं से मुलाकात कर कीट साक्षरता की मुहिम से अवगत करवाएं। अगर कीटाचार्य किसान कीट ज्ञान की इस मुहिम को भाजपा नेताओं के समक्ष प्रस्तुत करने में सफल रहे तो आगामी चुनाव में भाजपा पार्टी अपने चुनावी घोषणा पत्र में इस मुहिम को शामिल करेगी। 
थाली को जहरमुक्त बनाने के लिए वर्ष 2008 में डा. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में जींद जिले के किसानों द्वारा निडाना गांव से शुरू की गई कीट ज्ञान की मुहिम लगातार रफ्तार पकड़ रही है। कीट ज्ञान की यह मुहिम अब जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश से बाहर निकलकर दिल्ली तक जा पहुंची है। मजे की बात तो यह है कि अब तो राजनीतिक पार्टियों ने भी इस मुहिम में अपनी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी है। गत 24 फरवरी को गन्नौर में आयोजित किसान संसद में कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कीट ज्ञान की इस मुहिम की तह तक जाने के लिए खुद इन किसानों से मुलाकात की थी और किसानों को जल्द ही इस मुहिम पर काम शुरू करवाने का आश्वासन दिया था। राहुल गांधी के बाद अब भाजपा पार्टी की तरफ से इन किसानों को निमंत्रण भेजा गया है। भाजपा के केंद्रीय एवं किसान नेता नरेश सिरोही द्वारा कीटाचार्य किसानों को नौ मार्च को दिल्ली में बुलाया गया है। नौ मार्च को यह किसान भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी की राय सिन्हा रोड पर स्थित कोठी नंबर 6 पर होने वाली बैठक में भाजपा नेताओं से मुलाकात करेंगे। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक भाजपा नेताओं और किसानों के बीच बातचीत का दौर चलेगा। इस दौरान कीटाचार्य किसान भाजपा नेताओं को इस मुहिम की शुरूआत कैसे हुई, किस तरह इस मुहिम को आगे बढ़ाया जा सकता है तथा इस मुहिम से देश के लोगों को क्या लाभ होगा? इसके बारे में विस्तार से समझाएंगे। 

चुनावी घोषणापत्र में शामिल हो सकती है किसानों की यह मुहिम

नौ मार्च को दिल्ली में भाजपा नेताओं के साथ होने वाली बैठक के दौरान यदि कीटाचार्य किसान भाजपा नेताओं को इस मुहिम की तरफ आकॢषत करने में सफल रहते हैं तो भाजपा पार्टी किसानों की इस मुहिम को पूरे देश में फैलाने की मांग को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल कर सकती है। 

प्रदेश के किसानों को जहरमुक्त खेती का संदेश देंगे जींद के किसान

जहरमुक्त खेती की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए किसान आयोग ने थामा जींद के किसानों का हाथ 

इनोवेशन फंड के तहत हर वर्ष हरियाणा किसान आयोग खर्च करेगा दो करोड़


जींद। जींद जिले से शुरू हुई थाली को जहरमुक्त बनाने की मुहिम से अब पूरे प्रदेश के किसान जुड़ेंगे। जिले के मास्टर ट्रेनर किसान अब प्रदेशभर के किसानों को कीट ज्ञान का पाठ पढ़ाएंगे। कीट ज्ञान की इस मुहिम को प्रदेश के सभी किसानों तक पहुंचाने के लिए हरियाणा किसान आयोग माध्यम बनेगा। किसान आयोग द्वारा इस मुहिम को शिखर तक पहुंचाने के लिए इनोवेशन फंड के तहत हर वर्ष दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। शुक्रवार को जींद के किसान प्रशिक्षण केंद्र (हमेटी) में कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन विषय पर आयोजित बुद्धिशीलता सत्र के दौरान हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डा. आरएस परोदा ने जींद के किसानों की इस मुहिम को प्रदेशभर में फैलाने की मांग पर अपनी सहमति की मोहर लगा दी है। 
फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग के कारण दूषित हो रहे खान-पान को देखते हुए कृषि विभाग के एडीओ डॉ. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में वर्ष 2008 में जींद जिले के निडाना गांव से कीट ज्ञान क्रांति की मुहिम की शुरूआत हुई थी। इस मुहिम से जुड़े किसानों द्वारा पिछले पांच-छह वर्षों से अपने खर्च पर किसाना पाठशालाओं का आयोजन कर इस मुहिम को आगे बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। कीटों पर किसानों द्वारा किये जा रहे सफल प्रयोगों को देखते हुए पिछले दो वर्षों से जींद जिले के कृषि विभाग के अधिकारी भी इन किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे थे लेकिन संशाधनों तथा बजट के अभाव के कारण प्रदेशभर के किसानों को इस मुहिम से जोडऩे में जींद के मास्टर ट्रेनर किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। जींद जिले में चल रही कीट ज्ञान की इस मुहिम की सार्र्थकता को देखते हुए अब हरियाणा किसान आयोग ने जींद जिले के इन कीटाचार्य किसानों का हाथ थाम लिया है। हरियाणा किसान आयोग अब कीट ज्ञान की इस मुहिम को प्रदेशभर में फैलाने के लिए जींद के किसानों को मास्टर ट्रेनर के तौर पर प्रदेश के अन्य जिलों में भेजेगा। इसके लिए आयोग द्वारा 2 करोड़ का बजट तैयार किया गया है। आयोग द्वारा प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को अन्य जिलों के किसानों तक पहुंचाने के लिए हर वर्ष दो करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। इनोवेशन फंड के तहत दो करोड़ हरियाणा किसान आयोग खर्च करेगा तथा एक करोड़ रुपये मार्केटिंग बोर्ड से एकत्रित करेगा। 

वैज्ञानिक रूप से अनुमति दिलवाने के लिए होगा रिसर्च

जींद के किसानों द्वारा कीटों पर किए गए शोध को वैज्ञानिक रूप से अनुमति दिलवाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय में इस काम पर वैज्ञानिक शोध भी करवाया जाएगा। शोध के बाद कृषि विभाग से इस काम को वैज्ञानिक तौर पर अनुमति मिलने के बाद इस मुहिम को प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के किसानों तक पहुंचाने में काफी आसानी होगी। 
डॉ. आरएस परोदा के चेयरमैन हरियाणा किसान आयोग
किसानों से बातचीत करते हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. आरएस परोदा। 

कीटों को मारने की नहीं पहचानने की जरूरत

एकीकृत कीट प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय सेमिनार

सेमिनार में कीट प्रबंधन पर कृषि अधिकारियों और किसानों के बीच हुई चर्चा


जींद। फसलों में अंधाधुंध प्रयोग हो रहे कीटनाशकों के कारण दूषित हो रहे खान-पान तथा वातावरण को बचाने के लिए हरियाणा किसान आयोग तथा कृषि विभाग के सौजन्य से शुक्रवार को जींद के रोहतक रोड स्थित किसान प्रशिक्षण केंद्र (हमेटी) में कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन विषय पर बुद्धिशीलता सत्र का आयोजन किया गया। हरियाणा किसान आयोग के चेयरमैन डॉ. आरएस परोदा ने सेमिनार में बतौर मुख्यातिथि तथा सचिव डॉ. आरएस दलाल, सिरसा रीजनल सेंटर के डायरेक्टर डॉ. डी. मोंगा, एनसीआईपीएम के डायरैक्टर सी चटोपाध्या, हमेटी के डायरैक्टर डॉ. बीएस नैन, जिला उप-कृषि निदेशक डॉ. आरपी सिहाग, हिसार उद्यान विभाग के डीएचओ. डॉ. बलजीत भ्याण और बराह खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा ने विशेष अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। सेमिनार में किसान आयोग, कृषि विभाग के अधिकारियों तथा किसानों के बीच फसलों में मौजूद मांसाहारी तथा शाकाहारी कीटों के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। कृषि विभाग के अधिकारियों तथा किसानों ने बारी-बारी अपने-अपने विचार रखे। डॉ. आरएस परोदा ने कहा कि जींद के किसानों ने एक अच्छी पहल शुरू की है। इसलिए इस पर रिसर्च की जरूरत है। 

कीटों को काबू करने की नहीं कीटों को पहचानने की जरूरत 

सेमिनार में मौजूद कीटाचार्य किसान रणबीर मलिक ने कहा कि कीटों से फसलों को हो रहे नुकसान को रोकने के लिए पहले कृषि विभाग ने कीटों को नियंत्रण करने का प्लान बनाया लेकिन कीट नियंत्रित नहीं हुये। इसके बाद कीटों का प्रबंधन करने की सोची लेकिन यहां भी विभाग को कोई सफलता नहीं मिली। अब समकेतिक कीट प्रबंधन पर जोर दिया जा लेकिन इससे भी बात नहीं बन रही है। मलिक ने कहा कि कीटों को न तो काबू करने की जरूरत है और न ही कीटों का प्रबंधन करने की जरूरत है। जरूरत है तो सिर्फ किसानों को कीटों की पहचान करवाने की। अगर किसानों को फसलों में मौजूद कीटों की पहचान हो गई तो आगे का फैसला किसान खुद-बे-खुद कर लेगा। 
 प्रोजेक्टर के माध्यम से कीटों के बारे में जानकारी देती महिला किसान।

कीटों को न समझें मित्र और समझें दुश्मन

मास्टर ट्रेनर किसान मनबीर रेढ़ू ने बताया कि कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार फसल में 18 प्रतिशत नुकसान कीटों से होता है लेकिन जानकारी के अभाव में किसान इस नुकसान को बचाने के लिए इससे ज्यादा खर्च फसल पर कर देता है। रेढ़ू ने कहा कि किसान और कृषि विभाग के अधिकारियों के बीच भाषा का अंतर है। विभाग द्वारा कीटों को दो भागों में बांट कर मित्र और दुश्मन की श्रेणी में रखा गया है। जबकि कीट न तो हमारे मित्र हैं और न ही हमारे दुश्मन। कीट तो फसल में अपना जीवन यापन करने के लिए आते हैं और पौधे अपनी जरूरत के अनुसार भिन्न-भिन्न किस्म की सुगंध छोड़कर अपनी सुरक्षा के लिए कीटों को बुलाते हैं। रेढ़ू ने कपास की फसल में पाई जाने वाली ब्रिस्टल बिटल का उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रिस्टल बिटल कपास के फूल, पत्तियां और नर पुंकेशर को खाती है। इसको देखकर किसान भयभीत हो जाता है, जबकि सच्चाई यह है कि कपास के उत्पादन में ब्रिस्टल बिटल का अहम योगदान है। क्योंकि ब्रिस्टल बिटल फूल के मादा भाग पर बैठकर पुंकेशर तथा पत्तियां खाती है। इस प्रक्रिया में नर का पोलन मादा तक पहुंचता है और इससे आगे चलकर टिंड्डे बनते हैं। 

यह रखे सुझाव 

सेमिनार में मौजूद महिला किसान।
बराह खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा ने कहा कि इस मुहिम को प्रदेश में फैलाने के लिए मास्टर ट्रेनर किसानों को अन्य जिलों के किसानों को ट्रेनिंग देने के लिए समय-समय दूसरे जिलों में भेजा जाए। 
किसानों द्वारा एक एकड़ के लिए 100 लीटर पानी में अढ़ाई किलो डीएपी, अढ़ाई किलो यूरिया तथा आधा किलो जिंक का जो घोल तैयार कर फसलों में छिड़काव किया जाता है, उसे कृषि विश्वविद्यालय की तरफ से वैज्ञानिक तौर पर मंजूरी दिलवाई जाए। 

प्रोजेक्टर के माध्यम से दिया कीट ज्ञान 

सेमिनार में मौजूद महिला किसानों ने भी प्रोजेक्टर के माध्यम से फसलों में मौजूद मांसाहारी तथा शाकाहारी कीटों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। महिला किसान सविता ने बताया कि अगस्त माह में कपास की फसल के पत्ते बड़े हो जाते हैं और इससे नीचे के पत्तों तक धूप नहीं पहुंचती। इससे पौधे की भोजन बनाने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इस दौरान पौधे अपनी सहायता के लिए टिड्डों को बुलाते हैं। टिड्डे ऊपरी पत्तों के बीच में छोटे-छोटे छेद कर देते हैं। इससे नीचे के पत्तों तक भी धूप पहुंच जाती है और पौधे के सभी पत्ते भोजन बनाने लगते हैं। 


सेमिनार में भाग लेते कृषि अधिकारी तथा किसान। 

अब भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में सुनाई देगा बेजुबानों का दर्द

कीट साक्षरता की मुहिम को देश में फैलाने की किसानों की मांग को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करेगी भाजपा

रविवार को किसानों के साथ हुई भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में भाजपा नेताओं ने किसानों को दिया आश्वासन


जींद। अब भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र में जनहित के मुद्दों के साथ-साथ बेजुबान कीटों का दर्द भी सुनाई देगा। फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों के प्रयोग के कारण मारे जा रहे कीटों को बचाने की किसानों की मांग को भाजपा नेताओं ने अपने घोषणा पत्र में शामिल करने का आश्वासन दिया है। रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के दिल्ली स्थित आवास पर भाजपा नेताओं के साथ हुई जींद के कीटाचार्य किसानों की बैठक में भाजपा नेताओं ने कीट ज्ञान की इस मुहिम को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने पर सहमति जता दी है। इतना ही नहीं भाजपा नेताओं ने इस मुहिम को पूरे देश में फैलाने के लिए सत्ता में आने पर इस मुहिम के लिए अलग से प्रोजैक्ट तैयार करवाने का वायदा भी किसानों से किया है। 
फसलों में बढ़ते कीटनाशकों के प्रयोग के कारण दूषित हो रहे खान-पान तथा वातावरण को देखते हुए भाजपा पार्टी द्वारा रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी के दिल्ली के राय सिन्हा रोड पर स्थित कोठी नंबर छह में देशभर के प्रगतिशील किसानों की एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में भाग लेने के लिए भाजपा के केंद्रीय एवं किसान नेता नरेश सिरोही द्वारा जींद के कीटाचार्य किसानों को भी आमंत्रित किया गया था। भाजपा के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए रविवार को जींद से खाप प्रतिनिधि कुलदीप ढांडा के नेतृत्व में जींद जिले से दो महिला तथा दो पुरुष किसान भाजपा की बैठक में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। बैठक में हरियाणा के किसानों का प्रतिनिधित्व करते हुए कीटाचार्य किसान रणबीर मलिक ने भाजपा नेताओं को बताया कि फसलों में जिस तरह से अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा वह सब जानकारी के अभाव में किया जा रहा है। किसानों को फसलों में मौजूद कीटों की पहचान नहीं है और न ही उनके क्रियाकलापों के बारे में जानकारी है। जानकारी के अभाव के कारण किसान फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों तथा रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कर बेजूबान कीटों को मार रहे हैं। इससे हमारा खान-पान तथा पर्यावरण दूषित हो रहा है। मलिक ने बताया कि अगर खान-पान तथा पर्यावरण को दूषित होने से बचाना है तो सबसे पहले किसानों को  फसलों में मौजूद कीटों की पहचान करवाकर जागरूक करना होगा। किसानों को जागरूक किये बिना खान-पान तथा पर्यावरण को दूषित होने से बचाना संभव नहीं है। किसानों को जागरूक करने के लिए बैठक में किसानों ने भाजपा नेताओं के सामने चार मांगें रखी। भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने किसानों की इस मुहिम को अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने का आश्वासन दिया। 

यह रखी मांगें 

1. कृषि प्रधान देश को कृषक प्रधान देश बनाने के लिए रेल बजट की तर्ज पर कृषि के लिए अलग से बजट बनाया जाये। 
2. किसानों की कीट साक्षरता की मुहिम के लिए एक अलग से प्रोजैक्ट तैयार किया जाये
3. प्रोजैक्ट का नाम कीट क्रांति के जन्मदाता स्व. डॉ. सुरेंद्र दलाल के नाम से रखा जाये। 
4. कृषि क्षेत्र में स्व. डॉ. सुरेंद्र दलाल द्वारा किये गये कार्यों को देखते हुए डॉ. दलाल को मरणोपरांत राष्ट्रपति अवार्ड दिया जाये।

जींद के इन किसानोंं ने की भाजपा नेताओं से मुलाकात

गांव ललितखेड़ा से कीटाचार्य किसान रामदेवा, महिला किसान सविता, गांव निडाना से महिला किसान मिन्नी मलिक और कीटाचार्य रणबीर मलिक तथा बराह खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा ने रविवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहरजोशी से मुलाकात की। 

Friday, 7 March 2014

अब पंजाब में भी जागेगी कीट ज्ञान की अलख

कीट  ज्ञान की तालीम लेने जींद पहुंचा किसानों का दल 


जींद। जींद जिले के किसानों द्वारा थाली को जहरमुक्त करने के लिए शुरू की गई कीट ज्ञान की मुहिम अब जींद जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश से बाहर निकल कर दूसरे प्रदेशों में भी शुरू होगी। इसकी शुरूआत सबसे पहले कृषि क्षेत्र में अग्रीण प्रदेश पंजाब से होगी। कृषि तथा बागवानी विभाग के साथ-साथ पंजाब में कुदरती खेती की तरफ कदम बढ़ा रही इनोवेटव फार्मस एसोसिएशन पंजाब में इसकी अलख जगाएंगे। पंजाब में इस मुहिम की शुरूआत करने के लिए कृषि विभाग, बागवानी विभाग के अधिकारियों तथा इनोवेटव फार्मस एसोसिएशन के किसानों का एक 10 सदस्यीय दल एक दिवसीय प्रशिक्षण दौरे पर जींद पहुंचा और यहां के मास्टर ट्रेनर किसानों से कीट ज्ञान की तालीम ली।
किसानों द्वारा अधिक उत्पादन की चाह में फसलों में अंधाधुंध प्रयोग किए जा रहे कीटनाशकों के कारण जहरीले हो रहे हमारे खान-पान तथा दूषित हो रहे वातावरण को बचाने के लिए जींद जिले के किसानों ने वर्ष 2008 में डा. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में जींद जिले की धरती पर कीट साक्षरता की मुहिम का बीजारोपण किया था। वर्ष 2008 में जींद के किसानों द्वारा रोपित किए गए कीट साक्षरता के पौधे ने
अब एक वट वृक्ष का रूप धारण कर लिया है। इसके चलते जिले ही नहीं बल्कि प्रदेश से बाहर भी इसकी जड़ें फैलने लगी हैं। पंजाब के होशियारपुर से जींद में एक दिवसीय प्रशिक्षण दौरे पर पहुंचे किसान रेशम सिंह, अमरजीत तरसेम बख्शी सिंह गुरविंद्र जीत सिंह का कहना है कि उनके क्षेत्र में गेहूं, गन्ने तथा सब्जी की फसल होती है। अपनी फसलों को वह कीटें से बचाने के लिए फसलों में कई-कई बार कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं लेकिन कीटों की संख्या कंट्रोल होने की बजाए निरंतर बढ़ती जाती है। इनका कहना है कि वह पंजाब में कुदरती खेती की तरफ कदम बढ़ा रही इनोवेटव फार्मस एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं और कीटों को कंट्रोल करने के लिए कुदरती नुस्खे भी अपना चुके हैं लेकिन कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए अब उन्होंने हरियाणा प्रदेश के जींद जिले के किसानों द्वारा शुरू की गई कीट ज्ञान की मुहिम का सहारा लेकर फसलों में कीटों की पहचान करने का निर्णय लिया है। वहीं इन किसानों के साथ आए कृषि विकास अधिकारी डा. जसपाल ङ्क्षसह तथा बागवानी विभाग के उद्यान विकास अधिकारी डा. दीपक पूरी का कहना है कि जींद जिले के किसानों द्वारा शुरू की गई मुहिम को वह पंजाब में भी शुरू करेंगे। जींद के किसानों से वह कीट ज्ञान के गुर सिखकर पंजाब के किसानों को भी कीटों की पहचान करना तथा कीटों के क्रियाकलापों के बारे में जानकारी देंगे। इस प्रकार पंजाब के कृषि विभाग, बागवानी विभाग तथा इनोवेटव फार्मस एसोसिएशन द्वारा जींद की तर्ज पर पंजाब में भी इस मुहिम की शुरूआत की जाएगी।
कीट ज्ञान की मुहिम के बारे में जानकारी लेने के लिए जींद पहुंचा पंजाब के किसानों का दल।

Tuesday, 18 February 2014

अब पैसे के अभाव में ईलाज से वंचित नहीं रहेंगे बच्चे

0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को निशुल्क मिलेंगी स्वास्थ्य सुविधाएं

स्वास्थ्य विभाग ने किया 11 टीमों का गठन

गांव-गांव घूमकर बीमारी से पीडि़त बच्चों की पहचान करेंगी स्वास्थ्य विभाग की टीमें


जींद। आंगनवाड़ी तथा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 0 से 18 वर्ष तक के बच्चे अब आर्थिक कमजोरी के कारण उपचार से वंचित नहीं रहेंगे। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग अब आंगनवाड़ी तथा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को गंभीर बीमारी में भी निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाएगा। स्वास्थ्य विभाग की इस योजना की सबसे खास बात यह है कि इस सेवा का लाभ लेने के बच्चों को अस्पतालों के चक्कर भी नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की टीम खुद गंभीर बीमारी की चपेट में आने वाले बच्चों को ढूंढ़कर अस्पताल तक पहुंचाएगी। इस योजना को कारगर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सामान्य अस्पताल में डिस्ट्रीक अर्ली इंटरमैंशन सैंटर (डी.ई.आई.सी.) स्थापित किए जा रहे हैं और इस सैंटर को चलाने के लिए अलग से स्टाफ की नियुक्ति की जा रही है। 
सामान्य अस्पताल का वह कमरा, जहां डी.ई.आई.सी. का निर्माण किया जाना है।

11 मोबाइल टीमें करेंगी निगरानी

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत आंगनवाड़ी तथा सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों को सरकार की इस योजना का लाभ पहुंचाने के लिए डी.ई.आई.सी. के तहत ब्लॉक वाइज 11 मोबाइल टीमों का गठन किया गया है। प्रत्येक टीम में एक मेल डॉक्टर, एक फीमेल डॉक्टर, एक ए.एन.एम. तथा एक फार्मासिस्ट को शामिल किया गया है। डी.ई.आई.सी. की यह 11 टीमें जिले के सभी गांवों में घूमकर गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चों का पता लगाएंगी। 

निशुल्क मिलेंगी सभी स्वास्थ्य सुविधाएं

स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत ब्लड कैंसर, ह्रदय रोग, कैंसर सहित 30 प्रकार की ऐसी गंभीर बीमारियों को अपनी सूची में शामिल किया है, जिनके उपचार पर मोटी रकम खर्च होती है लेकिन स्वास्थ्य विभाग इन सभी बीमारियों से पीडि़त बच्चों का मुफ्त उपचार करवाएगा। स्वास्थ्य विभाग की सूची में शामिल इन 30 किस्म की गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चे को ओ.पी.डी. तक की पर्ची बनवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बच्चे को एक अलग किस्म का कार्ड जारी किया जाएगा। इस कार्ड के आधार पर ही बच्चे का पूरा उपचार निशुल्क होगा। अगर बच्चे की बीमारी सामान्य है तो स्वास्थ्य विभाग की टीम पी.एच.सी., सी.एच.सी. स्तर पर बच्चे का उपचार करवाएगी। यदि पी.एच.सी. या सी.एच.सी. स्तर पर बच्चे का उपचार सही तरीके से नहीं हो पाया तो बच्चे को सामान्य अस्पताल ले जाया जाएगा। अगर बच्चे की बीमारी गंभीर है तो उसे सामान्य अस्पताल से पी.जी.आई. रोहतक या चंडीगढ़ रैफर किया जाएगा। 

डी.ई.आई.सी. के निर्माण पर खर्च होंगे 20 लाख

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य योजना के तहत जिला स्तर पर तैयार होने वाले डी.ई.आई.सी. के भवन के निर्माण पर 20 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे और भवन तैयार होने के बाद इसके डैकोरेशन पर 2 लाख रुपए खर्च होंगे। इस योजना को सही तरीके से चलाने के लिए जिला स्तर पर निॢमत सैंटर पर 15 सदस्यों का स्टाफ होगा। इसमें डॉटा आप्रेटर, स्टाफ नर्स, लैब टैक्नीशियन, सोशल वर्कर से लेकर विशेषज्ञ तक मौजूद रहेंगे। 

समय पर मिल पाएगा बच्चे को उपचार

जिला स्तर पर डी.ई.आई.सी. शुरू होने से बच्चों को काफी लाभ मिलेगा। पैसों के अभाव में कोई भी बच्चा उपचार से वंचित नहीं रह पाएगा। 0 से 18 वर्ष तक के बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाएगा। इसकी सबसे खास बात यह होगी कि डी.ई.आई.सी. की टीमें गांव-गांव घूमेंगी और बच्चे के बीमारी की चपेट में आते ही उसका उपचार शुरू करवाएंगी। समय पर बच्चे को सही उपचार मिलने से बीमारी गंभीर रुप धारण नहीं कर पाएगी और बच्चे को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाएंगी। 
 डा. राजेश भोला का फोटो।

20 को जींद जिले में जुटेंगे प्रदेशभर के कृषि वैज्ञानिक

राज्य स्तरीय खेत दिवस में कीटों के शोध पर होगा गहन मंथन


जींद। जिला कृषि उप-निदेशक डा. रामप्रताप सिहाग ने कहा कि जींद जिले के किसानों ने थाली को जहरमुक्त करने की जो मुहिम शुरू की है उस मुहिम के साथ पूरे प्रदेश के किसानों को जोडऩे के लिए 20 फरवरी को जींद जिले के गांव ईगराह में राज्य स्तरीय किसान खेत दिवस का आयोजन किया जाएगा। हरियाणा के अलावा दूसरे प्रदेशों के कृषि वैज्ञानिक भी इस सम्मेलन में भाग लेंगे। कृषि विभाग तथा जींद जिले के किसानों की सहभागिता से होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर का पहला ऐसा अनोखा सम्मेलन होगा, जिसमें किसानों द्वारा कीटों पर किए गए शोध पर बड़े-बड़े कृषि वैज्ञानिक मंथन करेंगे। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में खाप पंचायतों की भी बड़ी भागीदारी रहेगी। प्रदेश के कृषि निदेशक डा. बृजेंद्र सिंह सम्मेलन में बतौर मुख्यातिथि तथा डी.सी. जींद राजीव रत्न विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शिरकत करेंगे। डा. सिहाग सोमवार को शहर की अर्बन एस्टेट कालोनी में स्थित जाट धर्मशाला में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। 
 डा. सिहाग ने कहा कि कृषि विभाग के ए.डी.ओ. डा. सुरेंद्र दलाल ने वर्ष 2008 में थाली को जहरमुक्त करने के लिए जींद जिले के निडाना गांव से जिस मुहिम की शुरूआत की थी आज उस मुहिम ने एक क्रांति का रूप धारण कर लिया है और कृषि विभाग भी उनकी इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए बराबर की भागीदारी दर्ज करवा रहा है। यहां के किसानों ने डा. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में कीटों पर अनोखे शोध किए हैं। इसी की बदौलत आज यहां के किसानों को लगभग 206 किस्म के शाकाहारी तथा मांसाहारी कीटों की पहचान हो चुकी है। इनके प्रयोग को देखकर दूसरे जिलों के किसान भी इनसे कीट ज्ञान लेने के लिए समय-समय पर यहां आते हैं। 
जींद जिले के किसानों ने कीटों की पहचान कर फसलों में बिना किसी पेस्टीसाइड का प्रयोग किए रिकार्ड तोड़ उत्पादन प्राप्त किया है। डा. सिहाग ने कहा कि अब तो कृषि वैज्ञानिकों ने भी इन किसानों के इस शोध पर अपनी सहमति की मोहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि अब इस मुहिम से पूरे प्रदेश के किसानों को जोडऩे के लिए इस राज्य स्तरीय खेत पाठशाला के आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में यहां के कीट कमांडो किसान बाहर से आए किसानों के साथ अपने अनुभव सांझा करेंगे। इससे दूसरे जिलों के किसानों को भी उनकी इस मुहिम से जुडऩे का अवसर मिलेगा। बराह खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा ने कहा कि डा. सुरेंद्र दलाल के निमंत्रण पर खाप पंचायतें भी पिछले 2 साल से इस मुहिम में शामिल होकर इन किसानों के इस शोध पर गहन मंथन कर रही हैं। अब तक 105 से ज्यादा खापों के प्रतिनिधि किसान पाठशालाओं में शामिल होकर इनकी इस मुहिम का बारिकी से निरीक्षण कर चुके हैं। इस सम्मेलन में खाप पंचायतें भी कृषि विभाग तथा इन किसानों के साथ मिलकर इस मिशन को आगे बढ़ाएंगी ताकि खाने की थाली को जहरमुक्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि यहां के किसान तो कपास के साथ-साथ सभी फसलों में इस प्रक्रिया को अपना चुके हैं। उन्होंने कृषि विभाग से इस योजना को राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की मांग की ताकि फसलों में अंधाधुंध प्रयोग हो रहे पेस्टीसाइड के कारण दूषित हो रहे खान-पान को दूषित होने से बचाया जा सके। इस मौके पर उनके साथ ए.डी.ओ. डा. कमल सैनी, राजपुरा भैण गांव के पूर्व सरपंच बलवान लोहान, डा. सुरेंद्र दलाल कीट साक्षरता कमेटी के प्रधान रणबीर मलिक, मनबीर रेढू आदि भी मौजूद थे। 
 पत्रकारों से बातचीत करते डी.डी.ए. डा. रामप्रताप सिहाग तथा बराह खाप प्रधान कुलदीप ढांडा।

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...