पीएम मोदी की बात डीसी अमित खत्री पर हो रही सही साबित
जींद, जींद के युवा डीसी अमित खत्री की युवा सोच और युवा जोश से जींद की सूरत तेजी से बदल रही है। तकनीकी रूप से जींद जिला अब प्रदेश के अनेक जिलों को पीछे छोड़ रहा है और इस क्षेत्र में जींद के माथे से पिछड़ेपन का दाग अब मिट रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपायुक्तों को लेकर कही गई बात जींद में डीसी अमित खत्री पर एकदम सही साबित हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यह कहा कि जिलों में उपायुक्त उम्र दराज अधिकारी नहीं होने चाहिएं। जिलों में इन पदों पर युवा अधिकारी नियुक्त हों तो वह ज्यादा एनर्जी के साथ काम करते हैं। प्रधानमंत्री की यह बात जींद में डीसी अमित खत्री पर एकदम सही साबित हो रही है। जब से युवा आईएएस अधिकारी अमित खत्री ने जींद में डीसी का पद संभाला है, उन्होंने अपनी युवा सोच और युवा जोश से जींद की सूरत बदलनी शुरू की है। पहली बार उन्हें किसी जिले में उपायुक्त के पद पर लगाया गया है। 2012 बैच के इस आईएएस अधिकारी ने तकनीकी रूप से जींद को प्रदेश के अग्रणी जिलों में शुमार करने में अपनी सारी एनर्जी लगाई है। इसी का नतीजा है कि जींद का तमान रैवेन्यू रिकार्ड अब कप्यूटराइज्ड होने जा रहा है। यह खुद में बहुत बड़ा ककाम है और इसे करवाने का मादा डीसी अमित खत्री ने दिखाया। इसी तरह जींद में जीआईएस लैब स्थापित होना भी युवा डीसी की सोच का नतीजा है। इस तरह की लैब वाला जींद प्रदेश का महज चौथा जिला है। जीआईएस लैब से जींद के विकास को नई गति मिलेगी। हाल ही में 30 लाख रूपए की लागत से बनी जीआईएस लैब को प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने जनता को समर्पित किया। जिले के ई-दिशा केंद्रों की सूरत बदलने जैसे बड़े कदम भी डीसी अमित खत्री ने उठाए हैं। कंप्यूटर लिटरेसी बस भी जल्द जींद में आ रही है। इसे भी डीसी अमित खत्री ने जींद जिले में रोजगार के लिए सबसे अहम मानते हुए जिला इनोवेशन फंड से इसके लिए लगभग 38 लाख रूपए की राशि का प्रावधान किया है। कंप्यूटर लिटरेसी बस को लेकर डीसी अमित खत्री का मानना है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। अब रोजगार सरकारी या निजी, जिस भी क्षेत्र में चाहिए, इसके लिए कंप्यूटर लिटरेसी जरूरी है।
शहर के कचरे से कम्पोस्ट खाद की योजना
डीसी अमित खत्री ने शहर के गीले और ठोस कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाने की योजना भी हाथ में ली है। गुरू ग्राम में नगर निगम के प्रशासक रहते अमित खत्री ने वहां कचरे से कम्पोस्ट खाद बनते देखी थी। लगभग 2 लाख की आबादी वाला जींद शहर हर रोज 80 टन ठोस और इससे कहीं ज्यादा गीला कचरा उगलता है। कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाने को लेकर उन्होंने शहर के 2 वार्डो 14 और 16 में काम शुरू कर वा दिया है। यहां बनने वाली कम्पोस्ट खाद को कृषि और बागवानी विभाग को दिया जाएगा, ताकि वह इसका इस्तेमाल अपने प्लांटों में कर सकें । यह पायलट प्रोजैक्ट सफल रहता है तो फिर 15 अगस्त तक शहर के तमाम 31 वार्डो में कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाकर उसे किसानों को बेचना शुरू किया जाएगा। इस योजना को लेकर डीसी अमित खत्री का कहना है कि शहर के कचरे का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं हो सकता। दक्षिण भारत में कुछ जगह कचरे का कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इससे एक तो पर्यावरण साफ रहता है और दूसरे गंदगी भी नहीं फैलती। तीसरा फायदा यह है कि खेतों और बागों के लिए कम्पोस्ट खाद उपलब्ध हो जाती है।
2 साल से भी ज्यादा समय से अधर में लटकी सीसीटीवी लगाने की योजना को चढ़ाया सिरे
2 लाख की आबादी वाले जींद शहर को सुरक्षा के लिए तीसरी आंख की पहरेदारी में लाने की योजना 2 साल से भी ज्यादा समय से अधर में लटकी हुई थी, जब मुकेश देवी नगर परिषद की प्रधान थी, तब शहर में 50 सीसीटीवी कैमरे अहम और संवेदनशील स्थानों पर लगाए जाने की योजना बनी थी। इस योजना की फाइल 2 साल से भी ज्यादा समय तक धूल फांकती रही। अब डीसी अमित खत्री ने इस अहम फाइल को खंगालते हुए इसकी धूल हटाई। योजना की तमाम खामियों को दूर किया और सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 4 करोड़ रूपए की राशि को मंजूरी दिलवाई। 4 करोड़ रूपए की लागत से शहर के 20 चौराहों पर हाई क्वालिटी के 80 सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। इससे अपराध रोकने में मदद मिलेगी और शहर की सुरक्षा मजबूत होगी। पुलिस को भी इससे काफी मदद अपराध रोकने में मिलेगी।
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