Tuesday, 3 October 2017

नाबालिग युवक की शादी रूकवाई

दुल्हा साढ़े 13 वर्ष का, दुल्हन साढ़े 17 वर्ष की

 जींद 
जिले में बाल विवाह का एक अजीबो गरीब मामला सामने आया है जहां बडे दुल्हा-दुल्हन बालिग थे वहीं छोटे दुल्हा-दुल्हन नाबालिग निकले। जिले के हैबतपुर गांव में देर शाम को जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी कार्यालय द्वारा नाबालिग दुल्हा-दुल्हन की शादी को रुकवाया गया है। इस शादी में जहां दुल्हन की उम्र साढे 17 वर्ष वहीं उससे शादी करने आए दुल्हे की उम्र मात्र साढ़े 13 वर्ष पाई गई और वह गांव के ही सरकारी स्कूल में नौंवी कक्षा का छात्र मिला। ऐसे में हिसार जिले के बालक गांव से आई बारात को एक  दुल्हन के साथ ही वापस घर लौटना पड़ा। विभाग द्वारा परिजनों से लिखित में दोनों के बालिग होने तक शादी नहीं करवाने का ब्यान लिया गया। जिला महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी करमिंद्र कौर को को सूचना मिली थी कि जिले के हैबतपुर गांव मेेंं दो नाबालिग बच्चों की शादी बड़ी धूमधाम से करवाई जा रही है व दोनों की बारात भी अभी पहुंची है और फेरों की तैयारी जारी है। इस पर कार्यवाही करते हुए सहायक बाल विवाह निषेध अधिकारी रवि लोहान, एएसआई राजबीर सिंह, हैड कांस्टेबल कुलबीर, एसपीओ सुरेशकुमार, महिला हैड कांस्टेबल राजेश, कांस्टेबल सरिता, चाईल्ड हैल्पलाइन से विनोद, सुरेश सिविल लाईन थाना पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे तो बाराती नाच-गा रहे थे। इस पर टीम ने विवाह स्थल पर परिवार के लोगों से दोनों के जन्म पत्र मांगे तो दोनों लड़कियों की उम्र साढे 17 वर्ष व 20 वर्ष मिली। इसके बाद जब बारात लेकर आए दोनों लड़क ों के बालिग होने का प्रमाण पत्र मांगा गया तो बालक गांव से आई बारात में हडकंप मंच गया और नाच-गाना बंद हो गया। पहले तो बारातियों ने कोई भी प्रमाण पत्र दिखाने में आना कानी की लेकिन जब सख्ती की तो लगभग दो घंटे के बाद लगभग जो सर्टिफिकेट पत्र दिखाए उसमें बड़े दूल्हे की उम्र 27 वर्ष निकली और दोनों लड़के सगे भाई मिले व छोटे लडके की उम्र तो मात्र साढे 13 वर्ष पाई गई और जिस लड़की के साथ उसकी शादी हो रही थी उसकी उम्र साढ़े 17 वर्ष थी। छोटे लड़के को देखकर टीम भी दंग रह गई। उससे जब बातचीत की गई तो वह कुछ नहीं बोल पाया। इस पर उसके परिजनों ने बताया कि उनके पिता बीमार रहते हंै। इसलिए खर्चा बचाने के लिए ही बडे लड़के के साथ ही छोटे लड़के की शादी कर रहे थे। इस पर कार्यवाही करते हुए टीम ने छोटे लड़के  व लड़की का विवाह रोकने को कहा और तब तक शादी न करने को कहा जब तक दोनों बालिग नहीं हो जाते। इस मामले में जब दोनों के परिवारजनों से बातचीत की गई और दूल्हा-दुल्हन व उनके परिवार के लोगों को मौके पर ही समझाया गया कि यह विवाह नहीं हो सकता क्योंकि कानूनन लड़के की शादी की उम्र 21 वर्ष व लड़क ी की उ
म्र 18 वर्ष निर्धारित हैै और छोटी लड़की की उम्र भी कम है और छोटे लड़के की उम्र तो मात्र 14 वर्ष है इसलिए आप इनके बालिग होने तक का इंतजार करें ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए। इसके बावजूद भी अगर आप नाबालिग बच्चों की शादी करते हैं तो आप सभी के खिलाफ भी कानूनी कार्यवाही की जाएगी। तब कहीं जा कर परिवार के लोग माने और दोनों परिवारों ने इस पर विवाह स्थगित कर दिया तथा और दोनों परिवारों द्वारा महिला संरक्षण एवं बाल विवाह निषेध विभाग के अधिकारियों को लिखित ब्यान दिये कि वह कानून की पालना करेंगे तथा दोनों लड़कोंंंके बालिग होने पर ही उनकी शादी करेंगे। जिस कारण गाजे बाजे के साथ बारात लेकर गए दुल्हों को एक  दुल्हन के साथ ही वापिस गांव बालक लौटना पड़ा। 

Sunday, 1 October 2017

हृदय रोग के बारे में दी जानकारी

मरीजों को हृदय रोग से बचाव और लक्षणों के बारे में बताया 
जींद 
विश्व हृदय दिवस के अवसर पर सिविल अस्पताल में सिविल सर्जन डॉ. संजीव दहिया के मार्गदर्शन में जागरूकता कैंप का आयोजन किया गया। इसमें मरीजों को हृदय रोग से बचाव और लक्षण के बारे में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में फाइनैंस कम लाजिस्टिक कंसलटैंट रीतू खोखर ने एनपीसीडीसीएस के विषय जानकारी देते हुए बताया कि डिस्ट्रिक एनसीडी सैल द्वारा एनपीसीडीसीएस के तहत डायबिटीज, कैंसर, सीवीडीएस और स्ट्रोक आदि बीमारियों को कंट्रोल करना ही सबसे बेहतर उपाय है। उन्होंने बीमारी के उपचार के लिए महत्वपूर्ण जानकारी मरीजों को दी। रीतू खोखर ने बताया कि सिविल अस्पताल में इन सभी बीमारियों की सभी सेवाएं निशुल्क रूप से उपलब्ध करवाई जा रही हैं। 29 सितम्बर से 15 अक्तूबर तक 30 साल या इससे अधिक आयु वाले सभी मरीजों का ब्लड प्रेशर मेजरमैंट किया जाना है ताकि हृदय रोग संबंधी सभी बीमारियों की जांच एवं उपचार समय पर संभव हो सके। इस मौके पर डॉ. जय सिंह, डा. सुरेंद्र, डॉ. साहिल, डॉ. किताब सिंह ने भी हृदय रोग के बारे में जानकारी दी और बताया कि हार्ट अटैक आने पर किस प्रकार से क्या करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हृदय रोग को कम करने के लिए मरीजों को फल और सब्जियों का ज्यादा से ज्यादा सेवन करना चाहिए। ब्लड प्रेशर अधिक होने पर नमक और वसायुक्त भोजन का सेवन कम कर दे, अगर मरीज को ब्लड प्रेशर और मोटापे पर नियंत्रण रखना है तो प्रतिदिन व्यायाम करें। योगा ज्ञान समय-समय पर करते रहे। तंबाकू, धूम्रपान एवं शराब आदि का सेवन बिल्कुल भी नहीं करें।

कहानियों का बाल रंगमंच नाटक का मंचन किया

बच्चों ने छोटी-छोटी कहानियों का किया मंचन 

जींद
एक्टिव थियेटर एंड वैलफेयर सोसायटी द्वारा हरियाणा कला परिषद व हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के तत्वावधान में चल रहे 11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के नौंवें दिन कहानियों का बाल रंगमंच नाटक का मंचन रंगकर्मी रमेश कुमार, कृष्ण कुमार के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यअतिथि समाज सेवी यादवेन्द्र खर्ब व मोती लाल नेहरु स्कूल की निदेशिका मिनाक्षी आन्नंद ने किया। एसआरएस सीनियर सैकेंडरी स्कूल, आईएमटी रोहतक व गोपाल विद्या मन्दिर जींद के कलाकार विद्यार्थियों ने कहानियों का रंगमंच पर आधारित तीन कहानियों का नाट्य रूपान्तरण किया। जिनमें जामुन का पेड़, रीढ़ की हड्डी और शेर और खरगोश नाटक रहे। हास्य व्यंग्य से भरी कहानी जामुन का पेड़, कृष्ण चंद्र जो कि उर्दू साहितय के प्रसिद्ध लेखक हैं के द्वारा लिखित है। इसकी कहानी हमारे समाज की मुख्य त्रासदी लाल फीता शाही को सामने लाती है कि हमारे दफ्तरों में जिस तरह के तौर तरीकों का इस्तेमाल होता है उससे किसी भी आदमी को राहत नहीं मिलती बल्कि उलटे इस तरह के सरकारी और टरकाऊ रवैये से मुसीबतजदा आदमी की जान पर बन आती है। कहानी के मुख्य पात्र के रूप में शायर को चुना है। जो रात आए तूफान के कारण जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है। जिस जामुन के पेड़ के नीचे शायर दबता है वो व्यापार विभाग के आगन में होता है। जैसे ही विभाग के कर्मचारियों को इस बात का पता चलता है तो वो इसकी सूचना बड़े अधिकारीयों को देते हैं और अधिकारी कहते है वो जामून का पेड़ अमेरीका के राष्ट्रपति ने लगवाया था इसलिए उस पेड़ को ना काटा जाए। जब उपर से फाइल पास हुई के अब पेड़ को काट सकते हों तब तक शायर मर चुका होता है। ये हमारी शासन व्यवस्था की कमजोरी है। रीढ़ की हड्डी नाटक बाबूराम स्वरूप के घर से शुरू होता है। आज उनके घर बेटी उमा को देखने के लिए गोपाल व बेटा शंकर पहुंचते हैं। लड़की से ना जाने कैसे-कैसे सवाल पूछते हैं लेकिन लड़की उन सवालों का विरोध करते हुए रिश्ते से मना कर देती है व लड़कियों के लिए एक आदर्श बनकर उभरती है। उमा समाज से सवाल करती है कि हम लड़कियाँ किसी भी क्षेत्र में लड़को से कम नही है। शेर और खरगोश कहानी के नाट्य रूपांतरण में हाथी सभी जानवरों की एक सभा बुलाता है और शेर के आतंक के बारे में बताता है। अबतक शेर कई जानवरों को मार चुका है तो शेर सवाल करता है कि अब क्या किया जाए। खरगोश कहता है कि महाराज मैं उस शेर को मार कर अभी आता हूं  आप मुझे आज्ञा दीजिए। खरगोश शेर को एक कुएं मे कूदने को कहता है कि महाराज इसमें आप से बड़ा एक शेर रहता है जो हमें परेशान करता है। उसको आप खत्म करिये और कुएं में कूद जाइए। शेर हंसता है और कहता है तुम्हारे बाप-दादाओं ने मेरे बाप-दादाओं को इसी कुएं में मारा था। मै जंगल के स्कूल से पांचवी पास हूं। अब मैं तुम्हे नहीं छोडूंगा।  खरगोश अपनी जान बचाकर भागता है। नाटक के दौरान कई बार दर्शक भावुक हुए व तालियों की गडग़ड़हाट से बाल कलाकारों का मान बढ़ाया। मुख्यअतिथि यादवेन्द्र खर्ब, मिनाक्षी आन्नंद ने कहा यह नाटक मेरे जीवन के लिये बहुत प्ररेणादायक रहा है। इस मौके पर सुरेंद्र जैन, सुभाष श्योराण, डा. केएस गोयल, डा. रमेश बंसल, डा. रमेंद्र, मंजू मानव, डा. बनीष गर्ग आदि मौजूद रहे। 

बेटे का दोस्त बता वृद्ध महिला की ठगी सोने की चुड़ी

खुद को एनआरआई बता ले लिया वृद्ध महिला को विश्वास में
अज्ञात व्यक्ति पर चोरी तथा धोखाधड़ी का मामला दर्ज

जींद
जैन नगर में एक वृद्ध महिला को उसके बेटे का दोस्त तथा खुद को अमरीकी एनआरआई बता महिला से सोने की दो चुडिय़ा ठग ली और फरार हो गया। शहर थाना पुलिस ने महिला की शिकायत पर अज्ञात युवक के खिलाफ चोरी तथा धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी। जैन नगर निवासी 62 वर्षीय रत्नप्रभा ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि दोपहर बाद उसके मकान पर एक युवक आया। युवक ने खुद को उसके बेटे कमल का दोस्त बताया और साथ ही बताया कि वह अमेरिका में शैटल हो गया है और वहां की नागरिकता भी मिल गई है। रत्नप्रभा ने युवक को बेटे का दोस्त समझकर उसकी खातिरदारी की। युवक ने रत्नप्रभा को बताया कि उसकी मां भी साथ आई हुई है। जो सोने की चुडिय़ा बनवाना चाहती है। रत्नप्रभा ने पहनी हुई चुडिय़ों के डिजाइन को पसंद बताया। किसी प्रकार का संदेह न हो युवक ने रत्नप्रभा के फोन से उसके बेटे के साथ बातचीत का नाटक भी किया। युवक पर विश्वास कर रत्नप्रभा उसकी मां से मिलने के लिए उसके साथ चली गई। युवक ने रत्नप्रभा से दोनों सोने की चुडिय़ा ले ली और अपनी मां को दिखाने की बात कहकर कुछ देर वहीं इंतजार करने के लिए कहा। काफी देर तक युवक वापस नहीं लौटा तो रत्नप्रभा को संदेह हुआ और घटना के बारे में परिजनों तथा पुलिस को सूचना दी। जिस पर शहर थाना पुलिस ने रत्नप्रभा की शिकायत पर अज्ञात युवक के खिलाफ चोरी तथा धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। 
शहर थाना के जांच अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि महिला को उसके बेटे का दोस्त बता धोखाधड़ी की गई है। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है। इलाके में लगाए गए सीसी टीवी कैमरों की फूटेज को खंगाला जा रहा है। 

पिंडारा तीर्थ पर गांव की सुख समृद्धि के लिए किया हवन

हर साल रावण का पुतला ना जला हवन कर मनाते हैं दशहरे का त्योहार

जींद 
गांव पिंडारा स्थित सोम तीर्थ पर हवन व भंडारे का आयोजन किया गया
। बाबा लौंगपुरी महाराज की समाधि पर प्रत्येक वर्ष विजयदशमी के दिन ग्रामीण ध्वजा चढ़ा कर व उस धवजा को तीर्थ के चारों ओर परिक्रमा करा मंदिर के ऊपर फहराया जाता है। दसनामी डेरा के महंत पूनम पुरी महाराज ने बताया कि प्राचीन काल से ही विजयदशमी के दिन हवन व भंडारे का आयोजन सिद्ध महात्मा बाबा लॉग पुरी महाराज की याद में किया जाता है।  लौंग पुरी महाराज तपस्या करते हुए समाधिस्थ हो गए थे। इस समाधि पर 28 गांव के व्यक्ति दूध भी चढ़ाते हैं। पूर्व ब्लाक समिति सदस्य धर्मवीर पिंडारा ने बताया सारे ग्रामीण इक_ा होकर है इस हवन का आयोजन करते हैं ताकि गांव के अंदर सुख शांति वह समृद्धि बनी रहे। इक_े होकर ऐसे सामाजिक कार्य करने पर समाज का ताना बाना बना रहता है वह भाईचारे की भावना बढ़ती है। ग्रामीणों के अंदर  इस कार्यक्रम में काफी उत्साह था। ग्रामीणों ने बताया कि  इस हवन के करने से गांव के अंदर अच्छी उर्जा का विस्तार होगा  मैं बीमारियों से मुक्ति मिलेगी। इस दौरान ग्रामीणों ने तीर्थ पर सफाई अभियान भी चलाया। हवन के दौरान मुख्य रूप से धर्मवीर शर्मा, जसवंत, जयभगवान शास्त्री, कुलदीप रंधावा, रामफल, जसविंदर, वीरेंद्र आदि मौजूद रहे। 

विजय दशमी का पर्व धूमधाम से मना


 

धूंधूं कर जला बुराई का प्रतीक रावणअर्जुन स्टेडियम में फूंके रावण और परिवार के पुतले 

जींद

जिलेभर में शनिवार को दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया। अर्जुन स्टेडियम में अधर्म पर धर्म तथा बुराई पर अच्छाई के प्रतीक विजय दशमी पर्व पर रेलवे जंक्शन स्थित स्कूल मैदान, अर्जुन स्टेडियम में बुराई के प्रतीक रावण, कुंभकरण तथा मेघनाथ के पुतले फूंके गए। इस मौके पर शहर में कई जगहों पर मेलों का आयोजन किया जिसमें लोगों ने जमकर खरीददारी की। अर्जुन स्टेडियम में रावण दहन के चलते देर शाम वहां जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। विजय दशमी पर्व पर मंदिरों में भी विशेष पूजा तथा यज्ञ का आयोजन किया गया। रेलवे जंक्शन स्कूल ग्राउंड के आसपास छोटे-छोटे झूले लगाए गए थे। बच्चों ने तीर कमान, तलवार खरीदे। वहीं राम, हनुमान के मुखौटे भी बच्चों में आकषर्ण का केंद्र रहे। ज्यों-ज्यों शाम नजदीक आती गई वैसे-ïवैसे अर्जुन स्टेडियम तथा रेलवे ग्राऊंड में भीड़ बढ़ती गई। दशहरा पर्व को लेकर शाम को रघुनाथ मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। राम, लक्ष्मण, हनुमान की आर्कषक झांकियां बनाई गई थी। शोभायात्रा शहर के तांगा चौक, पालिका बाजार, मेन बाजार, झांझ गेट, बैंक रोड से होती हुइ अर्जुन स्टेडियम में पहुंची। उधर, रेलवे जंक्शन राजकीय स्कूल मैदान में रावण का 65 फुट का पुतला आकर्षण का केंद्र बना रहा। अर्जुन स्टेडियम में रावण 45 फुट का पुतला जबकि मेघनाथ तथा कुंभकर्ण के 40-40 फूट के पुतले बनाए गए थे। रावण के वध पर जमकर आतिशबाजी की गई। जिसका दर्शकों ने आनंद उठाया। श्री सनातन धर्म आदर्श रामलीला क्लब द्वारा अर्जुन स्टेडियम तक शोभा यात्रा निकाली गई। विजय दशमी के अवसर पर पूरे दिन बाजारों में चहल-पहल रही। अर्जुन स्टेडियम में किलेे वाली श्री सनातन धर्म रामलीला कमेटी की ओर से रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के विशालकाय पुतले जलाए गए। जिसमें मुख्यअतिथि के तौर पर भाजपा के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी तथा नप अध्यक्षा पूनम सैनी शामिल हुए। उधर, रेलवे रामलीला कल्ब की ओर से रेलवे जंक्शन स्कूल ग्राउंड में रावण दहन किया गया। जिसमें मुख्यअतिथि के तौर पर रानी इंद्रजीत कौर तथा रेलवे के डिवीजन इंजीनियर रणधीर सिंह शामिल हुए। 
बाक्स के लिए 
रावण का पुतला दहन से पूर्व लोगों ने रावण की पूजा अर्चना की और सुख समद्धि की कामना की। अंत समय में रावण द्वारा लक्ष्मण को दिया गया ज्ञान ने भी लोगों को नसीहत दी। पुतला दहन के बाद लोग रावण के पुतले की लकडिय़ों को अपने घर उठाकर ले गए। 
बाक्स के लिए 
शनिवार को दशहरा पर्व को लेकर बाजार में भीड़ भाड़ रही। लोगों ने जमकर खरीददारी की। शहर के सभी मुख्य मार्गो पर मिठाईयों की दुकान सजी हुई थी। लोगों ने मिठाई बांटकर एक दूसरे को बधाई दी। सुरक्षा की दृष्टि से आयोजन स्थलों पर भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। सावर्जनिक स्थानों पर मोर्चा बंदी की गई थी। 

जाति ही पूछो साधु की नाटक से व्यवस्थाओं पर किया कटाक्ष


दो-टूकपन और व्यंगता ने दर्शकों को किया लोट-पोट 

जींद 
एक्टिव थियेटर एंड वैलफेयर सोसायटी द्वारा हरियाणा कला परिषद व हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के तत्वावधान में चल रहे 11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाटय उत्सव के दसवें दिन जाति ही पूछो साधु की नाटक का मंचन रंगकर्मी दुष्यंत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यअतिथि निदेशक सुप्रीम स्कूल व प्रमुख समाज सेवी रामनिवास दूहन व अतिरिक्त मुख्य सलाहकार मैक कुरुक्षेत्र संजय भसीन अध्यक्षता में हुआ। नाटक जाति ही पूछो साधू की विजय तेन्दुलकर का यह नाटक समकालीन सामाजिक विद्रूप को थोड़ा व्यंग्यात्मक नजरिये से खोलता है। एमए की डिग्री से लैस होकर महीपत नौकरी की जिस खोज-यात्रा से गुजरता है, वह शिक्षा की वर्तमान दशा, समाज के विभिन्न शैक्षिक स्तरों के परस्पर संघर्ष और स्थानीय स्तर पर सत्ता के विभिन्न केंद्रों के टकराव की अनेक परतों को खेलती जाती है। इस नाटक को पढ़ते देखते हुए हमें स्वातंत्रयोत्तर भारत की कई ऐसी छवियों का साक्षात्कार होता है जो धीरे-धीरे हमारे सामाजिक और व्यक्तिगत जीवन का हिस्सा हो चुकी है। वे हमें स्वीकार्य लगती हैं लेकिन उन्हीं के चलते धीरे-धीरे हमारा सामूहिक चरित्र खोखला होता जा रहा है। अपने दो-टूकपन, सामाजिक सरोकार और व्यंग्य की तीव्रता के कारण अनेक निदेेशकों, अभिनेताओं और असंख्य दर्शकों की पसंद रहे इस नाटक के दिल्ली में ही शताधिक मंचन हो चुके हैं। नाटक के मुख्य पात्र महिपत बबरूवाहन व नलिनी दोनों ही शिक्षक हैं। बबना बिगडैल मां-बाप की औलाद है। वह लड़कियों को छेडऩा, पढ़ाई न करना ये उसके फितरत में शामिल है। नाटक में दिखाया गया के किस तरह से एक अंगूठा छाप का एक एजुकेशन सोसायटी का चेयरमैन बन जाता है और जब एक लैक्चरर पद के लिए महिपत नाम के उम्मीद्वार का इन्टरव्यू में जाति, धर्म, शादी के बारे में पूछा जाता हैै जबकि चेयरमैन खुद अंगूठाटेक है। नाटक ने हमारी शिक्षा व्यवस्था पर करारा कटाक्ष किया। जिसको देखकर दर्शक भावविभोर हो गए व तालियों की गडग़ड़हाट से कलाकारों का मान बढ़ाया। इस मौके पर डा. केएस गोयल, डा. रमेश बंसल, डा. प्रियदर्शी, मंजू मानव, डा. बनीष गर्ग सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। 

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...