Tuesday, 9 October 2012

निडाना में हो रही है एक नई क्रांति की शुरूआत : दलाल


कीट ज्ञान हासिल करने किसान आयोग के सचिव व जबलपुर यूनिवॢसटी के पूर्व वाइसचांसलर भी पहुंचे निडाना

जींद। चौ. चरण ङ्क्षसह कृषि विश्वविद्यालय के भूतपूर्व रजिस्ट्रार एवं हरियाणा किसान आयोग के सचिव डा. आर.एस. दलाल ने कहा कि निडाना के किसानों ने कीट ज्ञान की जो मशाल जलाई है यह देश, कृषि क्षेत्र, विज्ञान, शिक्षा क्षेत्र व मानव के लिए एक नई क्रांति है। प्रकृति के साथ छेड़छाड़ मानव हित में नहीं है, क्योंकि प्रकृति अपना हिसाब-किताब रखती है। डा. दलाल मंगलवार को किसान-कीट विवाद की सुनवाई के लिए निडाना किसान पाठशाला में सर्व खाप पंचायत की बैठक में मौजूद खाप प्रतिनिधियों व किसानों को सम्बोधित कर रहे थे। बैठक की अध्यक्षता सर्व खाप पंचायत के संयोजक कुलदीप ढांडा ने की। इस अवसर पर बैठक में सर्व जातीय सर्व खाप पंचायत के प्रधान नफे ङ्क्षसह नैन, सर्व खाप के प्रैस प्रवक्ता सूबे ङ्क्षसह समैन, बूरा खाप के प्रधान हरिनारायण बूरा व जबलपुर यूनिवॢसटी के भूतपूर्व वाइसचांसलर डा. डी.पी. ङ्क्षसह भी मौजूद थे। 
पाठशाल की शुरूआत कीट अवलोकन, निरीक्षण के साथ की गई। कीट निरीक्षण के बाद किसानों ने कीट बही 
 कीट बही खाता तैयार करते किसान। 
खाता तैयार किया। मास्टर ट्रेनर रणबीर मलिक ने कहा कि कपास की फसल में मौजूद काला बाणिया व लाल बाणिया कपास के अंदर मौजूद बीज का रस चूसते हैं लेकिन किसानों को फसल में इसका नुक्सान नजर नहीं आता। किसानों को इसके नुक्सान का पता उस वक्त लगता है जब किसान अपनी फसल को बेचने के लिए मंडी में पहुंच कर उसका वजन करवाता है। काले व लाल बाणिये द्वारा बीज का रस चूसने के कारण कपास का वजन कम हो जाता है। कीटनाशक के प्रयोग से मिलीबग नामात्र ही कंट्रोल होता है। जबकि इसके बच्चों पर कीटनाशक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। क्योंकि मिलीबग अपने अंड़े एक थैली में देता है और थैली के अंदर तक कीटनाशक पहुंच नहीं पाता। मलिक ने बताया कि कीटनाशकों के प्रयोग से फसल में कीटों की संख्या कम होने की बजाय ज्यादा बढ़ती है। क्योंकि इससे पौधों की सुगंध छोडऩे की शक्ति गड़बड़ा जाती है और विभिन्न किस्म के कीट भ्रमित होकर एक साथ फसल में दस्तक दे देते हैं। मनबीर रेढ़ू ने बताया कि कपास के जीवनचक्र के दौरान 13 किस्म के पर्णभक्षी कीट फसल में आते हैं। फसल की शुरूआत में सलेटी भूंड, टिड्डे आते हैं। इनके बाद पत्ता लपेट, सुरंगी कीड़ा, कुबड़ा व अर्धकुबड़ा कीड़ा, तम्बाकू वाली सूंडी, लाल बालों वाली बिहारण सूंड़ी आती हैं। इनके अलावा फसल में आने वाले फलहारी कीट अमरिकन व चितकबरी सूंडी, चैपर बिटल तो कभी-कभार ही नजर आते हैं। पाठशाला के संचालक डा. सुरेंद्र दलाल ने बताया कि किसानों को खेत के ईद-गिर्द खड़ी खरपतवार को नष्ट नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस खरपतवार पर ही सबसे ज्यादा मासाहारी कीट मौजूद रहते हैं। डा. दलाल ने कहा कि अकेले कांग्रेस घास पर ही मिलीबग को खाने वाले 36 किस्म के मासाहारी कीट मिल जाते हैं। 

खुद का ज्ञान पैदा करो सफलता तो झक मारती पीछे चली आएगी।

कीटनाशक रहित फसल का अवलोकन करते प्रतिनिधि।
किसान आयोग के सचिव डा. आर. एस. दलाल ने कहा कि आज स्कूलों, कॉलेजों व विश्वविद्यालयों में केवल किताबी पढ़ाई रह गई है। यहां ज्ञान के नाम पर कुछ भी नया नहीं सीखने को नहीं मिलता है। उन्होंने अमीर खान की थ्री इडियट्स फिल्म के डायलोक को दोहराते हुए कहा कि कामयाबी के पीछे मत दौड़ो काबिल बनो कामयाबी तो झक मारती पीछे चली आएगी। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे खुद का ज्ञान पैदाकर काबिल बनें सफलता तो उनके पीछे-पीछे झक मारती चली आएगी। डा. दलाल ने कहा कि वे कीट ज्ञान को बढ़ाने व लोगों को कीटों की पहचान के लिए रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड व चोराहों पर कीटों के होॄडग लगवाने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों से सिफारिश करेंगे।

कीट ज्ञान में पी.एच.डी. वाले अधिकारियों को भी पछाड़ा

निडाना के किसानों ने जो मुहिम चलाई है वह काबिले तारीफ है। निडाना के किसानों ने देश के अन्य किसानों को रास्ता दिखाने का काम किया है। यहां के किसानों ने कीट ज्ञान में पी.एच.डी. करने वाले अधिकारियों को भी पीछे छोड़ दिया है। कीटों के बारे में जिनती जानकारी यहां के किसानों को है उतने कीटों की जानकारी तो उन्हें स्वयं भी नहीं है। यहां के किसान कीटों का बही खाता तैयार कर कीटों के पूरे आंकड़े तैयार कर कीटों पर एक प्रकार की पी.एच.डी. ही कर रहे हैं। 
डा. डी.पी. ङ्क्षसह, भूतपूर्व वाइसचांसलर 
जबलपुर यूनिवॢसटी 
अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित करते किसान। 






Monday, 8 October 2012

पति सहित तीन के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज

सफीदों : दहेज की माग पूरी न करने पर विवाहिता के साथ मारपीट कर घर से निकालने तथा सुसराल वापस लौटने पर जान से मारने की धमकी देने पर पुलिस ने पति सहित तीन लोगों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। मुआना निवासी रीना ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उसकी शादी 12 मार्च 2007 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित खेमचंदवेड़ा निवासी संजीव के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुरालजन दहेज लाने की डिमाड कर रही थे। डिमाड पूरी न होने पर ससुरालजनों ने मारपीट कर घर से निकाल दी थी और वापस सुसराल लौटने पर जान से मारने की धमकी दी। अदालत ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए पुलिस को मामला दर्ज करने के आदेश दिए थे।

Sunday, 7 October 2012

देश को जहर से मुक्ति दिलवाने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं महिलाएं


कीट ज्ञान पैदाकर किसानों को दिखाया है एक नया रास्ता 

पांच माह की फसल में एक छटाक भी नहीं किया कीटनाशक का प्रयोग

जींद। महात्मा गांधी ने सत्य,अंहिसा व चरखे को अपना हथियार बनाकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। उसी प्रकार ललीतखेड़ा व निडाना की महिलाएं भी बापू के रास्ते पर चलकर देश को जहर से मुक्ति दिलवाने के लिए लड़ाई लड़ रही हैं। इस लड़ाई में विजयश्री के लिए इन महिलाओं ने कीट ज्ञान को अपना हथियार बनाया है। महिलाओं ने कीट विज्ञान के सहारे अपना स्थानीय कीट ज्ञान पैदाकर किसानों को एक नया रास्ता दिखाकर बापू के विचारों और औजारों की सार्थकता को सिद्ध किया है। यह बात बराह कलां बारहा खाप के प्रधान कुलदीप ढांडा ने कीट कमांडो महिलाओं के कीट ज्ञान की प्रशांसा करते हुए कही। ढांडा बुधवार को ललीतखेड़ा गांव में आयोजित महिला किसान पाठशाला में बोल रहे थे। 
ढांडा ने महिलाओं की कीट ढुंढऩे की दक्षता व कौशल की महता को स्वीकार करते हुए कहा कि कीटों से महिलाओं का पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा वास्ता रहा है। इसके अलावा महिलाएं बारीक काम भी करती रहती हैं। इसलिए भी छोटे-छोटे कीट इनकी पकड़ में जल्दी ही आ जाते हैं। पाठशाला में महिला किसानों ने कीटों की गिनती, अवलोकन, सर्वेक्षण व निरीक्षण के बाद कीट बही खाता तैयार किया। मास्टर ट्रेनर अंग्रेजो ने बताया कि कीट अवलोकन के दौरान उन्होंने कपास की फसल में काला बाणिया नजर आया है, जो कपास के फावे के बीच कच्चे बीज के पास अपने अंड़े देता है। इसके निम्प व प्रौढ़ कच्चे बीज का रस चूसकर अपना जीवनचक्र चलाते हैं। वैसे तो दुनिया में इन कीटों को खाने वाले कम ही कीट देखे गए हैं, लेकिन यहां की महिलाओं ने काले बाणिये के बच्चे व अंड़ों का भक्षण करते हुए लेड़ी बिटल का गर्भ ढूंढ़ लिया है। इसके अलावा महिलाओं ने सुंदरो, मुंदरो नामक जारजटिया समूह के मासाहारी कीटों को भी ढूंढ़ा है। महिलाओं ने कपास की फसल में चेपे के आक्रमण की शुरूआत के साथ ही चेपे का भक्षण करने वाले ङ्क्षसगड़ू नामक लेड़ी बिटल के बच्चे भी देखे। 
कीट ज्ञान में हासिल की माहरत
ललीतखेड़ा व निडाना गांव की महिलाओं ने अपने कीट ज्ञान में वृद्धि करने के लिए लैंस, कापी व पैन को अपना औजार बनाया है। फसल में कीट सर्वेक्षण के दौरान महिलाएं लैंस की मार्फत फसल में मौजूद छोटे-छोटे कीटों की पहचान कर उनके क्रियाकलापों को अपनी नोट बुक में दर्ज कर अपने कीट ज्ञान में वृद्धि करती हैं। अपनी सुझबुझ व पैनी नजर से इन महिलाओं ने कीट ज्ञान में माहरत हासिल की है। 
उर्वकों का कम प्रयोग कर लेती हैं अच्छा उत्पादन
 फसल में कीटों का निरीक्षण करती महिलाएं।

 लाल बाणिये का शिकार करते हुए मटकू बुगड़ा। 

Saturday, 6 October 2012

सामूहिक दुष्कर्म से आहत किशोरी ने लगाई आग


पड़ोसी युवकों ने भाभी के सहयोग से दिया वारदात को अंजाम


नरवाना। गांव सच्चाखेड़ा में शनिवार दोपहर को वाल्मीकि समाज की किशोरी के साथ समाज के ही पड़ोसी दो युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। जिसमें मुチय आरोपी की भाभी ने भी सहयोग किया। घटना से शर्मसार किशोरी ने मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। जिसे सामान्य अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सकों ने किशोरी की ९५ प्रतिशत जली हालत देख पीजीआईएमएस रोहतक रव्फर कर दिया। घटना की सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक सौरभ सिंह ने मौके पर स्थिति का जायजा लिया। घटना के बाद हरकत में आई पुलिस ने छापेमारी कर मुチय आरोपी की भाभी तथा उसके सहयोगी को हिरासत में ले लिया। जबकि आरोपी युवकों की तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है। गांव सच्चाखेड़ा निवासी १५ वषर््ीय वाल्मीकि समाज से संबंधित किशोरी शनिवार दोपहर को गली से गुजर रही थी। उसी दौरान पड़ोसी वाल्मीकि समाज के प्रदीप ने किशोरी का हाथ पकड़ कर मकान में खींच लिया। प्रदीप की भाभी मीनू सारा घटनाक्रम देख रही थी। प्रदीप के मकान में मौजूद पड़ोसी संजीव ने किशोरी प्रदीप को कमरव् में बंद कर बाहर से कुंडी लगा दी। प्रदीप तथा किशोरी के अलावा कमरव् में दूसरा पड़ोसी नवीन भी मौजूद था। जहां पर प्रदीप तथा नवीन ने किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना से शर्मसार किशोरी अपने ताऊ के घर पहुंची और मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली। परिजनों द्वारा किशोरी को झुलसी अवस्था में सामान्य अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसकी हालत गंभीर देख पीजीआईएमएस रोहतक रव्फर कर दिया। पीजीआईएमएस रोहतक रव्फर करने से पूर्व किशोरी ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पड़ोसी प्रदीप, नवीन, संदीप तथा प्रदीप की भाभी मीनू पर सामूहिक दुष्कर्म करने तथा सहयोग करने का आरोप लगाया। घटना की सूचना पाकर पुलिस अधीक्षक सौरभ सिंह मौके पर पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया। बाद में पुलिस ने छापेमारी कर दुष्कर्म करने में सहयोग देने के आरोपी संजीव तथा मुチय आरोपी प्रदीप की भाभी मीनू को हिरासत में ले लिया। पुलिस अधीक्षक सौरभ सिंह ने बताया कि पुलिस ने दो लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। मुチय आरोपियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी की जा रही है। जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरतार कर लिया जाएगा।

Friday, 5 October 2012

अब कपास के साथ उगाएंगे सब्जियां


जींद : कीटनाशक मुक्त खेती के लिए प्रसिद्ध हो चुके निडाना गांव के साथ जल्द ही एक अन्य उपलब्धि भी जुड़ जाएगी। अब निडाना गांव के किसान कपास की फसल के साथ-साथ सब्जियों का उत्पादन भी एक साथ करेंगे। इसके लिए निडाना गांव के अधिकतर किसान भी मान गए हैं। यह प्रयास बागवानी विभाग द्वारा किया गया है। यदि विभाग का यह प्रयास सफल रहता है तो निडाना गांव के किसानों को लाभ होगा। निडाना गांव के किसान उस समय सुर्खियों में आए थे, जब किसानों ने एडीओ डॉ. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में गांव में कीटनाशक मुक्त खेती की शुरुआत की थी। यही नहीं किसानों ने अपने खेती करने के अनुभवों को सांझा करने के लिए ब्लॉग भी लिखना शुरू किया था। उनकी पहल पर अन्य गांव के लोग भी जुडे़ और आज जिले के कई गांवों के किसान कीटनाशक मुक्त खेती कर फसल उत्पादन कर रहे हैं। इसी को देखते हुए गत मंगलवार को बागवानी विभाग की टीम सब्जी उत्पादक किसानों को लेकर निडाना गांव पहुंची थी। यहां सब्जी उत्पादक किसानों ने देखा कि किस प्रकार से गांव के किसान कीटनाशक मुक्त खेती कर रहे हैं। इसी के चलते बागवानी विभाग की टीम ने भी निडाना गांव के किसानों को कपास के साथ सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया।बागवानी अधिकारियों ने बताया कि जब किसान कपास की फसल को कीटनाशक मुक्त बना सकते हैं तो वह कपास के साथ सब्जियों को भी उगा सकते हैं। बागवानी विभाग की टीम ने किसानों को कपास के साथ सब्जी उगाने के लिए अपील की, जिस पर निडाना गांव के अलावा जुलाना ब्लाक के कई गांव के किसान माने और आने वाले समय में कपास के साथ सब्जियां उत्पादन करने की हामी भरी। यदि किसान कपास की फसल को कीटनाशक मुक्त उत्पादन सकता है तो कपास के साथ सब्जियों का उत्पादन भी किया जा सकता है। निडाना व अन्य गांवों के किसान भी आगे से कपास के साथ सब्जियों को उगाएंगे व एक साथ दो फसलें उन्हें मिलेंगी, जिससे उन्हें काफी फायदा पहुंचेगा।डॉ. बलजीत मान, जिला बागवानी अधिकारी, जींद

Tuesday, 2 October 2012

बिना कीट ज्ञान के कीटनाशकों से छुटकारा संभव नहीं


खाप पंचायत की 15वीं बैठक में हुई किसान-कीट विवाद की सुनवाई के लिए

जींद।  गीता के चौथे अध्याय में श्री कृष्ण भगवान ने अर्जुन से कहा है कि हे पार्थ ज्ञान रूपी हवन सामग्री रूप यज्ञ से बेहतर होता है। इस ज्ञान रूपी गंगा में गोता मारने से सारे पाप कट जाते हैं। इसलिए कहीं भी तत्ववेता मिल जाए तो उसके पैरों में पड़कर भी हमें ज्ञान लेना चाहिए। यह बात किसान खेत पाठशाला के संचालक डा. सुरेंद्र दलाल ने निडाना गांव में किसान-कीट विवाद की सुनवाई के लिए आयोजित 15वीं खाप पंचायत की बैठक में आए किसानों को सम्बोधित करते हुए कही। डा. दलाल ने कहा कि  इसी प्रकार किसानों को भी अपना खुद का ज्ञान पैदा करने के लिए कीट ज्ञान का सहारा लेना चाहिए। बिना कीट ज्ञान के कीटनाशकों से छुटकारा पाना संभव नहीं है। बैठक की अध्यक्षता सर्व खाप पंचायत के संयोजक कुलदीप ढांडा ने की। इस अवसर पर बैठक में पाबड़ा (हिसार) से कुंडू खाप के प्रधान मुंशीराम कुंडू भी विशेष रूप से मौजूद थे। 
बैठक की शुरूआत के साथ ही किसानों ने फसल में कीट सर्वेक्षण कर कीट बही खाता तैयार किया। मास्टर ट्रेनर रणबीर मलिक ने कहा कि यहां के किसानों ने अभी तक कपास की फसल में 43 किस्म के शाकाहारी कीटों की पहचान कर उनके क्रियाकलापों के आधार पर रसचूसक, पुष्पाहारी, पर्णभक्षी व फलाहारी चार किस्मों में बांटा है। कपास की फसल में 20 किस्म के रस चूसक कीट होते हैं, जिसमें तीन किस्म के कीटों को मेजर, पांच प्रकार के कीटों को सूबेदार मेजर व बाकि के कीटों को आलगोल की केटैगरी में रखा है। मलिक ने बताया कि पंजाब में मिलीबग को मेजर, हरियाणा में सूबेदार मेजर व निडाना के किसान आलगोल मानते हैं। 
 कीटों का बही खाता तैयार करते किसान।
क्योंकि पंजाब के लोग कीटनाशकों का ज्यादा प्रयोग करते हैं। मलिक ने बताया कि जब कीटों पर कीटनाशक का हमला होता है तो कीट अपना जीवनचक्र कम कर अपनी बच्चे पैदा करने की ताकत बढ़ा लेते हैं। जिससे वह कम जीवनकाल में ही अधिक बच्चे पैदाकर अपनी वंशवृद्धि करते हैं। करसोला से आए किसान सुरेंद्र ने बताया कि जब से उसने होस संभाला है तभी से खेतीबाड़ी से जुड़ा हुआ है। लेकिन फसल में आने वाले कीटों की पहचान न होने के कारण वह सलेटी भूंड को सफेद मक्खी समझकर फसल पर अंधाधुंध कीटनाशकों का छिड़काव करता था, लेकिन पाठशाला में आने के बाद उसने कीटों की पहचान शुरू कर दी है। पाठशाला के संचालक डा. सुरेंद्र दलाल ने कहा कि शाकाहारी कीट फसल में जितना नुकसान करते हैं उससे ज्यादा नुकसान तो किसानों के साथ मंडी में घटतोली में हो जाता है। डा. दलाल ने बताया कि प्रयोगरत खेत में प्रत्येक फावे का वजन 6 ग्राम तक आ रहा है, जिससे फसल की बंपर पैदावार होने का अनुमान बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कीटनाशक के प्रयोग से नुकसान की केवल सात प्रतिशत ही भरपाई की जा सकती है। राजपुरा गांव के किसान बलवान सिंह ने बताया कि फसल में कीटनाशक के प्रयोग से पौधे की सुगंध छोडऩे की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे भ्रमित होकर एक साथ कई किस्म के कीट फसल में आ जाते हैं। पाठशाला के समापन पर खाप प्रतिनिधियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। 

बिना कीट खेती संभव नहीं 

खाप पंचायत के संयोजक कुलदीप ढांडा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया में एक सीजन में 25 लाख टन कीटनाशकों का प्रयोग होता है। कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से आज कैंसर जैसी लाईंलाज बीमारियां पनप रही हैं। ढांडा ने कहा कि अमेरिका के एक वैज्ञानिक के अनुसार कीटनाशक का केवल एक प्रतिशत भाग ही कीटों पर प्रयोग में आता है, बाकि 99 प्रतिशत बेकार जाता है। ढांडा ने कहा कि बिना कीटनाशक के खेती संभव है, लेकिन बिना कीटों के खेती संभव नहीं है। 




 कुंडू खाप के प्रधान को स्मृति चिह्न भेंट करते किसान।

 किसानों को कीटों की पहचान करवाते पाठशाला के मास्टर ट्रेनर।

Monday, 1 October 2012

अब शिक्षक रखेंगे छात्रों के टिफिन पर नजर


छात्रों में जंक फूड का प्रचलन बढ़ा

शहरी स्कूलों में बढ़ रही है समस्या
शिक्षा विभाग ने दिए स्कूल प्राचार्यों को दिशानिर्देश

कुलदीप सिंहजींद। भागमभाग जिंदगी में जिस तरह से फास्ट फूड का प्रचलन बढ़ा है, उससे अब बच्चे भी अछूते नहीं रहे हैं। छात्र अब टिफिन में रोटी लेने की बजाए चाऊमिन, बर्गर जैसे फास्ट फूड खाने को पसंद करने लगे हैं। शहरी क्षेत्रों में यह समस्या और बढ़ गई है। छात्र ज्यादातर स्कूलों में फास्ट फूड  को अपने साथ ले जा रहे हैं। जिससे उनका स्वास्थ्य तो गिर ही रहा है साथ ही कई बीमारियों के शिकार भी हो रहे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग ने स्कूल प्राचार्यों को निर्देश दिए हैं कि शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के साथसाथ लंच टाइम के दौरान बच्चों के टिफिन पर नजर रखें कि कहीं वो फास्ट फूड तो नहीं खा रहे हैं। इसके अलावा स्कूल परिसर में जंक फूड बेचने वाले, कैंटीन संचालक और रेहड़ी संचालकों कव् खिलाफ  भी कार्रवाई करने की बात कही गई है। यह निर्देश सरकारी स्कूलों कव् साथसाथ निजी स्कूलों पर भी लागू होंगे।

फास्ट फूड के नियमित सेवन का हमारव् शरीर पर विपरित प्रभाव पड़ता है। जंक फूड खाने कव् कारण शरीर को पूर्ण आहार नहीं मिल पता है। जिससे शरीर में विटामिनों की कमी हो जाती है। इससे मोटापा, कोलेस्ट्रॉल का स्तर, पोष्क तत्वों की कमी, हृदय रोग, मांसपेशियों में अवसाद और यौन रोग होने के कारणों में वृद्धि होती है। इसके अलावा बेचैनी रहने की समस्या आम होती है। जंक फूड का सबसे ज्यादा असर बाल्यावस्था पर ज्यादा पड़ता है। नियमित उपयोग से छात्रों का स्वास्थ्य लगातार गिरता है। जिससे स्कूली बच्चे कई गंभीर बीमारियों कव् शिकार हो रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने शिक्षा विभाग को पत्र लिख कर घर से टिफिन में जंक फूड लाने और स्कूल परिसर में जंक फूड बेचने पर पूर्ण पाबंदी लगाने की हिदायत दी गई है। शिक्षा विभाग ने भी मामले पर सチती बरतते हुए स्कूल प्राचार्यो को निर्देश दिए है कि लंच टाइम के दौरान शिक्षक छात्रों पर नजर रखेंगे कि वे जंक फूड तो नहीं खा रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षक छात्रों को जंक फूड से होनी वाली बीमारियों कव् बारे में बताएंगे। साथ ही उन्हें कैसे इन बीमारियों से बचा जाए इस संबंध में भी जागरूक करेंगे। वहीं स्कूल परिसर में जंक फूड बेचने वाले कैंटीन संचालक और रेहड़ी संचालकों कव् खिलाफ  सチत कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी।
राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्राचार्य रमेश मलिक ने बताया कि टिफिन में जंक फूड लाने की समस्या शहरों में ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्र में बच्चे बहुत कम जंक फूड खाते हैं और टिफिन में भी पारंपरिक खाना लाते हैं। फिर भी शिक्षा विभाग द्वारा जो दिशा निर्देश जारी किए गए हैं उनके अनुसार स्कूल में बच्चों के टिफिन पर नजर रखी जा रही है। जंक फूड खाने कव् कारण बच्चों में नेत्र, दंत रोग कव् अलावा मोटापा और दिल संबंधी रोग कव् लक्षण पाए जाते हैं।

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...