Friday, 22 June 2012

प्रोस्पेटस न मिलने पर छात्राएं बिफरी महाविनालय प्रशासन के खिलाफ की जमकर नारव्बाजी सप्लायर ने दाखिला फार्मों को भेजा कहीं ओर


 जींद। प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी महिला महाविनालय में प्रोस्पेटस नहीं मिलने पर शुक्रवार को छात्राओं ने जमकर बवाल काटा। छात्राओं ने कालेज प्रशासन के खिलाफ जमकर नारव्बाजी की। छात्राओं ने आरोप लगाया कि  वे सुबह से प्रास्पेटस लेने के लिए बैठे हुए हैं। लेकिन न तो उन्हें प्रोस्पेस दिए जा रहे हैं और न ही कालेज प्रशासन द्वारा कोई संतोष्जनक जवाब दिया जा रहा है। छात्राओं द्वारा नारव्बाजी करने की सूचना पाकर प्राचार्य डा. एसके आहूजा ने मौके पर पहुंच कर छात्राओं को शीघ्र प्रोस्पेटस बांटने का आश्र्वासन देकर शांत किया। शुक्रवार सुबह से ही छात्राएं व उनके अािभावक प्रोस्पेटस लेने के लिए प्रियदर्शनी इंदिरा गांधी महिला महाविनालय पहुंचना शुरू हो गए थे। लेकिन उन्हें फार्म न होने की बात कह कर टाल दिया और दस बजे का समय दिया। लेकिन दस बजे भी छात्राओं को प्रोस्पेटस वितरित नहीं किए गए। जिस पर छात्राएं बिफर गई और उन्होंने कालेज प्रशासन के खिलाफ नारव्बाजी करनी शुरू कर दी। छात्राओं ने बताया कि वे सुबह से प्रास्पेटस लेने के लिए आए हुए हैं, लेकिन उन्हें बारबार फार्म न आने की बात कही जा रही है। प्रोस्पेटस लेने के लिए उन्हें गर्मी में बाहर लाइन लगानी पड़ रही है। जिससे उन्हें परव्शानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं छात्राओं के साथ आए अभिााावकों ने बताया कि सुबह से लेकर दोपहर हो चुकी है और अब फार्म नहीं मिले हैं। वह दूरदूर के गांवों से आए हुए हैं, जिस कारण परेशानी हो रही है और वह वापस  ाी नहीं जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि वह गत दिवस ाी वे प्रोस्पेटस लेने आए थे, लेकिन फार्म नहीं मिले।
महाविनालय प्राचार्य डा. एसके आहुजा ने कहा कि फार्म छप चुके हैं, लेकिन गलती से वह सप्लायर ने ट्रक में दूसरी जगह ोज दिए हैं। फार्मोँ को सप्लायर ने वापस मंगवाया है और तीन बजे तक फार्म आ जाएंगे। जिसके तुरंत बाद फार्म वितरित कर दिए जाएंगे।

कविता ने बीच कबड्डी में जीता गोल्ड अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कविता का यह चौथा गोल्ड


जींद। भाई सुरव्ंद्र मलिक मैमोरियल खेल स्कूल निडानी की कबड्डी खिलाड़ी कविता सिवाच ने तीसरी एशियन बीच कबड्डी में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया है। होनहार कबड्डी खिलाड़ी कविता सिवाच का यह चौथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक है। स्कूल प्राचार्या राजवंती मलिक ने बतया कि एशियन बीच कबड्डी के २२ जून को हुए फाइनल मैच में भारत ने थाईलैंड को ३५ अंकों से मात दी। भारत की टीम ने ५० अंक प्राप्त किए जबकि थाईलैंड की टीम १५ अंक ही प्राप्त कर सकी। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कविता वर्ल्ड कबड्डी, एशियन जूनियर कबड्डी तथा दूसरी एशियन बीच कबड्डी चैंपियनशिप में गोल्ड हासिल कर चुकी है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण पदक विजेता कविता चार जुलाई सुबह दिल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरव्गी। जहां से उसे धूमधाम के साथ पैतृक गांव पडाना व खेल स्कूल निडानी लाया जाएगा।

धान की सीधी बिजाई का आधा लक्ष्य पूरा कृष्ि अधिकारी गांवगांव बता रहे धान सीधी बिजाई के फायदे किसानों को प्रोत्साहन के लिए दे रहे हैं कीटनाशक दवाइयां २५० एकड़ से भी ज्यादा क्षेत्र में होगी धान की सीधी बिजाई



कुलदीप सिंह
जींद। कृष्ि विभाग धान की सीधी बिजाई कराने में जोरशोर से जुटा हुआ है। अब तक विभाग ने १२५ एकड़ में धान के सीधी बिजाई के लक्ष्य को पूरा कर लिया है और आगामी कुछ  दिनों में टारगेट पूरा होने की उमीद जताई जा रही है। किसानों को प्रोत्साहित करने कव् लिए विभाग बीज, खाद व कीटनाशक दवाइयां भी दी जा रही हैं। कृष्ि विभाग अधिकारियों के अनुसार जिले में तय टारगेट से ज्यादा धान की सीधी बिजाई की जाएगी।
भूजल को बचाने कव् लिए कृष्ि विभाग धान की सीधी बिजाई कराने पर जोर दे रहा है।
कृष्ि विभाग ने जिले में ख्भ्० एकड़ में धान की सीधी बिजाई करने का लक्ष्य रखा हुआ है और अब तक करीब क्ख्भ् एकड़ में सीधी बिजाई करवाई जा चुकी है। कृष्ि अधिकारियों के अनुसार धान कि सीधी बिजाई करने से पानी की तो बचत होती ही है साथ में किसानों को मेहनत भी कम करनी पड़ती है। विभाग कव् अधिकारी गांवगांव जाकर धान की सीधी बिजाई करने से होने वाले फायदों की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं। इसलिए विभाग धान की सीधी बिजाई करने वाले किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। इसकव् लिए एसडीओए सहायक पौधा सरंक्षण अधिकारीए एसएमएस को टीम में शामिल किया गया है। इसकव् अलावा खंड कृष्ि अधिकारियों की भी डयूूटी लगाई हुई है। किसानों को धान की सीधी बिजाई के प्रति जागरूक करने के लि बीज, खाद व दवाइयां मुत में दे रहा है। कृष्ि विभाग द्वारा अबकी बार बासमती  धान की सीधी बिजाई कराई जाएगी। योंकि बासमती गरुप की धान में कम पानी की जरूरत होती है। ऐसे में विभाग धान की सीधी बिजाई करवा कर भूजल का बचा सकव्।

या है धान की सीधी बिजाई
बिना पौधा रोपण किए खेत में बीज द्वारा फसल की बिजाई करना धान की सीधी बिजाई कहलाती है। सीधी बिजाई की दो विधियां है। पहली विधि में खेत को तैयार करके सिंचाई की जाती है और बार आने पर बिजाई सीड फर्टीलाईजर मशीन से धान के बीज की बिजाई की जाती है। दूसरी विधि में सूखे खेत को तैयार करके ड्रील मशीन द्वारा धान के बीज की सीधी बीजाई कर दी जाती है। बिजाई के तुरंत बाद सिंचाई की जाती है और बीज के अंकुरित होने तक खेत को गीला रखना जरूरी है।
किसानों को होगा फायादा
कृष्ि विभाग के उप निदेशक डा. रामप्रताप सिहाग ने कहा कि धान की सीधी बिजाई करने से पानी की बचत तो होती है और लेबर का भी खर्च कम होता है। जिससे फसल का लागत मूल्य भी कम होता है। सीधी बिजाई से जमीन की उर्वरा शक्ति भी पूरी तरह बनी रहती है और फसल की अच्छी पैदावार होती है।


Thursday, 21 June 2012

अल्पसंख्यक बच्चों के लिए लगेंगे बाल मेले


सर्व शिक्षा अभियान प्रदेश भर के सभी ब्लॉक में अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बाल मेलों का आयोजन करेगा। मेले में लगाए गए स्टालों पर बच्चों को सामाजिक बुराई से लड़ने की सीख दी जाएगी। मेले में एड्स, पर्यावरण, भ्रूणहत्या, प्रदूषण और बाल विवाह जैसे सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता के लिए अलग-अलग स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके अलावा मेले के लिए जजों का पैनल छात्रों की गतिविधियों पर भी नजर रखेगा। मेले की सचित्र रिपोर्ट सर्व शिक्षा अभियान निदेशालय को ई-मेल के जरिये भेजी जाएगी।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय परियोजना अनुमोदन मंडल नई दिल्ली की तरफ से अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बाल मेला आयोजित करने का खाका तैयार किया गया है। प्रदेश के 119 ब्लॉकों में बाल मेलों का आयोजन किया जाएगा। मेले के आयोजन के लिए प्रत्येक ब्लॉक को 20-20 हजार रुपये भी आवंटित किए जाएंगे। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला परियोजना संयोजकों को पत्र क्रमाक सीएएल/एसएसए-8066-8184 जारी कर जुलाई माह में बाल मेला लगाने की हिदायत दी है। मेले में एसएमसी सदस्य सहित अल्पसंख्यक कैटेगरी के पहली से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थी शिरकत कर सकेंगे। मेले के दौरान वाद विवाद प्रतियोगिता, भाषण, पेंटिग, एकल व सामूहिक नृत्य, एकल व सामूहिक गायन सहित अन्य सामूहिक क्रियाकलापों में भाग लेंगे। मेले में छात्रों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए खंड संसाधन समन्वयक के अतिरिक्त डीईओ व डीईईओ का एक एक प्रतिनिधि, दो सहायक खंड संसाधन समन्वयक, दो प्रधानाचार्य व खंड के दो प्राध्यापक कमेटी में शामिल होंगे।
बाल मेले में अल्पसंख्यक कैटेगरी के छात्रों को सामाजिक बुराइयों के बारे में जागरूक किया जाएगा। मेले में फिल्मी संगीत तथा धूम्रपान पर पूर्णतया: प्रतिबंध रहेगा। बाल मेले की गतिविधियों की सफलता पूर्वक संचालन के लिए जजों का पैनल
गठित किया जाएगा।
बच्चों को मिलेगा मिड डे मील
बाल मेले में आने वाले बच्चों के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत खाने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके तहत बच्चों को दोपहर का भोजन मिड डे मील के तहत प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा बच्चों व आने वाले अभिभावकों के लिए पानी की व्यवस्था भी रहेगी।
सभी ब्लॉक में अल्पसंख्यक बच्चों के लिए बाल मेलों का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बच्चों को जागरूक करने के लिए कई प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।
भीमसैन भारद्वाज, जिला परियोजना संयोजक

पीडीएम ग्रुप आफ इंस्टीट्यूट करसिंधु के मेकेनिकल इंजीनियरिंग अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने ऐसा वाहन इजाद किया है जो कम्प्रेसड हवा से चलता है। इस वाहन में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी जैसे महंगे ईधनों का प्रयोग नहीं होता है।
संस्था के निदेशक प्रीतपाल सिंह एडवोकेट ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में 100 सीसी, फोर स्ट्रोक इंजन का प्रयोग किया गया है। ईधन की टंकी में लगभग 14 पौंड हवा भरी जाती है। इस वाहन की यह विशेषता है कि आज के युग में जहां परंपरागत ईधन जैसे पेट्रोल, डीजल, सीएनजी के रेट आकाश की नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं और इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है। वहां इस वाहन का रंनिग खर्च नहीं के बराबर है। इसमें चार गियर्स का प्रयोग किया जाता है। इससे इसकी स्पीड कम या ज्यादा कर सकते हैं। लगभग 21 हजार रुपये की लागत से बना यह वाहन मेकेनिकल ब्रेक एवं स्पीड रेगुलेटर से कंट्रोल किया जाता है। इस वाहन की रफ्तार 30 किलोग्राम प्रति घंटा है, जिसे आगे चलकर बढ़ाया भी जा सकेगा। पीडीएम करसिंधु सदैव इस प्रकार के प्रोजेक्ट विद्यार्थियों की दक्षता को निखारने के लिए पोलीटेक्निकस्टाफ के सहयोग से बनाता आया है। इस प्रोजेक्ट से न केवल पर्यावरण में बढ़ रहे प्रदूषण पर अंकुश लगाया जा सकेगा, बल्कि आम आदमी के जेब पर बढ़ते हुए वित्तीय भार को भी कम किया जा सकेगा।

बीबीपुर गांव में बनेगी महिला चौपाल


कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पूरे देश में महिला ग्राम सभा आयोजित करने में विशेष पहचान बना चुके जींद जिला के बीबीपुर गाव में महिला सशक्तिकरण के लिए महिला चौपाल बनाई जाएगी। इस चौपाल परिसर में एक लाइब्रेरी तथा इनडोर खेलों की व्यवस्था भी की जाएगी ताकि महिलाएं लाइब्रेरी में दैनिक समाचार पत्रों से राज्य व देशभर की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त कर सकें और इनडोर खेलों में खेल प्रतिभाओ को उभरने का अवसर दिया जा सके।
यह जानकारी जिला उपायुक्त डॉ. युद्धवीर ख्यालिया ने बृहस्पतिवार को डीआरडीए सभागार में बीबीपुर गांव से आई महिलाओ की किसान सभा को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने यह सुविधाएं यथाशीघ्र उपलब्ध करवाने की बात कही। इस अवसर पर उपायुक्त ने महिलाओ को बधाई दी और कहा कि गाव की जिम्मेदारी महिलाओं ने अपने स्तर पर कमेटी बनाकर कन्या भ्रूण हत्या पर रोक, महिलाओं पर किसी भी प्रकार के अत्याचारों पर रोक, व समाज में फैली अन्य बुराईयों पर अंकुश लगाने के लिए एक जुट होकर पूरे जिला में ही नहीं बल्कि राज्य भर में एक अनूठा उदाहरण पेश किया गया है।

डॉ. ख्यालिया ने विश्वास दिलाया कि उनके द्वारा किए जाने वाले इन सभी सार्थक प्रयासों में जिला प्रशासन द्वारा भरपूर एक उपेक्षित सहयोग किया जाएगा। इस अवसर पर महिला समिति की पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ अपने विचार साझा किए। गाव में आडे़ आने वाली बुराईयों बारे अवगत कराते हुए शराब बंदी की बात भी कही। इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त अरविंद महलान, सिविल सर्जन, प्रोटेक्शन अधिकारी कृष्णा, उप-कृषि निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग, गाव के सरपंच सुनील कुमार भी मौजूद थे।

Wednesday, 20 June 2012

ललितखेड़ा गांव में भी शुरू हुई महिला खेत पाठशाला


निडाना गांव की तर्ज पर ही अब ललितखेड़ा गांव में भी महिला खेत पाठशाला का शुभारंभ किया गया। बुधवार को महिला खेत पाठशाला का शुभारंभ उप कृषि निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने किया। इसमें डॉ. सरोज जयपाल निदेशक क्षेत्रीय गन्ना अनुसंधान केंद्र उचानी (करनाल) ने मुख्य रूप से शिरकत की। इसमें निडाना, ईगराह, ललितखेड़ा और अन्य गांवों की महिलाएं भाग लेंगी।
इस खेत पाठशाला पर कृषि विभाग की तरफ से 29 हजार रुपये की राशि खर्च की जाएगी। इसका आयोजन कृषि विकास अधिकारी निडाना डॉ. सुरेंद्र दलाल, खंड कृषि अधिकारी डॉ. जयप्रकाश द्वारा किया जा रहा है। इसमें निडाना गांव की महिलाएं बतौर प्रशिक्षक के रूप में भाग लेंगी। डॉ. सरोज जयपाल ने फसलों पर किए जा रहे अंधाधुंध स्प्रे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला और महिला किसानों को जागरूक किया।
कृषि उप निदेशक डॉ. रामप्रताप सिहाग ने महिला किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी इच्छा के अनुसार महिला किसान जिस भी अनुसंधान केंद्र का भ्रमण करना चाहे, कृषि विभाग उसी राज्य या जिले में महिलाओं को अनावरण यात्रा पर भेजने का खर्च वहन करेगा। निडाना की महिला किसानों ने बताया कि उन्होंने पिछले साल के लगभग 100 किस्म के मांसाहारी और शाकाहारी कीटों की पहचान की। गांव की महिलाओं ने डॉ. सरोज जयपाल को हरियाणवीं परंपरागत पोशाक दामण, कुर्ती व चुंदड़ी देकर सम्मानित किया। डॉ. सरोज ने वादा किया कि जब भी वह यहां आएंगी, तब इसी पोशाक में आएंगी।

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...