Wednesday, 5 December 2012

निरक्षरता मिटाने पर किया विचार मंथन


जींद : 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017) में प्रदेश में 15 साल से 80 साल तक के व्यक्ति को निरक्षर नहीं रहने दिया जाएगा। इसके लिए साक्षर भारत मिशन के तहत कार्य योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया है। साक्षर भारत मिशन की गतिविधियों को गति प्रदान करने के लिए मंगलवार को जींद में साक्षर भारत मिशन से जुडे़ राज्य स्तर के अधिकारियों की बैठक हुई।
इस बैठक में राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक परियोजना प्रबंधक नंदकिशोर वर्मा व दिनेश शर्मा के साथ-साथ हिसार और कैथल जिला के जिला समन्वयक, भिवानी और करनाल जिला के मिशन जुडे़ कार्यालय सहायक, जींद जिला के 4 प्रेरक और मिशन से जुडे़ 2 रिसोर्स पर्सन ने भाग लिया। इस एक दिवसीय कार्यक्रम में साक्षर भारत मिशन की जिला चेयरपर्सन एवं जिला परिषद की चेयरपर्सन वीना देशवाल, जिला अतिरिक्त उपायुक्त अरविंद मलहान ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला उपायुक्त डॉ. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने की। जींद जिला को साक्षर भारत मिशन के तहत एक मॉडल जिला के रूप में लिया जा रहा है।
भारत साक्षर मिशन से जुडे़ अधिकारियों एवं प्रेरकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त डॉ. युद्धबीर सिंह ख्यालिया ने कहा कि इस मिशन से जुडे़ प्रेरकों को इस कार्य को जुनून के रूप में लेकर चलना होगा। यहा तक की जब वे आपस में बातचीत करे तो उसकी शुरूआत भी जय साक्षरता नारे से की जानी चाहिए। अपने कार्य के प्रति जुनूनी होकर ही उसमें सफलता हासिल की जा सकती है। इसे जन अभियान बनाने के लिए ठेठ हरियाणवी गीतों एवं कार्यक्रमों को और जोड़ा जा सकता है। लोगों के मन में साक्षरता के प्रति लगाव बनाना होगा।
उन्होने इस कार्यक्रम से जुडे़ लोगों का आह्वान किया कि वे प्रथम चरण में कार्यक्रम के प्रति जागरूकता पैदा करे और आम आदमी को इसके साथ जोडे़। इसके लिए साक्षर सिपाही कोई कोर कसर न रखे। इस मुहिम को गति प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।
इस मौके पर राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण के सहायक परियोजना प्रबंधक दिनेश शर्मा व नंद किशोर शर्मा ने कहा कि अभियान के तहत प्रचार-प्रसार को प्रभावी बनाने के लिए प्रचार साहित्य को सही प्रदर्शन किया जाना चाहिए। जिला स्तर पर इस मिशन को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए स्वयं सेवक शिक्षक गावों में जाकर माहौल तैयार करे। कार्यक्रम से जुडे़ लोगों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
दिसंबर माह के अंत तक साक्षर भारत मिशन के तहत गावों में कक्षाएं शुरू की जानी चाहिए। निरक्षरों को साक्षर करने के कार्य में प्रयुक्त होने वाली पर्याप्त सामग्री उपलब्ध करवाई जा रही है। इस कार्य में जुटे कर्मियों को सिखलाई किट भी प्रदान की जाएंगी। लोगों में इस बात का संदेश दिया जाएगा कि निरक्षरता एक अभिशाप है। साक्षरता से प्रगति के द्वार खुल जाते है।

Tuesday, 4 December 2012

अब कंप्यूटराइज्ड मिलेगी एमएलआर


जींद : डॉक्टरों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए अब जिले के सरकारी अस्पतालों में एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) कंप्यूटराइज्ड मिलेगी। इसका काम शुरू कर दिया गया है और जल्द ही यह कार्य पूरी तरह से पटरी पर आ जाएगा। इसके लिए सभी तैयारी पूरी कर ली गई है।
कुछ समय पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग को एमएलआर (मेडिकल लीगल रिपोर्ट) कंप्यूटराइज्ड करने के आदेश दिए थे। अब तक डॉक्टर मरीजों व पुलिस को एमएलआर कंप्यूटराइज देने की बजाय उन्हें हस्तलिखित एमएलआर उपलब्ध करवा रहे थे। सरकारी डॉक्टर एमएलआर पर मरीज की चोट इत्यादि लिखकर काटा करते थे।
साल भर पहले हाईकोर्ट के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में कंप्यूटराइज्ड एमएलआर और पोस्टमार्टम प्रफोर्मा उपलब्ध करवाने संबंधी पत्र जारी कर दिया, लेकिन यह काम अब तक शुरू ही नहीं हो सका था।
लेकिन अब जाकर यह काम शुरू होने की उम्मीद है और लोगों को कंप्यूटराइज्ड एमएलआर रिपोर्ट जल्द ही मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए कंप्यूटर, प्रिंटर अस्पताल प्रशासन को उपलब्ध कराया गया है। कंप्यूटर में साफ्टवेयर डालकर कंप्यूटराइज्ड एमएलआर लोगों को प्रदान की जाएगीर।
साफ्टवेयर में होगा प्रोफार्मा
इस सॉफ्टवेयर में एमएलआर और पोस्टमार्टम प्रोफार्मा बना हुआ है। सॉफ्टवेयर की खासियत ये है कि इसमें एक बार मरीज व मृतक संबंधी चोट अंकित कर देने के बाद एमएलआर व पोस्टमार्टम रिपोर्ट से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती है। ऐसे में फिर कोई बेगुनाह फर्जीवाड़े की भेंट न चढ़े इसके लिए अस्पतालों में कंप्यूटराइज्ड एमएलआर शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
सरकारी अस्पतालों में कंप्यूटराइज्ड एमएलआर देने का काम शुरू किया जा रहा है। जोकि शुरू कर दिया गया है और बाकी काम एक-दो दिन में सही तरीके से शुरू हो जाएगा। उसके बाद किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी।
डॉ. धन कुमार, एमएस, सिविल अस्पताल, जींद

Sunday, 2 December 2012

आइटीआइ अनुबंध अनुदेशकों ने शहर में मौन प्रदर्शन निकाला


जींद : आइटीआइ अनुबंध अनुदेशकों ने शनिवार को आइटीआइ में फैली अव्यवस्थाओं, राज्य प्रधान मनोज जागड़ा की बर्खास्तगी को वापस लेने तथा प्राचार्य को गिरफ्तार करने की माग को लेकर शहर में मौन प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान अनुबंध अनुदेशकों ने अपने मुंह पर सफेद पट्टिया बाध कर विरोध जताया। अनुबंध अनुदेशकों ने चेतावनी दी कि जब तक राज्य प्रधान मनोज जागड़ा की बर्खास्तगी को वापस नहीं लिया जाता तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके बाद अनुबंध अनुदेशकों ने लघु सचिवालय पहुंचकर मांगों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा।
कैथल रोड स्थित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में अनुबंध अनुदेशकों को संबोधित करते हुए राज्य प्रधान मनोज जागड़ा ने कहा कि प्रधानाचार्य प्रशासन से मिलीभगत करके आंदोलन को रोकने के लिए तथा शोषण व भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज दबाने के मकसद से चार अनुदेशकों के खिलाफ बौखलाहट में मामला दर्ज करवा दिया जबकि उन्होंने स्वयं एक अनुबंध अनुदेशक को जातिसूचक गालिया दी और जान से मारने की धमकी देते हुए अभद्र व्यवहार किया।
विभाग के अधिकारियों और सरकार द्वारा युवा अनुबंधित अनुदेशकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है तथा लगातार शोषण व अत्याचार किया जा रहा है। अनुबंध आधार पर लगे अनुदेशक पिछले चार वर्ष से पूरी मेहनत व लगन से कार्य कर रहे है, लेकिन उनकी इस मेहनत का सरकार उन्हे कोई सिला नहीं दे रही है। न तो अनुबंध अनुदेशकों को नियमित किया जा रहा है और न ही नियमित अनुदेशकों की तरह भत्ते दिए जा रहे है। सरकार तथा उच्च अधिकारियो ने तानाशाही रवैया अपनाते हुए उन्हे बर्खास्त कर दिया गया जबकि वह अनुबंध अनुदेशकों की मागों को उठा रहे थे।
जब तक राज्य प्रधान मनोज जागड़ा को बहाल नहीं किया जाता तथा भ्रष्टाचारी प्रधानाचार्य अनिल गोयल को निलंबित कर के विजिलेंस द्वारा उन द्वारा की गई अनियमितताओं की जाच नहीं की जाती उनका संघर्ष जारी रहेगा। बाद में अनुबंध अनुदेशक सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और मागों से संबंधित ज्ञापन उपायुक्त को सौंपा।
संघ ने राहुल गांधी का आभार जताया
राज्य प्रधान मनोज जागड़ा ने बताया कि गत 26 नवंबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गाधी से जो उनकी मुलाकात हुई थी, उसका सकारात्मक असर अब दिखाई देने लगा है। विभाग ने अनुदेशकों की नियमित भर्ती पर रोक लगा दी है। इसके लिए संघ ने राहुल गाधी का आभार जताया।

..यह सफर नहीं आसान


कंडम सामान के सहारे दौड़ रही हैं रोडवेज की बसें


जींद। आरामदेह एवं सुखद यात्रा का दम भरने वाले हरियाणा रोडवेज विभाग की बसें कंडम स्पेयर पार्ट्स के सहारे चल रही हैं। कंडम बसों के लिए नया स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण वर्कशॉप में कल-पूर्जों का भारी टोटा बना हुआ है। स्पेयर पार्ट्स की कमी के चलते नई बसों में तकनीकि खराबी आने पर कंडम बसों के स्पेयर पार्ट का सहारा लिया जा रहा है। रोडवेज विभाग की इस लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ सकता है। रोडवेज की कार्यशाला में समय पर स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध न होने के कारण बसें कई-कई दिनों तक कार्यशाला में ही खड़ी रहती हैं। इससे रोडवेज को लाखों रुपए के राजस्व का चूना लग रहा है। 

ज्यादातर किस सामान का होता है प्रयोग

कार्यशाला में समय पर नया स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण मैकेनिकों को मजबूरन कंडम स्पेयर पार्ट्स का सहारा लेना पड़ रहा है। सूत्रों के अनुसार कंडम बसों से बैरंग, गियर बक्सा, इंजन का सामान, हैड, डिफैंसर, धूर्रा, कमानी, डैनमो, एस्टीलेटर, लाइट, स्टेयरिंग, टायर, रिम, बॉडी पार्ट और जो प्रयोग के लायक हो उस बस की बैटरी भी बदल कर प्रयोग में ले ली जाती है। 

2 माह से वर्कशॉप में ही खड़ी है बस

मामले की पूरी सच्चाई जानने के लिए जब टीम ने वर्कशॉप का मुआयना किया तो वर्कशॉप में काम कर रहे कर्मचारियों ने डिपो की बस एच.आर. 37 सी 1953 में लगभग 2 माह पहले रोहतक बस स्टैंड के बाहर वायरिंग शॉट के कारण आग लग गई थी। इसके बाद बस को यहां वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए लाया गया था लेकिन वर्कशॉप में सामान की कमी के कारण यह बस पिछले 2 माह से इसी तरह खड़ी है। 

 सामान के अभाव में पिछले 2 माह से वर्कशॉप में खड़ी बस। 


पुराने सामान का लिया जाता है सहारा : नेहरा 

प्रधान अजीत नेहरा। 
रोडवेज कर्मचारी यूनियन के डिपो प्रधान अजीत नेहरा ने कहा कि कार्यशाला में समय पर नया स्पेयर पार्ट्स  पलब्ध नहीं होने के कारण मजबूरीवश कंडम बसों से स्पेयर पार्ट्स निकाल कर प्रयोग में लाया जाता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण रोडवेज को लाखों रुपए का चूना लग रहा है। स्टोर में स्पेयर पार्ट्स पलब्ध नहीं होने के कारण बस कई-कई दिनों तक कार्यशाला में खड़ी रहती है। नेहरा ने आरोप लगाते हुए कहा कि विभाग के अधिकारी अपनी जेब भरने के चक्कर में आवश्यकता के अनुसार सामान नहीं खरीदते हैं। पुराने सामान का प्रयोग कर कागजों में नया दिखाकर विभाग को चूना लगा रहे हैं। 
 वर्कशॉप में खड़ी कंडम बसें जिनका स्पेयर पार्ट्स निकाला गया है।

स्पेयर पार्ट्स की नहीं है कमी : डब्ल्यू.एम.

इस बारे में जब वर्कशॉप मैनेजर (डब्ल्यू.एम.) से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि वर्कशॉप के स्टोर में किसी भी स्पेयर पार्ट्स की कमी नहीं है। किसी भी बस को स्पेयर पार्ट्स की कमी के कारण वर्कशॉप में खड़ा नहीं रहने दिया जाता। अगर स्टोर में कोई स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध नहीं हो पाता तो समय रहते मुख्यालय पर उसके लिए प्रपोजल भेज कर जल्द से जल्द उसको मंगवा लिया जाता है। यूनियन के पदाधिकारी जानबुझकर रोडवेज के अधिकारियों को बदनाम करने की साजिश रचते रहे हैं। 

अधिकारियों को बदनाम करने की रच रहे हैं साजिश

इंटक यूनियन के डिपो सचिव वीरेंद्र कुमार ने कहा कि वर्कशॉप में किसी भी सामान की कमी नहीं है। रोडवेज यूनियन का डिपो प्रधान व उसके कुछ साथ जान बुझकर अधिकारियों को बदनाम करने की साजिश रचते रहते हैं। यूनियन के पदाधिकारी अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए कर्मचारियों को गुमराह करते रहते हैं। 
 डिपो सचिव वीरेंद्र कुमार

फाइलों में ही दम तोड़ गई जिला प्रशासन की गौ रक्षक योजना


डी.सी. के आदेशों के 10 माह बाद भी नप ने योजना पर नहीं किया अमल


जींद। जिले में गऊ कल्याण योजना फाइलों में ही सिमटकर रह गई। उपायुक्त के आदेशों के लगभग 10 माह बाद भी योजना पर अमल नहीं हुआ है। शहर में आवारा घूम रही पूजनीय गऊ माता की दुर्गति हो रही है। प्रशासन की तरफ से जिले में आवारा घूम रही गायों के लिए योजना बनाकर नगर परिषद को इसका जिम्मा सौंपा गया था। लेकिन नगर परिषद तक यह योजना पहुंचते ही फैल हो गई और नप की तरफ से इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया। नगर परिषद की इस लापरवाही का फायदा गौ तस्कर उठा रहे हैं और रात्रि के समय बेजुबान इन गायों को वाहनों में भरकर गौकसी के लिए लेकर जा रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की इस लापरवाही से गौभक्तों में लगातार विरोध हो रहा है। हालांकि शहर में आवारा गायों की तदाद बढऩे से सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में सड़क दुर्घटनाएं के एक मुख्य कारण को जनाने के बावजूद भी प्रशासन केवल गऊ माता के कल्याण की योजनाएं बनाने तक ही सीमित रह गया है और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हालांकि आवारा घूम रही इन गायों में सबसे ज्यादा दुधारू गायें हैं। जिनके मालिक सुबह व शाम के वक्त इन गायों का दूध निकालकर बाहर घूमने के लिए छोड़ देते हैं। बाद में गाय शहर में फल फ्रूट व सब्जी का कार्य करने वालों के लिए परेशानी बढ़ा देती हैं।

10 माह बाद भी उपायुक्त के आदेशों पर नहीं हुआ अमल

 शहर की सड़कों पर आवारा घूम रही गायें।
जिले में गऊ माता के बढ़ रहे अनादर को देखते हुए फरवरी 2011 को उपायुक्त डा. युद्धबीर ख्यालिया ने जिले के गऊशालाओं प्रबंधकों व नगर परिषद के अधिकारियों की बैठक लेकर इन आवार गायों को पकड़कर गऊशाला में छोडऩे के आदेश दिए थे। आदेशों में कहा गया था कि आवारा घूमने वाले पशुओं को गऊशालाओं में छुडवाएं। पकड़ी हुई गायों को जो भी मालिक छुड़वानें के लिए आएगा उसे 3 हजार रुपए की राशि जुर्माने अथवा खर्च के रूप में अदा करनी होगी और यदि गाय का मालिक बार-बार गायों को आवारा छोड़ता है तो उसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा। इसमें भिवानी रोड पर स्थित श्री गऊशाला ने आवारा गायों को अपनी गऊशाला में रखने का जिम्मा दिया गया था लेकिन लगभग 10 माह बीत जाने के बावजूद भी उपायुक्त के आदेशों की आज तक पालना नहीं हुई है। 

गौ संरक्षण के लिए प्रशासन को उठाने चाहिएं ठोस कदम

बजरंग दल गऊ रक्षा संघ के जिला प्रमुख नरेन्द्र शर्मा ने कहा कि सर्दी के साथ ही जिले में गऊओं की तस्करी के मामले बढऩे लगे हैं। तस्करी पर लगाम लगाने के लिए 4 दिसम्बर को हिसार में संगठन की बैठक होगी। बैठक में गौ तस्करी को रोकने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने बताया कि संगठन द्वारा धुंध का मौसम शुरू होते ही जगह-जगह पर नाके लगाकर वाहनों की जांच की जाती है और तस्करी के लिए जा रही गायों से भरे हुए वाहनों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया जाता है। लेकिन पुलिस प्रशासन की तरफ से उन्हें सहयोग नहीं मिलता है। गायों की तस्करी के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है। अगर इसी प्रकार चलता रहा तो 15 से 20 वर्षों में गाय का नामो-निशान ही मिट जाएगा। इसलिए प्रशासन की तरफ से गायों की संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

अधिकारियों की लापरवाही के कारण जंग की भेंट चढ़ रहे हैं लाखों के कृषि यंत्र


विभाग के पास नहीं  है कृषि यंत्रों के उचित रख-रखाव की व्यवस्था


जींद। यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते कृषि कार्यों को बढ़ावा देने वाली लाखों रुपए की मशीनें जंग की भेंट चढ़ रही हैं लेकिन विभाग के अधिकारियों के पास इनकी देखरेख के लिए फुरस्त नहीं है। इस प्रकार विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के कारण कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की जाने वाली योजनाएं बीच रास्ते में ही दम तोड़ रही हैं। सरकारी उपकरणों के प्रति विभागीय अधिकारियों की इस बेरूखी का खामियाजा किसानों के साथ-साथ विभाग को भी भुगतना पड़ रहा है। किसानों को जहां सही समय पर विभाग की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिलता है तो मशीनें खराब होने के कारण विभाग को भी लाखों रुपए का नुक्सान उठाना पड़ता है। अधिकारियों द्वारा मशीनों के उचित रख-रखाव की व्यवस्था नहीं करने के कारण लाखों रुपए की मशीनें खुले आसमान के नीचे ही जंग की भेंट चढ़ रही हैं और अधिकारी इन मशीनों को ठीक करवाने की बजाए मुक दर्शक बने हुए हैं। अधिकारी मशीनों के रख-रखाव के लिए विभाग के पास पैसे की कमी का रोना रो रहे हैं।

क्या है विभाग की योजना

कृषि विभाग ने कृषि कार्यों में पानी की बचत कर किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ कृषि कार्यों को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2009 में प्रमोशन एंड स्ट्रैथिंग ऑफ एग्रीकल्चर मैकाइनजैशन स्कीम शुरू की थी। इस स्कीम के तहत किसानों को कृषि कार्यों में पानी की बचत के लिए लेजर टैक्नोलाजी से चलने वाली लेजर लैंड लेवलर मशीन के साथ जमीन को समतल करने के लिए प्रेरित किया जाना था। इससे उबड़-खाबड़ जमीन को भी आसानी से समतल कर कृषि योज्य बनाया जा सकता है। इससे किसान को समय के साथ-साथ लगभग 40 प्रतिशत पानी की बचत भी होती है। 

किसानों को ढीली करनी पड़ रही है जेब  

कृषि यांत्रिकी विभाग कार्यालय के बाहर पड़ी मशीनें। 

विभाग द्वारा अधिक से अधिक किसानों तक इस योजना को पहुंचाने के लिए किसानों को 10 घंटे के लिए 1 हजार रुपए पर मशीन उपलब्ध करवाई जाती है। इसके अलावा विभाग द्वारा किसान से 3 रुपए प्रति किलोमीटर व ट्रैक्टर का डीजल भी लिया जाता है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो एक एकड़ पर किसान को लगभग 350 रुपए प्रति घंटे का खर्च आता है, जबकि प्राइवेट ट्रैक्टर चालक किसान से 600 से 700 रुपए प्रति घंटा वसूल रहे हैं। विभाग द्वारा टारगेट कम करने व मशीनें खराब होने के कारण किसानों को मजबूरीवश अपनी जेब ढीली कर प्राइवेट ट्रैक्टर चालकों का सहारा लेना पड़ रहा है। 
 टै्रक्टर जिसकी हवा निकली हुई है 

घट रहा है विभाग का टारगेट

सरकार द्वारा लेजर लैंड लेवलर के माध्यम से जमीन को समतल करने के लिए कृषि यांत्रिकी विभाग को 2 ट्रैक्टर व 9 लेजर लैंड लेवलर मशीनें उपलब्ध करवाई गई थी। सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य कृषि कार्यों में पानी की बचत करना था। ताकि किसान को समय के साथ-साथ पैसे की बचत भी हो। अधिक से अधिक किसानों को इस योजना के तहत लाभ देने के लिए कृषि विभाग द्वारा कृषि यांत्रिकी विभाग को हर वर्ष टारेगट दिया जाता था। लेकिन विभाग पैसे की कमी बताकर हर बार इस टारगेट को कम कर रहा है। विभाग द्वारा इन मशीनों के माध्यम से वर्ष 2009 से अब तक जिलेभर में सिर्फ 8 हजार एकड़ जमीन को ही समतल किया गया है। इस योजना के तहत कृषि यांत्रिकी विभाग को 2011 में 4 हजार एकड़ का टारगेट दिया गया था। योजना को किसानों से मिल रहे अच्छे रिस्पांश के कारण विभाग ने 2011 में समय रहते इसे पूरा कर लिया लेकिन विभाग द्वारा 2012 में इस टारगेट को बढ़ाने की बजाए कम कर दिया गया और 4 हजार की बजाए सिर्फ 3 हजार एकड़ का टारगेट विभाग को दिया गया। लेकिन विभाग के नकारा कृषि यंत्रों के कारण किसानों ने भी सरकारी मशीनों से मुहं मोड़ कर प्राइवेट मशीनों की तरफ अपना रूख कर लिया। किसानों की बेरूखी के कारण विभाग अब तक 3 हजार एकड़ के टारगेट तक नहीं पहुंच पाया। अब तक विभाग 3 हजार में से सिर्फ 2500 एकड़ का टारगेट ही पूरा कर पाया है। 

लाखों रुपए की मशीनरी हो रही है खराब 

कृषि यांत्रिकी विभाग के पास लेजल लैंड लेवलर को चलाने के लिए 2 ट्रैक्टर व 9 लेजर लैंड लैवलर मशीनें हैं। इसके अलावा विभाग के पास वैजीटेबल वाशर व अन्य कृषि यंत्र भी हैं लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से लाखों रुपए के यह यंत्र जंग की भेंट चढ़ रहे हैं। यहां विभाग के पास कृषि यंत्रों के लिए सबसे बड़ी कमी शैड की है। विभाग के पास यंत्रों को रखने के लिए शैड नहीं है। इस कारण यंत्र खुले आसमान के नीचे ही पड़े रहते हैं। लोहे के ये यंत्र खुले आसमान के नीचे पड़े रहने के कारण धूल व पानी लगने के कारण जंग की भेंट चढ़ रहे हैं। अधिकारियों द्वारा मशीनों के सही रख-रखाव की उचित व्यवस्था नहीं करवाने के कारण लेजर लैंड लेवलर मशीन को चलाने के लिए जो ट्रैक्टर विभाग के पास हैं वह भी खराब हो रहे हैं। इन दोनों ट्रैक्टरों में से एक ट्रैक्टर के टायरों की हवा निकली हुई है। इससे हजारों रुपए कीमत के टायर खराब हो रहे हैं।

शैड के निर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा प्रपोजल

इस बारे में कृषि यांत्रिकी विभाग के सहायक कृषि इंजीनियर जिले सिंह वर्मा से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि जल्द ही कृषि यंत्रों को ठीक करवाने का काम किया जाएगा। बजट के अभाव के कारण शैड का निर्माण नहीं हो पाया है। शैड के निर्माण के लिए विभाग के उच्चाधिकारियों को प्रपोजल तैयारकर भेजा जाएगा। 

एच.आई.वी. जिन्न के जबड़ों में फंस रही जिंदगियां


पिछले 10 माह में 100 का आंकड़ा पार कर चुका है एच.आई.वी. का वायरस

जींद। एड्स जैसी लाइलाज बीमारी को कंट्रोल करने के लिए एड्स कंट्रोल सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग की सारी मेहनत बेकार हो रही है। एड्स कंट्रोल सोसायटी व स्वास्थ्य विभाग के लाख प्रयासों के बावजूद भी एच.आई.वी. का जिन्न बोतल में बंद होने का नाम नहीं ले रहा है। विभाग द्वारा हर वर्ष जागरूकता अभियानों पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद भी जिले में एड्स का ग्राफ नीचे आने की बजाए लगातार ऊपर की ओर बढ़ रहा है। अब तो एच.आई.वी. का वायरस गर्भवती महिलाओं को भी अपनी चपेट में ले रहा है। जिले में पिछले 10 वर्षों में एच.आई.वी. के पाजीटिव केसों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। एच.आई.वी. के केसों में हो रही बढ़ौतरी से यह अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है कि सरकार व स्वास्थ्य विभाग जागरूकता अभियानों पर करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद भी एच.आई.वी. के इस जिन्न को बोतल में बंद करने में नाकाम है। एड्स के आंकड़ों की रफ्तार को देखते जिले में स्थित काफी भयानक और चिंताजनक है। 

ड्राइवरों के सबसे ज्यादा पाजीटिव केस 

एच.आई.वी. पाजीटिव पुरुषों के मामलों में सबसे ज्यादा तादाद ड्राइवरों की है। सूत्रों के अनुसार पुरुषों में करीबन 60 प्रतिशत तक ड्राइवर पाजीटिव मिले हैं। ये लोग असुरक्षित यौन संबंधों के चलते इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ रहे हैं। जिले में एच.आई.वी. के फैलाव का बड़ा कारण इसे ही माना जाता है। 

पुरुष ज्याद आ रहे हैं एच.आई.वी. संक्रमण की चपेट में 

स्वास्थ्य विभाग के पास पिछले 10 माह में करीबन 3500 से ज्यादा लोग एच.आई.वी. की जांच के लिए पहुंचे। इनमें 100 से ज्यादा लोग एच.आई.वी. पाजीटिव मिले हैं। इसमें लगभग 34 मामले महिलाओं के व 73 मामले पुरुषों के पाजीटिव पाए गए हैं। इसमें 5 गर्भवती भी पाजीटिव पाई गई हैं। आंकड़ों के अनुसार एच.आई.वी. संक्रणम की चपेट में सबसे ज्यादा पुरुष आ रहे हैं।

एच.आई.वी. के पिछले आठ माह के आंकड़े
माह             कुल टेस्ट        पाजीटिव पुरुष     पाजीटिव महिला     गर्भवती       

जनवरी          270                  3                   3                    1
फरवरी         307                   3                  4                     0
मार्च            561                   7                  8                    1
अप्रैल          373                   6                  4                    0
मई             476                   9                  7                    2
जून             455                   4                  5                    0
जुलाई          503                  10                  4                    1
अगस्त          374                   6                  4                    0
कुल            3319                 48                 39                   5
जिले में वर्ष 2010 में 139 तो 2011 में 92 केस रहे पाजीटिव पाए गए।

वर्ष 2010 में पाए गए सबसे ज्यादा पाजीटिव केस

इससे पहले वर्ष 2010 के दौरान भी एच.आई.वी. के आंकड़े काफी भयानक रहे हैं। वर्ष 2010 में 5100 लोग टेस्ट करवाने के लिए सामान्य अस्पताल तक पहुंचे। इनमें से 139 लोग एच.आई.वी. वायरस से ग्रस्त पाए गए। इसमें 88 पुरुष पाजीटिव रहे तो 51 महिलाएं भी पाजीटिव पाई गई। इसके अलावा वर्ष 2011 में 92 पाजीटिव केस सामने आए। इनमें 48 पुरुष तो 44 महिलाएं पाजीटिव पाई गई।  

पर्याप्त संतुलित आहार व नशे से दूरी बढ़ा सकती है लाइफ

एच.आई.वी. की रिपोर्ट पाजीटिव आने पर पीडि़त को रोहतक मैडीकल कालेज स्थित ए.आर.टी. सैंटर में रैफर कर दिया जाता है। वहां पर उसके कुछ और टेस्ट किए जाते हैं। इसके बाद उसका उपचार शुरू कर दिया जाता है। एड्स एक लाइलाज बीमारी है। अभी तक इस बीमारी का कोई स्थाई उपचार नहीं है। पीडि़त रेगूलर दवाइयां लेता रहे तो उसको काफी आराम मिलता है। इसके साथ ही नशे से दूर रहकर तथा पर्याप्त संतुलित आहार लेने से पीडि़त एच.आई.वी. वायरस से लड़ कर अपने जीवन की डोर को काफी लंबा ङ्क्षखच सकता है। 

जागरुकता अभियानों में रहे छेदों को करना होगा बंद 

करोड़ों रुपए बहाकर चलाए जा रहे एड्स विरोधी अभियान की सच्चाई इन आंकड़ों के सामने दम तोड़ जाती है। एचआई की रफ्तार सरकार, स्वास्थ्य विभाग व समाज तीनों के लिए ङ्क्षचता की बात है। जहां समाज का एक बड़ा हिस्सा एच.आई.वी. की चपेट में आता जा रहा है, वहीं सरकार व स्वास्थ्य विभाग करोड़ों खर्च कर भी लोगों को इससे नहीं बचा पा रहा है। एच.आई.वी. की ओवरस्पीड सरकार व विभाग के अभियान में छेद की ओर साफ इशारा कर रही है। यदि वास्तव में समाज को जानलेवा एच.आई.वी. से बचाना है तो सरकार व स्वास्थ्य विभाग को अपने अभियान में रहे इन छेदों को बंद करना होगा। 

एच.आई.वी. को रोकने के लिए विभाग करता है हर संभव प्रयास : सिविल सर्जन

इस बारे में जब सिविल सर्जन डॉ. राजेंद्र प्रसाद से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों की बजाए इस वर्ष स्थित काफी नियंत्रित है। जिले में सी.एच.सी. स्तर पर 5 सैंटर खोले गए हैं। इन सैंटरों में एक काऊंसलर की नियुक्ति की गई है, जो एच.आई.वी. के बारे में पूरी जानकारी देता है। इसके अलावा नुक्कड़ नाटकों के जरिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। गर्भवतियों, टी.बी. के मरीजों के अलावा जो भी मरीज आप्रेशन के लिए आता है उसका भी टैस्ट किया जाता है। पाजीटिव मिलने पर विभाग का वर्कर उसके घर पर जाकर चेकअप करता है। विभाग एच.आई.वी. को कंट्रोल करने के लिए हर संभव प्रयास करता है। 

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

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