Monday, 25 September 2017

आवारा पशु मुक्ति में तामझाम बौने

गौशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश
अस्थायी नंदीशाला में भी सुविधाओं का टोटा
जगह, संसाधन, आर्थिक पहलू सबसे बड़ी समस्या

 जींद
जिले को आवारा पशु मुक्त करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा किया गया तामझाम अब तक बौना साबित हुआ है। 30 सितम्बर तक जिले को आवारा पशु मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। जिले में गौशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश पहुंच चुका है। जिसके चलते गौशालाओं को भी आर्थिक तथा स्थान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। क्षमता के अधिक गोवंश होने के कारण गौशालाओं की स्थिति भी खराब है। अस्थायी तौर पर बनाई गई जिले में तीन नंदीशाला भी उन्हीं हालातों से गुजर रही हैं। अस्थायी नंदीशाला के लिए स्थान तो उपलब्ध है लेकिन उनमे धूप, छांव तथा बारिश से बचने के लिए शैड नहीं है। जिसके चलते गोवंश को बैठने में दिक्कत हो रही है और गोवंश बीमार होकर भी मर रहा है। पिछले दो माह में गोवंश की मौत का आंकड़ा 100 के लगभग पहुंच चुका है। बावजूद इसके अब भी गोवंश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। अधिकारियों का दावा है कि जिलेभर में लगभग 1500 से 1700 तक गोवंश बाहर है। जिसे जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। 
तीन अस्थायी नंदीशाला, 21 गौशालाओं पर निर्भर गोवंश
जिले में आवारा पशुओं के लिए तीन अस्थायी नंदीशाला बनाई गई हैं इसके अलावा 21 गौशालाएं हैं। जो लगभग 35 हजार गोवंश की शरण स्थली बनी हुई हैं। जींद नंदीशाला में तीन हजार, जुलाना में 600, सफीदों में 650 नंदी हैं। जींद में श्री गौशाला, हांसी रोड गौशाला, बालाजी गौशाला, सोमनाथ गौशाला, पिंडारा में श्रीकृष्ण गौशाला, गावं ढाणी गौशाला, धड़ौली गौशाला, ढाठरथ गौशाला, नगूरां गौशाला, सफीदों गौशाला, जुलाना गौशाला, उचाना फूल्लूसाध गौशाला, छात्तर गौशाला, नरवाना में कृष्णा गौशाला, सतपाल गौशाला, राधेश्याम गौशाला, ढाकल रोड गौशाला, जींद के रोहतक रोड तथा कैथल रोड और धमतान में भी छोटे स्तर की उपचार देने वाली गौशाला हैं। 
जगह, संसाधनों की कमी, गोवंश ज्यादा
जिले की कोई भी ऐसी गौशाला नहीं है जिसमे क्षमता से अधिक गोवंश न हो। जिसके चलते गोवंश को तो परेशानी का सामना करना ही पड़ता है साथ में संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। श्री गौशाला, सोमनाथ गौशाला, श्रीकृष्ण गौशाला, उचाना गौशाला, छातर गौशाला, धड़ौली गौशाला को छोड़कर किसी भी गौशाला के पास अपनी जमीन है। जिनकी जरूरते कुछ हद तक पूरी हो जाती हैं। बावजूद इसके गौशालाएं दानी सज्जनों पर निर्भर हैं। सभी गौशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश हैं। क्षमता एक हजार की है तो उसमे 1500 से 1700 तक गोवंश है। जिसके चलते संसाधनों तथा आर्थिक समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। 
धूप, छांव, बारिश से बचने के लिए नहीं शैड
जिले में अस्थायी तौर पर तीन नंदीशालाएं बनाई गई हैं। जिसमे जींद, जुलाना तथा सफीदों शामिल हैं। उचाना, नरवाना, पिल्लूखेड़ा तथा अलेवा में जगह उपलब्ध नहीं हो पाई है। जिन स्थानों पर अस्थायी नंदीशाला बनी हुई है उन्हीं ब्लॉकों में स्थायी नंदीशालाओं का निर्माण किया जा रहा है। अस्थायी नंदीशालाओं में लगभग छह हजार के लगभग गोवंश है। तीनों अस्थायी नंदीशालाओं में धूप, छांव तथा बारिश से बचने के लिए कोई छप्पर नहीं डाला गया है। बारिश मौसम के दौरान नंदियों के हालात दयनीय हो जाते हैं। नंदियों को भिडऩे से रोकने, बीमार, कमजोर, लाचार नंदियों को अन्य नंदियों से अलग रखने के लिए कोई स्थायी प्रबंध नहीं है।
संख्या नियंत्रित करने की कोशिश
आवारा पशुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनकी संख्या को नियंत्रित करने की कोशिश जिला प्रशासन द्वारा की गई है। पकड़े गए गोवंश को बधिया कर संख्या पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। पशुपालन विभाग द्वारा लगभग दो हजार नंदियों को बधिया किया जा चुका है। विभाग के अधिकारियों को कहना है कि बधिया करने से न तो नंदी उग्र होता और न ही संख्या बढ़ाने की क्षमता रहती। 
गौशालाओं का आत्म निर्भर न होना परेशानी का मुख्य कारण

अन्ना टीम तथा अस्थायी नंदीशाला के सदस्य सुनील वशिष्ठ ने बताया कि गऊशालाओं के पास जगह तथा आत्मनिर्भता न होने के कारण गऊशाला आवारा पशुओं को लेने से कतरा रही हैं। जिसके पीछे मुख्य कारण गऊशाला, दूध, देशी खाद या गोवंश से जुड़े प्रोडेक्टों को तैयार नहीं कर रही है। ज्यादतर गोवंश लाचार तथा बीमार है और दूध की मात्रा तथा गुणवत्ता पर भी खरी नहीं है। गोवंश का कृषि में भी प्रयोग नहीं हो रहा है, जिसके चलते नंदियों की संख्या भी अच्छी खासी बढ़ती चली गई। उत्तम नस्ल का गोवंश होना जरूरी है। जिसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने जरूरी हैं। 

गौशालाओं में क्षमता से अधिक है गोवंश
बालाजी गौशाला के संरक्षक राजेश गौत्तम ने बताया कि आधा दर्जन के लगभग गौशाला कुछ हद तक आत्मनिर्भर है। अन्य गौशालाएं जनता के सहयोग से चल रही है। सभी गौशालाओं में क्षमता से अधिक गोवंश है। जिसके चलते संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है और गोवंश को भी परेशान होना पड़ रहा है। गोवंश की संख्या क्षमता अधिक होने के कारण जगह का भी अभाव बना हुआ है। गांव स्तर पर प्रबंध कर आवारा पशुओं से मुक्ति दिलाई जा सकती है। 
क्या कहते हैं डीसी
डीसी अमित खत्री ने बताया कि जिले को निर्धारित समयाविधि में आवारा पशु मुक्त कर लिया जाएगा। पिछले कुछ दिनों से अधिकारी लगातार आवारा पशुओं को पकडऩे की मुहिम में जुटे हुए हैं। तीन हजार से ज्यादा आवारा पशुओं को पकड़ा जा चुका है। उन्होंने माना कि जिले में 1500 के लगभग आवारा पशु पकडऩे बाकि हैं। जिनकी धर पकड़ की जा रही है। फिलहाल तीन अस्थायी नंदीशालाओं में आवारा पशुओं को छोड़ा जा रहा है। तीन स्थायी नंदीशाओं का निर्माण कार्य जोरों पर है। जिले को आवारा पशु मुक्त करने के लिए जनसहयोग मिल रहा है। गौशालाओं को दिशा निर्देश दिए गए हैं। 

Sunday, 24 September 2017

अंधेर नगरी चौपट राजा नाटक ने मोहा दर्शकों का मन



नाटक के माध्यम से अज्ञानी राजा पर किए कटाक्ष
कलाकारों के हास्य व्यंग पर दर्शकों ने भी लगाए ठहाके 
 जींद 


एक्टिव थियेटर एंड वेल्फेयर सोसायटी द्वारा हरियाणा कला परिषद व हरियाणा संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में चल रहे 11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के तीसरे दिन अंधेर नगरी चौपट राजा का मंचन प्रसिद्ध रंगकर्मी रमेश कुमार के निर्देशन में किया। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. रमेंद्र व डॉ. केएस गोयल तथा धनराज सिंगला ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। नाटक की कहानी कुछ इस प्रकार है कि बहुत दिन पहले की बात है काशी तीर्थ यात्रा की वापसी में एक गुरु शिष्य किसी नगरी में पहुंचे, उसका नाम अंधेर नगरी था। शिष्य बाजार में सौदा खरीदने पहुंचा तो वहां हर चीज एक ही भाव मिलती है। टके सेर भाजी टके सेर खाजा। एक टके का सेर भर खाजा खरीद लाया और बहुत खुश होकर अपने गुरुजी से बोला गुरुजी वहां तो बड़ा मजा है खूब मस्ती है। चीजें सब टका सेर। देखिये एक टका में ये सेर भर खाजा लाया हूं। हम तो अब कुछ दिन यही मौज करेंगे। छोडिय़े तीर्थ यात्रा, यह सुख और कहां मिलेगा। गुरु समझदार थे बोले बच्चा जिसका नाम ही अंधेर नगरी वहां रहना अच्छा नहीं जल्दी भाग निकलना चाहिए यहां से। साधु रमता चला पानी बहता भला। पर शिष्य को गुरु की बात नहीं भाई और शिष्य ने कहा कि गुरु जी में कुछ दिन यही रहूंगा। गुरुजी समझदार थे उन्होंने कहा कि अगर मेरी जरुरत पड़े तो मुझे याद कर लेना, मैं हाजिर हो जाऊंगा और गुरुजी चले गए। और इसी बीच एक महिला की बकरी मर जाती है। वह राजा के दरबार में फरियाद लेकर जाती है कि महाराज मेरा न्याय करें। चौपट राजा जोकि एक मूर्ख राजा है, वह कहता है कि हमारे राज्य में बकरी मरी है, उसका न्याय तो होगा और आखिरी में ऐलान करता है कि कोतवाल को फांसी चढ़ाया जाए लेकिन कोतवाल बच जाता है। अब किसी को तो फांसी देनी थी। सैनिकों ने चुपके से चेले के गले में फंासी का फंदा डालकर देखा तो फांसी का फंदा फिट बैठा। चेले को राजा के दरबार में पेश किया गया और राजा ने आदेश दिया कि इसको फांसी दे दी जाए। चेला रोया, गिड़गिड़ाया और कहा कि मेरे साथ अन्याय है और उसने अपने गुरु को याद किया। गुरुजी हाजिर हो गए। चेले ने कहा कि बकरी के मारे जाने से मुझे फांसी दी जा रही है। गुरुजी ने समझाया और एक नाटक रचा और सब में होड़ मच गई कि पहले फांसी में चढूंगा। इसी बीच मूर्ख राजा वहां आता है और सबको खामोश करता है और गुरु जी से पूछता है कि यह क्या गोलमाल है गुरुजी। गुुरुजी कहते हैं जो इस समय फांसी पर चढ़ेगा, वह सीधा स्वर्ग में जाएगा। तो राजा कहता है कि हम यहां के राजा हैं तो पहले फांसी हम चढ़ेंगे और राजा फांसी चढ़ जाता है और मर जाता है। सारी प्रजा चैन की सांस लेती है। दर्शकों ने यह नाटक बारिश में खड़े होकर खूब आनंद लिया, व खूब तालियां बजाई। कलाकारों की प्रशंसा की। मुख्यातिथि डॉ. रमेेंद्र कालीरमण ने कहा कि यह संस्था का प्रयास हम जैसे लोगों को कलाओं के प्रति संवेदनशील बनाना है व इस क्षेत्र में कलाकारों को आगे बढ़ाना है। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. केएस गोयल ने कहा कि इस संस्था को हम हर संभव सहायता मुहैया करवाने का पूरा प्रयास करेंगे और इस मुहिम को लगातार आगे बढ़ाते रहेंगे। मंच का संचालन मंगतराम शास्त्री ने किया। इस अवसर पर सुभाष श्योराण, सुभाष ढिगाना, प्रवीन परुथी, रंगकर्मी रमेश कुमार, सुनीता मलिक, प्रवीन दुग्गल, कृष्ण नाटक, प्रवेश त्यागी, डॉ. बनीश, मुकेश सिंगला भी मौजूद थे। 


मां के जयकारों के बीच 11०० कन्याओं का हुआ पूजन

बेटियों की महत्ता का नेता, शिक्षाविद्, अधिकारियों ने किया जमकर गुणगान
कल्याणकारी योजनाओं के आ रहे है सार्थक परिणाम : सांसद कौशिक
बेटियों के उत्थान के लिए शिक्षा जरूरी : डीसी अमित
मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सांसद ने की पांच लाख देेने की घोषणा 

जींद 

नवरात्रों की बेला में महाभारतकालीन जयंती देवी मंदिर के दरबार में शनिवार को बेटियों के हित में आवाज उठाने के साथ-साथ उनके गुणों को पूजा गया। मां के दरबार में 11०० कन्याओं का पूजन करने के लिए नेता, शिक्षाविद् और अधिकारी पहुंचे। नवरात्रों के तीसरे दिन मां के गुंजायमान जयकारों के बीच कन्याओं का पूजन करते हुए उनकी महत्ता का अतिथियों ने जमकर बखान किया। कन्या पूजन के साथ-साथ स्वयं शक्ति संबोधन में कल्पना चावला, साक्षी सहित उन महिला शक्तियों की मिसाल पेश की, जिनकी प्रतिभा का ना केवल देश में अपितु विदेशों में भी डंका बज रहा है। मां के दरबार में हुए इस भव्य धार्मिक समागम में बतौर मुख्यातिथि सोनीपत सांसद रमेश कौशिक, विशिष्ट अतिथि सीआरएसयू के वीसी प्रो. आरबी सौलंकी और अध्यक्षता के तौर पर डीसी अमित खत्री ने शिरकत की। इसके अलावा एसडीएम अश्विनी मलिक सम्मानित अतिथि के तौर पर पहुंचे। अतिथियों का मंदिर के पुजारी पंडित सुभाष चंद्र और नवीन शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत करते हुए नगर शांति की अर्चना करवाई। वृंदावन से आई श्याम प्रिय सखी ने मां के गीत से सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। 

सरकार बेटियों के हित में चला रही कल्याणकारी योजनाएं : सांसद कौशिक
मुख्यातिथि सांसद रमेश कौशिक ने इस मौके पर कहा कि मोदी सरकार बेटियों के हित में जो कल्याणकारी योजनाएं चला रहे है, उसके परिणाम सामने आ रहे हैं। नवरात्रों के पावन दिनों में कन्याओं के पूजन और उनके गुणगान से जींद के सिद्धपीठ मंदिर में जो आवाज उठी है, उसका संदेश दूर-दूर तक जाएगा। उन्होंने कहा कि लोगों की सोच अब बदलने लगी है। पहले जहां बेटियों को लोग बेटों से कम आंकते थे, आज के दौर में बेटियों के गुणों को पहचान कर उनको पूजा जाने लगा है। बेटियों के लिए पढऩा-लिखना जरूरी है ताकि वह खुद सक्षम बन सकें। मंदिर के श्रद्धालुओं की मांग पर सांसद रमेश कौशिक ने अपने सांसद निधिकोष से पांच लाख रुपये देने की घोषणा की। 
कन्या की महत्ता को समझने लगे हैं लोग : डीसी अमित 

डीसी अमित खत्री ने कहा कि मां के दरबार में नवरात्रों के दिनों में कन्याओं के पूजन का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि जींद जिले के लोग इस बात के लिए सराहनीय है कि उन्होंने दकियानूसी बातों को छोड़ कर बेटियों के गुणों की पहचान करनी शुरू कर दी है। इसी के नतीजन जींद जिले का लिंगानुपात पटरी पर लौट आया है। यह जिले के लोगों की बदली हुई सोच है। उन्होंने कहा कि इतिहास को खंगाले और वर्तमान को पहचाने तो यह बात निकल कर सामने आती है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है। डीसी ने कहा कि अभिभावक अपनी बेटियों को जरूर शिक्षा की तालिम दें ताकि वे अच्छा-खासा पढ़-लिखकर परिवार के साथ-साथ अपने जिले तथा राज्य का नाम रोशन कर सकें। इस मौके पर अतिथियों ने अपने हाथों से कन्याओं को दक्षिणा भी दी। 

हरियाणा संस्कारवान, इसलिए पूजा जा रहा बेटियों को 

सीआरएसयू के वीसी प्रो. आरबी सौलंकी ने कहा कि हरियाणा संस्कारवान है। इस धरा से कल्पना चावला और साक्षी जैसी सरीखी बेटियों ने देश का गौरव बढ़ाने का काम किया। यहां की माटी में जो संस्कार है, उसी के नतीजन बेटियों को पूजा तथा गुणों को समझा जाता है। बेटियों का जो मान-सम्मान बढ़ रहा है, उसमें ऐसे धार्मिक आयोजन ही अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुरूक्षेत्र के नजदीक पडऩे के कारण जींद की विशेष पहचान है। यहां के जयंती देवी मंदिर और तीर्थ पांडू पिंडारा का जिक्र दिल्ली के गलियारों में बखूबी से सुनने को मिलता है। विशिष्ट अतिथि वीसी प्रो. आरबी सौलंकी ने कहा कि कन्याओं की महत्ता को समझा जा रहा है। इसलिए आज चहुंओर बेटियों के हित में आवाज बुलंद हो रही है। मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं ने अतिथियों को मां जयंता देवी की प्रतिमा के रूप में स्मृति चिन्ह भी भेंट किये। इस अवसर पर लगे विशाल भंडारे में 11०० कन्याओं समेत हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। 

कन्या पूजन से वातावरण से नकारात्मक ऊर्जा होती है दूर : शास्त्री

सिद्धपीठ मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने कहा कि शक्ति स्वरूपा कन्याओं के पूजन से वातावरण में जो सुख और शांति का माहौल बनता है, उसके कारण नाकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। उन्होंने कहा कि मां के दरबार में नवरात्रों में प्रत्येक दिन सायं हवन यज्ञ भी आयोजित होते है। यहां सप्तमी पर मेला लगने के दौरान लाखों श्रद्धालु मां के दरबार में पहुंचते है। शास्त्री ने बताया कि इस नवमी पर एक विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर में पार्किंग के निर्माण तथा मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए सांसद रमेश कौशिक ने अपने निधि कोष से पांच लाख देने की जो घोषणा की है, उससे निश्चित तौर पर उन श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी, जो लंबे अर्से से इन सुविधाओं की दरकार महसूस कर रहे थे। 

ये रहे मौजूद 
इस मौके पर भाजपा के प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, जिला प्रधान अमरपाल राणा, जिला महिला प्रधान पुष्पा तायल, भाजपा युवा नेता समरवीर कौशिक, डीएसपी सिटी कप्तान सिंह, पंडित धन्नाराम कौशिक, रामप्रकाश काहनोरिया, महेश सिंगला, सुनील शांडिल्य, महावीर जैन, मास्टर सोमबीर सिंह मलिक, डा. दिनेश शर्मा, सुशील सिंगला, अजय भोला, राम सुनेजा, हरिराम दीक्षित, रामफूल शर्मा, फूलकुमार, पूर्व बीईओ बनारसी दास, राजेश कौशिक सहित सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने मां का गुणगान किया। 



शहीदी स्मारक पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

शहीद किसी एक कौम के नहीं : डीसी अमित खत्री
शहीदों की बदोलत खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं हम 

जींद 
शहीदों के सम्मान में स्थानीय गोहाना रोड स्थित शहीद स्मारक पर डीसी अमित खत्री, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. अरूण सिंह, एडीसी धीरेन्द्र खडगटा, एसडीएम अश्विनी मलिक, डीएसपी कप्तान सिंह समेत अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों तथा भारतीय सेना में रहे अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पुष्प चक्र, पुष्प चढ़ाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर हरियाणा पुलिस की टुकड़ी ने शस्त्र झुका कर शहीदों को सम्मान दिया। एनसीसी के कैडेट्स की टुकड़ी ने शहीदों को नमन किया। बुदांबांदी के बीच शहीदों को नमन करने का कार्यक्रम चला। इस मौके पर डीसी अमित खत्री ने कहा कि आज हम जिस स्वतन्त्र वातावरण में सांस ले रहे हैं। यह सब देश पर मर मिटने वाले सैनिकों की बदोलत है। वे माता-पिता एवं परिजन धन्य हैं, जिनके बच्चों ने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी। देश उन शहीदों एवं शहीदों के परिजनों का हमेशा ऋणी रहेगा। डीसी ने लोगों से अपील की कि वे समाज के प्रति अपने कर्तव्य को सही तरीके से निभाकर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं। ऐसा करके वे राष्ट्र निर्माण में अपना अहम योगदान अदा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की संस्कृति दूनिया की सबसे प्राचीन संस्कृतियों में से एक है। भारत की संस्कृति एवं गौरव को खत्म करने के लिए कई बार दुश्मनों ने देश पर हमले किए लेकिन हर बार दुश्मनों को मुंह की खानी पड़ी। उन्होंने कहा कि भारत अजेय रहा है और हमेशा अजेय रहेगा। इस का श्रेय उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे सैनिकों को दिया। उन्होंने कहा कि देश है तो हम हैं इसलिए हमेशा अपने हितो से राष्ट्र हितों को सर्वोपरि समझना चाहिए। कार्यक्रम में डीसी अमित खत्री ने शहीद कैप्टन पवन के पिता से बातचीत के दौरान बताया कि डाहौला में हॉटिकल्चर के रिजनल सैंटर का नाम शहीद कैप्टन पवन खटकड़ के नाम से रखा जाएगा। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डा. अरूण सिंह ने इस अवसर पर देश के लिए अपने प्राणों की शहादत देने वाले जिला के वीरों सैनिकों के पराक्रम को याद किया और कहा कि हम शहीदों की शहादत बदौलत ही आज स्वतन्त्र वातावरण में विचरण कर रहे है। निश्चित रूप से शहीदों के बलिदान को बुलाया नहीं जा सकता। इन्ही की बदौलत देश की सीमाएं सुरक्षित है।
ये रहे मौजूद 
इस अवसर पर सेवानिवृत कर्नल सुबे सिंह ढ़ाड़ा, कर्नल वेदप्रकाश, जयपाल, रामकरण,  मेजर इंद्र सिंह भारद्वाज , सिपाही रामकुवार, कैप्टन सज्जन सिंह बूरा, हवलादार सुखबीर सिंह रेढू, कैप्टन राजबीर, जिला खेल अधिकारी विनोद बाला व खेल विभाग के कर्मी समेत अनेक रिर्टायड सैन्य अधिकारियों एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीदों को याद किया। इस अवसर पर हरियाणा पुलिस की टुकड़ी ने  शस्त्र झुका कर एवं मातमी धुन बजाकर श्रद्धांजलि अर्पित की।  

Saturday, 23 September 2017

अध्यापक वर्ग को दी व्यवहार कुशलता की जानकारी

इंडस स्कूल में लैंगिक समानता एवं संवेदना विषय पर कार्यशाला आयोजित

जींद 
इंडस पब्लिक स्कूल में सीबीएसई  की तरफ से लैंगिक समानता एवं संवेदना विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सीबीएसई की तरफ से मुख्य प्रशिक्षक के रूप में प्रवीन कुमार पटपटिया एवं सह प्रशिक्षिका बानी गोदारा विशेष रूप से मौजूद रही। इंडस निदेशक सुभाष श्योराण, उपनिदेशिका रचना श्योराण, स्कूल प्राचार्या अरूणा, उप प्राचार्य प्रवीन कुमार, मुख्याध्यापिका गुरमीत कौर, प्रवीन परूथी, पिल्लूखेड़ा स्कूल प्राचार्य पवन गुप्ता, मिर्चपुर स्कूल प्राचार्य नीलम राठी एवं जीन्द, पानीपत, करनाल, भिवानी, महम, पिल्लूखेड़ा, मिर्चपुर, हिसार, कैथल, रोहतक और होशियारपुर (पंजाब) आदि के प्राध्यापक उपस्थित थे। मुख्य प्रशिक्षक प्रवीन कुमार पटपटिया ने समाज में उभरती हुई विभिन्न लैंगिक समस्याओं से प्राध्यापक वर्ग को अवगत कराया, जिनमें लैंगिक समानता, तटस्थता, भेदभाव, अंतर, असमानता, संबंध, भूमिकाएं, पूर्वाग्रह, जागरूकता, भावनात्मकता, पुरूष प्रधानता, स्त्रीवाद, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक तानाबाना इत्यादि विषयों पर विस्तृत चर्चा की। इनके अतिरिक्त व्यक्तिगत एवं समूह गतिविधियां करवाई गई। इन गतिविधियों में विद्यालय दृष्टिकोण, उद्देश्य, प्रबंधन, संरचना और उपयोगिता, स्कूल प्रशासन, पाठ्यक्रम, पाठ्य सामग्री, बाल मनोविज्ञान, सहगामी और अतिरिक्त सहगामी क्रियाएं, विद्यालय पौषाक, यातायात, सहायक गतिविधियां, लिंग आधारित हिंसा, लैंगिक संवेदनशील पाठ योजना, कक्षा में भाषा प्रयोग, लैंगिक संवेदना विधि, लैंगिक संवेदनशील कक्षा, कक्षा को लैंगिक संवेदनशील बनाने के लिए क्या करें और क्या न करें, कक्षा कार्य शीलता विचार, लैंगिक संवेदनशील कार्य प्रणाली, लैंगिक संवेदनशीलता को शिक्षण में एकीकृत करने की रणनीति, अध्यापक लड़कियों को कक्षा में कैसे नियंत्रित रखें तथा अध्यापिका लड़कों को कक्षा में कैसे नियंत्रित रखें आदि विषयों पर विचार विमर्श किया गया। स्कूल प्राचार्या अरूणा शर्मा ने आए हुए प्रशिक्षकगण का स्वागत एवं धन्यवाद किया और कहा कि इस तरह की गतिविधियों द्वारा अध्यापक  वर्ग में जागृति लाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की की समय-समय पर आवश्यकता होती है। इंडस स्कूल में समय-समय पर इस प्रकार की गतिविधियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन करवाया जाता है। 




शिव पार्वती संवादों ने दर्शकों को खूब गुदगुदाया

रंगशाला में शिव पावर्ती सांग का हुआ मंचन
11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाट्य उत्सव का हो रहा है आयोजन

जींद 

एक्टिव थियेटर एंड वेल्फेयर सोसायटी द्वारा हरियाणा कला परिषद व हरियाणा संस्कृत अकादमी के तत्वावधान में चल रहे 11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के दूसरे दिन शिव पावर्ती सांग का मंचन सतीश कश्यप व डा. संध्या के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री के निजी सचिव राजेश गोयल व इंडस गु्रप के डायरेक्टर सुभाष श्योराण, अमृतलाल गोयल ने दीप प्रज्जवलित करके किया। सांग की शुरुआत पावर्ती की मां नारद मुनि से पार्वती के लिए योग्य वर ढूंढने का आग्रह करती है। नारद मुनि कहते हैं इसका विवाह शिव से होगा। पार्वती शिव को पाने के लिए उसकी आराधना करती है। इसमें  शिव पार्वती की परीक्षा लेने का अभिनय करते हंै। शिव पार्वती को बार-बार कहता है कि मैं तेरे लायक नहीं हूं। तू महलों में रहने वाली राजकुमारी है और मैं फकीर पहाड़ पर रहता हूं, इसलिए हमारा मेल नहीं हो सकता। पार्वती उनकी बात नहीं मानती और शिव को श्राप देने लगती है। तभी शिव शादी के लिए मान जाते हैं और दोनों की खुशी-खुशी शादी हो जाती है। इसी बीच नाटक की घटनाओं को देखते हुए दर्शक  लोटपोट हो गए। क्योंकि सांग का आकर्षण शिव का अंग्रेजी में बोलना, हिंदी-हरियाणवी में बोलना दर्शकों के लिए मनमोहक बन गया। दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गडग़ड़ाहट में  कलाकारों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यअतिथि राजेश गोयल ने कहा कि यह 11 दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य उत्सव कला को आगे लेकर जाएगा। इस प्रकार के कार्यक्रमों से हरियाणा प्रदेश का नाम रोशन होगा। इससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक सुंदर मंच मिलेगा। कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। सरकार का उद्देश्य कलाकारों को बढ़ावा देना है और इसके लिए अथक प्रयास किए जा रहे हैं। संस्था की तरफ से आयोजित उत्तर भारत का बड़ा राष्ट्रीय नाटक उत्सव वास्तव में कला को बढ़ावा देने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सुभाष श्योराण ने कहा कि यह संस्था पिछले वर्षों से लगातार थियेटर कर रही है। स्कूलों में बाल रंग मंच के माध्यम से प्रतिभाओं को आगे बढऩे का मौका दे रही है और उनकी प्रतिभा में लगातार निखार ला रही है। इसके लिए रंगकर्मी  रमेश कुमार बधाई के पात्र हैं। इसी कड़ी में संस्था की तरफ  से राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम जींद में आयोजित करके ग्रामीण परिवेश के युवाओं को प्रतिभा दिखाना का मौका दिया है। इस प्रकार यह संस्था लगी रही तो वह दिन दूर नहीं होगा जब जींद जिले से बेहतर कलाकार निकल कर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगे। श्योराण ने कहा कि जींद जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन बेहतर मंच नहीं मिलने के कारण वह आगे नहीं बढ़ पाती है। इसलिए सरकार से आग्रह है कि जींद जिले में कलाकारों के लिए बेहतर ऑडिटोरियम का निर्माण करवाया जाए ताकि युवा रंगकर्मी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकें। इस मौके पर डा. सुरेश जैन, मंगतराम शास्त्री, ओमप्रकाश चौहान, प्यारेलाल सिंगला, अमृतलाल गोयल, प्रवीन परुथी, अजेश जैन, रमेश कुमार, प्रवीन दुग्गल, कृष्ण, प्रवेश त्यागी, सुनील वशिष्ठ आदि मौजूद रहे। 


 




मां दुर्गा की अराधना से शहर हुआ भक्तिमय

श्रद्धालुओं ने की मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
पूरा दिन मंदिरों में लगी रही भक्तों की भीड़ 

 जींद

शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन शुक्रवार को भी मंदिर श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। नवरात्रों में शहर में जगह-जगह कीर्तन आयोजित होने के कारण पूरा शहर मां दुर्गा की भक्ति में लीन हो गया है। जैसे-जैसे शाम होनी शुरू होती है वैसे-वैसे मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या भी बढऩे लगती है। नवरात्रों के दूसरे दिन भक्तों ने मां बृह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सुबह पांच बजे से ही मंदिर में भक्तों की लाइन लगनी शुरू हो जाती है। जिनमें महिलाओं तथा छोटे बच्चों की संख्या अधिक होती है। उन्होंने बताया कि अन्य दिनों की अपेक्षा नवरात्रों में भक्तों की भीड़ मंदिरों में ज्यादा जुटती है। श्रद्धालु जल्द से जल्द मां दुर्गा के दर्शनों के अभिलाषी होते हैं। श्रद्धालुओं का यह क्रम सुबह 11 बजे तक चलता है। शाम पांच बजे से श्रद्धालु फिर से मंदिर में आना शुरू हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के छठे दिन मंदिर में जागरण का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा रघुनाथ मंदिर, शीतला माता मंदिर, वैष्णवी धाम, बनभौरी माता, राधा कृष्ण मंदिर, दुर्गा मंदिर, हनुमान मंदिर में आयोजित सत्संग तथा कीर्तनों से पूरा शहर भक्तिमय हो गया है। 

आध्यात्मिक ऊर्जा के केन्द्र हैं हमारे धर्मस्थल : स्वामी ज्ञानानंद
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक ऊर्जा के केन्द्र हैं हमारे धर्मस्थल। ऐसे पवित्र स्थलों में प्रवेश करने पर हमारा अंत:करण एक नवीन स्फूति व उल्लास से प्रफुल्लित हो उठता है और तन व मन परम शांति में प्रतिष्ठित हो जाते हैं। जरूरत इस बात की है कि हम नित्य-प्रति ऐसे स्थलों पर जाकर अपने को आध्यात्मिक ऊर्जा से ऊर्जस्वित कर लें। गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज माता वैष्णवी धाम में प्रथम नवरात्र पर आयोजित नवार्ण महायज्ञ में उपस्थित जन समूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री हरियाणा के निजी सचिव राजेश गोयल ने इस अवसर पर मां वैष्णवी के समक्ष जन-जन के कल्याण की कामना की व मातृभक्तों को नवरात्र पर्व की शुभकामनाएं दी। धाम के मैनेजिंग ट्रस्टी आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि हम जहां भी हैं, जिस भी अवस्था में हैं, वहीं से ईश्वर की ओर जाने का मार्ग खुलता है किंतु इरादा पक्का होना चाहिए। निष्ठा दृढ़ होनी चाहिए, प्यास तीव्र होनी चाहिए। गीता मनीषी ने कहा कि नवरात्र ऊर्जा संचय का काल है। वह महाशक्ति जिसे हम दुर्गा, काली अथवा वैष्णवी नाम से पुकारते हैं, पूर्वकाल मेें उन्हीं की कृपा से देवताओं ने दानवों का पराभव किया था। हमें भी आज उन्हीं महाशक्ति की आराधना करने की जरूरत है, अपने भीतर के दानवों का दमन करने के लिए। तभी तो नवरात्र पर्व साथर्कहो पाएगा। भाजपा प्रदेश सचिव जवाहर सैनी, डा.अविनाश चावला, सीआरएस युनिवर्सिटिी के रजिस्ट्रार डा. आरबी मोर, युनिवर्सिटी के डीन डा. संजय सिन्हा, डा. महेश आशरी, सुभाष शर्मा, शिव नारायण शर्मा ने सपरिवार मां शैलपुत्री की आराधना कर महायज्ञ में आहुति दी। डा.कृष्ण मिढ़ा, राजन चिल्लाना, डा.अनिल जैन, नगर पार्षद अनिल नागपाल भी मौजूद रहे। 

श्रद्धालुओं ने की मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

नवरात्र की पावन बेला पर द्वितीय नवरात्र पर जयंती देवी मंदिर में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की गई। पुजानी नवीन शास्त्री ने बताया कि हजारों वर्ष की तपस्या के उपरांत मां उमा की काया काली पड़ गई थी, तब भगवान शंकर ने प्रसन्न हो गंगाजल से स्नान करवाया और मां का रूप श्वेत हो गया। मां का मस्तक देख कर देवताओं ने ब्रह्मचारियाणी का गुणगान गाया। इसके उपरांत जो भक्त सच्चे मन से मां ब्रह्मचारियाणी की पूजा करता है  उसको मुंह मांगा फल प्राप्त होता है। 


खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...