Wednesday, 27 September 2017

प्रदूषण को रोकने के लिए प्रशासन गंभीर

किसानों को फसल नहीं जलाने के लिए किया जाएगा प्रेरित
अवशेष जलाने वाले गांव की डीसी ने मांगी जानकारी

जींद
: जिले में कोई भी किसान धान या अन्य प्रकार की फसलों में आग लगाकर प्रदूषण नहीं फैला पाएगा। जिला प्रशासन ने प्रदूषण को काफी गंभीर समस्या मानते हुए इसको रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। जिला प्रशासन द्वारा गांवों में जागरूकता अभियान लगाकर किसानों को फसल नहीं जलाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा डीसी ने ऐसे गांवों की सूची मांगी है, जहां पिछले 3 साल में किसानों ने ज्यादा फसलों में आग लगाई है।
फसल कटाई के बाद शेष रहने वाले अवशेषों और डंठलों के जलाने पर पूर्ण अंकुश लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए एक विशेष चेतना अभियान प्रशासन शुरू कर दिया है। राजस्व विभाग, विकास एवं पंचायत, पुलिस, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, मार्कीट कमेटी मिलकर फसलों के अवशेष नहीं जलाने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाएंगे। डीसी अमित खत्री ने बताया कि इस जागरूकता की मुहिम को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए सभी विभागों के क्षेत्रीय कर्मियों को इस मुहिम को गांव स्तर तक ले जाने के लिए कहा गया है। कृषि विभाग द्वारा गांवों में लोगों को जागरूक करने के लिए चेतना शिविर आयोजित करने के लिए कहा गया है। विभाग द्वारा स्वच्छता समृद्वि कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे। इनमें ग्रामीणों को फसलों के अवशेष जलाने से होने वाली हानियों बारे जानकारी दी जाएगी। ग्राम सभा की बैठक में भी इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर प्रचारित किया जाएगा। 
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भूकंप से बचाव को लेकर होगा कार्यक्रम
डीसी अमित खत्री ने बताया कि 9 अक्तूबर से 13 अक्तूबर तक जिला में भूकंप से बचाव को लेकर चेतना सुरक्षा सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इसमें हिप्पा के प्रशिक्षण देने वाले कर्मियों को विशेष हिदायत दी गई है कि वह अपने जागरूकता के कार्यक्रम में फसलों के अवशेष जलाने से होने वाली हानियों को विशेष रूप से उजागर करे ताकि लोगों में चेताना लाई जा सके।
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पिछले 3 सालों में फसलों के अवशेष जलाने वाले गांवों को किया जाएगा चिह्नित
डीसी अमित खत्री ने बताया कि पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मियों को कहा गया है कि वह जिला के ऐसे गांव जिनमें अधिक मात्रा में फसलों के अवशेष जलाए जाते हैं, उनको सूचीबद्ध किया जाए और उनमें फसल अवशेष जलाने से होने वाली हानियों को लेकर सघन चेतना अभियान चलाया जाएगा। इसी प्रकार औद्योगिक वैस्ट तथा ईंट भ_ों से उतपन्न होने वाले पर्यावरण प्रदूषण पर नियंत्रण रखने के लिए नहर उद्योग तथा खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को कार्य योजना तैयार करने के लिए निर्देश दिए गए है। 
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फसल अवशेषों से तुड़ी बनाने के लिए मशीन व अन्य उपकरणों पर सब्सिडी देने की योजना को लोकप्रिय बनाने 
फसल कटाई के बाद शेष बचने वाले डंठलों से पशुओं के चारे के लिए तुड़ी बनाई जा सकती है। तुड़ी बनाने के लिए जो मशीन या उपकरण उपलब्ध है, उन पर सब सीडि दी जाती है। इस योजना का किसानों में अधिकाधिक प्रचार प्रसार करने के लिए कृषि विभाग के उपनिदेशक को दायित्व सौंपा गया है। डीसी ने बताया कि डंठलों के जलाने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। पर्यावरण संरक्षण के लिए कई विभागों के अधिकारियों को सामूहिक जागरूकता की मुहिम चलाने के लिए निर्देश दिए गए है। 

इस बार धान उत्पादकों की मंडी में बल्ले-बल्ले

1509 किस्म के भाव इस बार 2700 के पार

जींद : मंडी में इस बार धान उत्पादक किसानों के लिए साल 2015 और 2016 के मुकाबले तस्वीर काफी बदली हुई और सुखद है। कारण यह है कि मंडी में किसानों को धान की फसल का पिछले 2 सालों से कहीं ज्यादा भाव मिल रहा है। 
साल 2015 में धान उत्पादक किसानों पर भाव को लेकर बड़ी मार पड़ी थी। उस साल धान की 1509 किस्म का भाव 1400 रूपए प्रति क्विंटल भी नहीं मिल पा रहा था। किसानों के धान की खेती घाटे का सौदा बन गई थी और खुद सरकार को आकर 1400 रूपए प्रति क्विंटल के भाव 1509 किस्म की धान खरीदनी पड़ी थी। पिछले साल भी मंडी में धान की 1509 किस्म 2100 रूपए प्रति क्विंटल तक ही बिक पाई थी। इस साल धान की 1509 किस्म का भाव किसान को बहुत अच्छा मिल रहा है। मंडी में इस साल धान की 1509 किस्म 2700 रूपए प्रति क्विंटल के भाव जींद में बिक रही है जबकि कुछ मंडियों में इस किस्म की धान 2800 से 2900 रूपए प्रति क्विंटल तक भी बिक रही है। इस साल धान की 1509 किस्म की उपज भी पिछले सालों की तुलना में ज्यादा हो रही है और इससे किसान की बल्ले-बल्ले हो रही है। 
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इस बार किसान के लिए धान की 1509 किस्म में फायदा ही फायदा : मनीष गोयल
जींद मार्कीट कमेटी के वाइस चेयरमैन मनीष उर्फ बबलू गोयल का कहना है कि मंडी में धान की 1509 किस्म की आवक शुरू हो गई है। 2700 रूपए प्रति क्विंटल के भाव मंडी में यह धान बिक रही है। पिछले 3 साल में धान की इस किस्म का यह सबसे ज्यादा भाव है। इस साल पैदावार भी पिछले साल से ज्यादा मिल रही है। इसके चलते किसान को धान की इस खेती में फायदा ही फायदा है। 

रंगशाला में डाक्टर आप भी नाटक का मंचन

जींद : एक्टिव थियेटर एंड वैलफेयर सोसायटी द्वारा हरियाणा कला परिषद व हरियाणा संस्कृत अकादमी पंचकूला के तत्वावधान में चल रहे 11 दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाट्य उत्सव के छठे दिन डॉक्टर आप भी नाटक का मंचन रंगकर्मी सतेंद्र सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ। 
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य सलाहकार मैक कुरुक्षेत्र महेश जोशी, प्राचार्य देवा सिंह गोयल, चीफ  मैनेजर पीएनबी बीएम पंवार, डा. रमेश बंसल, डा. सुरेश जैन ने दीप प्रज्जवलित करके किया। नाटक की शुरूआत कलाकार जब मंच पर अपना पहला डॉयलोग बोलता है तभी सभागार में बैठे दर्शक तालियों के साथ स्वागत करते हैं। डाक्टर आप भी नाटक में दिखाया गया है कि कोई भी डाक्टर बुरा दुष्ट या खलनायक नहीं होता है वो सब एक गतीशील प्रभाव में शामिल हो गए हैं। जो उनको और समाज को गर्त में ले जाएगा। जिसके भले के लिए यह पेशा करना है उसका साथ उन्होंने कब का छोड़ दिया है। अब उनके हाथ केवल पैशेंट की जेब टटोल रहे हैं। उसमें रखा पर्स कितना बड़ा है ये देख रहे हैं। दुर्घटनाओं की खबरे हम पढ़ते हैं ना, जानती हो वहां चोर, लुटेरे सबसे पहले पहुंचते हैं और यात्रियों के गले में, कान में, हाथ में, जो होगा उसे छीन लेते हैं वैसी ही हालत इस पेशे की होने से पहले डाक्टर को सावधान होना चाहिए। इस तरह के दमदार डॉयलोग और कलाकारो के बहतरीन अभिनय ने दीवान बाल कृष्ण रंगशाला में राष्ट्रीय नाट्य उत्सव में उपस्थित सभी दर्शकों को करीब डेढ़  घंटे तक मंत्रमुग्ध करके रखा। ऐसी बहतरीन प्रस्तुत मंच पर देख लोग शुरू से लेकर अंत तक बंधे रहे। नाटक डॉक्टर आप भी एक सुप्रसिद्ध मराठी लेखक अजीत दलवी की कृति है। इस नाटक में एक डॉक्टर एक ऐसी महिला का गर्भाश्य निकाल लेती है जिसे बच्चा न होने की समस्या है और इस बात से बेखबर वह महिला सोचती रहती है कि अब मेरा इलाज चल रहा है और वो मां बन सकेगी। अपने बच्चे को जन्म दे सकेगी लेकिन कुछ समय बाद जब उस महिला को पता चलता है कि उसका तो गर्भाश्य ही निकाल लिया गया है तो फिर से उसी डॉक्टर के पास जाती है और अपने गर्भाश्य के बदले उस महिला डॉक्टर का गर्भाष्य मांग लेती है और इस पूरे घटनाक्रम के दौरान उस महिला डॉक्टर का पति डॉक्टर अविनाश उस महिला का साथ देता है और कोर्ट में केस भी लड़ता है। इसके बाद अनेकों संदेश  देता हुआ समाज को झकझोरता हुआ यह नाटक खत्म होता है। नाटक की प्रस्तुति की अगर बात करें तो अपने आप में एक शानदार प्रस्तुति दर्शकों में देखी, बेजोड़ अभिनव से एक-एक कलाकार ने खूब तालियां बटोरी और पहली बार किसी नाटक में हरियाणी लोक संगीत संयोजन भी देखने को मिला जो दर्शकों को लुभा गया। मुख्यअतिथि महेष जोशी ने कहा कि यह संस्था रंगमंच के क्षेत्र में बड़ा काम कर रही है। मंच का संचलान कृष्ण नाटक ने किया। इस मौके पर डीसी विकास, श्री मंगत राम शास्त्री, डा. सुरेश जैन, ओमप्रकाश चौहान, सुभाष श्योराण, प्रवीण परूथी, डा. प्रियदर्शी, प्यारे लाल सिंगला, मनोज कुमार खंडेवाल, प्रवेष त्यागी, प्रवीन दुग्गल, हिमांषु कैप्चर इत्यादि लोग मौजूद रहे। 

सोमनाथ मंशा देवी मंदिर में लगा मेला

कात्यायनी देवी के दर्शन को उमड़ी भीड़
श्रद्धालुओं ने मां कात्यायनी की पूजा कर मांगी मन्नतें

जींद : शारदीय नवरात्र कीछठ पर मंगलवार को सोमनाथ मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवती दुर्गा तथा मां कात्यायनी के दर्शन कर सुखी जीवन की कामना की। छठे नवरात्र पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मध्यरात्रि से ही सोमनाथ मंदिर में जमा होने शुरू हो गए। नवरात्र के छठ के दिन कात्यायनी देवी के दर्शन का विशेष महत्व समझा जाता है। सोमनाथ मंदिर में देवी भगवती के दर्शन के श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। इस मौके पर मंदिर में उमडऩे वाली भीड़ को ध्यान में रखकर  सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए थे। मंदिर प्रबंध समिति ने भीड़ को देखते हुए महिला तथा पुरूषों के लिए मंदिर प्रांगण में बेरीकेटिंग की थी। देवी भगवती के दर्शन के लिए महिलाओं की संख्या अधिक थी। इस दौरान मंदिर की भव्य सजावट की गई। भीड़ को देखते हुए श्रद्धालुओं के प्रवेश व निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था करनी पड़ी। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टिï से पुलिस की चौकसी की गई थी वहीं  मेला कमेटी के सदस्य भी पूरी सतर्कता से जुटे रहे।
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श्रद्धालुओं ने की जमकर खरीददारी
नवरात्र की छठ पर सोमनाथ मंदिर के बाद मेले का आयोजन किया गया। इसमें श्रद्धालुओं ने जमकर खरीददारी की। महिलाओं ने जहां घर के साजो सामान खरीदा वहीं बच्चों ने अपने लिए खिलौने खरीदे। पूरा दिन मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। 
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यहां पर हर मन्नत होती है पूरी
श्री सोमनाथ मंशा देवी मंदिर में जो भी भक्त अपनी मन्नत लेकर जाता है, उसकी मन्नत हमेशा पूरी हुई है। ऐसा हम नहीं कहते बल्कि यहां आने वाले सैकड़ों भक्त कहते हैं। बताते हैं कि यह मंदिर द्वापर काल से यहां पर है। यहां पर श्रीकृष्ण ने पूजा अर्चना की थी और सोम तीर्थ की स्थापना की थी। इस तीर्थ में स्नान करने से अनेक व्याधियां दूर होते थे। चर्चा तो यहां तक है कि कोढ़ी का भी कोढ़ दूर होता था। मंदिर के आस-पास प्राचीन भवन बने हुए हैं। इसके अलावा मंदिर के पास में तालाब आज भी स्थापित है। इस तालाब का काफी महत्व है। एक समय था, जब आस-पास क्षेत्र से लोग यहां पर कपड़े धोने के लिए आते थे लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म होती जा रही है। यहां पर तालाब के चारों ओर दीवार  खींच दी गई है। एक समय ऐसा होता था जब यहां पर न तो कोई दीवार होती थी। यहां से आसपास के लोग चिकनी मिट्टी तालाब से लेकर जाते थे। अब मान्यता है कि यहां पर छठे नवरात्र पर मेला भरता है। यहां पर दूर दराज क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु भाग लेने के लिए आते हैं। मंदिर में प्रत्येक देवी देवता का मंदिर है। मंदिर में प्राचीन मूर्तियां भी है। समय बीतने के साथ ही मंदिर को भक्तों के सहयोग से अच्छा लुक दिया गया है। मंदिर में नवरात्रों के दिनों में भारी भीड़ होती है। 
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कृष्ण ने दिया था पांडवों को उपदेश
माता मंशा देवी के बारे में बताते हैं कि जिस समय पांडव और कौरवों के बीच युद्ध हुआ था। युद्ध से पहले भगवान श्रीकृष्ण ने पांडुओं को उपदेश दिया था कि वे माता मंशा देवी की पूजा कर फिर युद्ध करें। माता मंशा देवी की पूजा करने के बाद युद्ध में तु हें विजयश्री मि

लेगी। भगवान श्रीकृष्ण ने माता मंशा देवी को यही से प्रकट किया था।
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आज जयंती देवी मंदिर में लगेगा मेला
हांसी ब्रांच नहर के पास स्थित जयंती देवी मंदिर में बुधवार को मेला लगेगा। मंदिर की प्रबंधक समिति ने मेले को देखते हुए सभी तैयारियों पूरी कर ली है। मंदिर की प्रबंधक समिति पहले ही बैठक कर पदाधिकारियों की डयूटी लगा चुकी है। श्रद्धालुओं को माता के दर्शन करने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो, इसी को देखते हुए श्रद्धालुओं के आने-जाने के लिए अलग-अलग बैरीकेडिंग की गई है। 

Monday, 25 September 2017

श्रद्धालुओं ने मां कुष्मांडा से मांगी मन्नतें

मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
मां का निरंत सिमरण करना चाहिए : आचार्य पवन 

जींद
नवरात्रे के चौथे दिन रविवार को माता कुष्मांडा की पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी। शहर के प्रसिद्ध मंदिर जयंती देवी मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, सोमनाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, रघुनाथ मंदिर में सुबह से ही भक्त माथा टेकने के लिए पहुंचना शुरू हो गए। पूजा अर्चना के लिए मंदिरों में आए श्रद्धालुओं ने मंदिरों के बाहर सजी दुकानों से बच्चों के लिए खिलौने इत्यादि की खरीददारी भी की। जयंती देवी मंंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि शास्त्रों में ऐसा माना गया है कि यदि मां का यह स्वरूप आविर्भूत नहीं होता तो संपूर्ण संसार अपने ही विषैले पदार्थों से स्वयं ही नष्टï हो जाता। पूरे जगत में चारों ओर विनाश, अंधकार एवं अज्ञानता का बोलबाला होता। मां कुष्मांडा ने ही संसार में पनपी पूरी विषैली ऊर्जा को स्वयं पीकर सृष्टिï की रक्षा की थी। उन्होंने कहा कि नवरात्र के नौ दिन मानव जीवन में विशेष महत्व रखते हैं। इन दिनों में जो भी श्रद्धालु सच्चे दिल से मां भगवती की अराधना करता है मां भगवती उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करती है।  
मां का निरंत सिमरण करना चाहिए : आचार्य पवन
आचार्य पवन शर्मा ने कहा कि मां का भक्त वह जो निरंतर मां का स्मरण करे, जिसके अंत:करण में प्रतिक्षण मां की ही स्मृति बनी रहे, जिसके जीवन का प्रधान लक्ष्य केवल मां हो। आचार्य पवन शर्मा नवरात्र पर्व पर माता वैष्णवी धाम में आयोजित नवार्ण महायज्ञ के दौरान उपस्थित मातृभक्तों को संबोधित कर रहे थे। घनश्याम सिंघल, केके चहल व नीरज मिगलानी एडवोकेट, विनोद भारद्वाज, जितेंद्र कौशिक, डा. अनुपम भाटिया, आरएन खटकड़, प्रमोद सोनी, मदन बतरा, रामफल सैनी, रोहित जिंदल, जसवंत पंवार, मयंक अरोड़ा, राजीव गर्ग ने सपरिवार मां चंद्रघण्टा की पूजा की व महायज्ञ में आहुति दी। आचार्य ने कहा कि मां की स्मृति केवल उसी से ही रहती है जो मां को अपना मानता है। प्रकृति का नियम है कि जिसे हम अपना समझते हैं उसे हम कभी भूलते नहीं हैं, हम उस व्यक्ति या वस्तु को ही भूलते हैं जिसे हम अपना नहीं समझते, जैसे कोई व्यक्ति अपने माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नि आदि परिजनों को नहीं भूलता, तो इसका कारण यही होता है कि वह इनको अपना मानता है। इनका स्मरण करने के लिए पृथक से कोई उपाय नहीं करना पड़ता है। भगवान की स्मृति हमें इसलिए नहीं होती क्योंकि हम उसे अपना नहीं मानते, हम भगवान की दी हुई वस्तुओं को तो अपना मानते हैं लेकिन भगवान को नहीं। कैसी विचित्र बात है कि हमने सब कुछ देने वाले को तो पराया और नश्वर वस्तुओं को अपना मान लिया है। आचार्य ने कहा कि केवल परमात्मा ही नित्य है, शाश्वत है, सनातन है इसलिए वे ही हमारे अपने हो सकते हैं। इस मौके पर राजन चिल्लाना, हरबंस रल्हन, विनोद बतरा, कृष्ण गोपाल माटा, राजबीर तंवर, हरबंस मंगला, देवेंद्र शर्मा, अशोक गुलाटी, विरेन्द्र मेंहदीरत्ता, परमजीत सेठी, वेद टंडन, प्रषांत चौहान भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

रामलीला में कैकेयी और दशरथ संवाद रहा भावुक

संवादों पर जमकर तालियां बजाई दर्शकों ने 

नरवाना

श्रीरामा भारतीय कला केंद्र के तत्वावधान में हुड्डा ग्राउड में आयोजित रामलीला के पांचवे दिन जैन यूनिटी ग्रुप के सभी सदस्यो द्वारा दीप प्रज्वलित तथा रिबन काटकर मंचन का विधिवत शुभारंभ किया गया। आज के प्रसंगो मे मंथरा द्वारा कैकयी को बहकाना, रानी कैकेयी द्वारा कोपभवन में दशरथ से दो वरो का मांगना तथा श्रीराम का वनगमन के लिए तैयार होना प्रमुख रहे। सबसे भावुक दृश्य कैकेयी और दशरथ संवाद था। कैकयी ने अपने दो वरो में भरत के लिए अयोध्या का सिंहासन तथा राम के लिए चौदह वर्ष का वनवास मांग लिया। दशरथ ने नाना प्रकार से उसे समझाने का प्रयास किया परंतु कैकयी की अक्ल पर माया का पर्दा पडा था। उसने दशरथ को उलाहना दिया और अंत मे दशरथ ने यह कहते हुए वर मान लिए कि रघुपति रीत सदा चल आई, प्राण जाये पर वचन ना जाई। एक तरफ दशरथ शोकाकुल थे तो वहीं दूसरी ओर राम ने माता पिता के आदेश को सहर्ष स्वीकार किया और वे वन जाने को तैयार हुए। कैकयी, कौशल्या और सीता की भूमिका में हरीश, श्याम शर्मा व कुलदीप ने दर्शकों के अंतर्मन को छू लिया। रामलीला के प्रवक्ता अचल मित्तल ने बताया कि मीडिया कवरेज से प्रभावित होकर जुलाना से भी कुछ लोग रामलीला देखने आये। रामलीला के मंच पर प्रधान भारत भूषण गर्ग ने सभी मुख्य अतिथियों को सम्मानित किया। इस अवसर पर रमेश गर्ग, सोनू जैन,राजेश जैन, रोशन जैन, विनय जैन, हिमांशु जैन, आदिश जैन, भारत भूषण बंसल व दर्शको का भारी जन सैलाब उपस्थित रहा।

17 सालों से हनुमान का किरदार निभा रहे हैं मनजीत गौरा 

ओल्ड कोर्ट रोड़ पर अपनी दुकानदारी चला रहे 40 वर्षीय मनजीत गौरा पिछले 17 सालों से हनुमान का किरदार निभा रहे हैं। उसके किरदार को देखने के लिए काफी लोग स्पेशल रामलीला पहुंचते हैं। पर्दा खुलने के बाद उनके गगनभेदी नारेबोल सिया पति रामचंद्र की के बाद लोगों को विशेष सकून मिलता है। इतने लंबे समय से किरदार निभाने से उन्हें लगभग डॉयलाग याद हो गए हैं। वह पीछे से किसी के बोलने का इंतजार ही नहीं करते। सभी डायलाग अपने आप बोलते हैं। मनजीत गौरा ने बताया कि अब उन्हें रिहर्सल की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती लेकिन वह रामलीला के दौरान खाने पीने का काफी ध्यान रखते है। मंगलवार को व्रत रखते हैं। मंदिर जाते हैं और हनुमान की प्रार्थना करते हैं। मनजीत गौरा ने बताया कि कई बार तो उन्हें अयोध्या में होने के  स्वप्न आते है। एक प्रश्न के उतर में उन्होंने कहा कि वह तक तक हनुमान का किरदार निभाता रहेगा जब तक उन्हें श्री राम के आदेश होंगे। 




...अब पीएम के लोकसभा क्षेत्र के गोद लिए गांवों में लिंगानुपात को सुधारेंगे सुनील जागलान


फिलहाल राष्ट्रपति द्वारा गोद लिए 100 गांवों में चलाए हैं महिला सशक्तिकरण अभियान
मन की बात कार्यक्रम में पीएम फिर हुए सुनील जागलान के मुरीद
सेल्फी विद डॉटर को लेकर फिर लिया सुनील जागलान का नाम 

जींद 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में रविवार को 36वीं बार राष्ट्र को संबोधित किया। रविवार को मन की बात कार्यक्रम में एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी ने गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील बीबीपुर का जिक्र किया और उनके सेल्फी विद डॉटर अभियान की तारीफ की। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि एक बार उन्होंने हरियाणा के एक सरपंच की सेल्फी विद डॉटर अभियान का जिक्र किया और इसे सबके सामने रखा। उन्होंने जब टूर पर जाने वाले लोगों से कहा था कि आप इनक्रेडिबल इंडिया पर जहां भी जाएं वहां की फोटों लें और भेजें। इसके तुरंत बाद लाखों फोटो आ गए। गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान का नाम एक बार फिर से पीएम की जुबान पर आने से सुनील जागलान के सेल्फी विद डॉटर अभियान को गति मिल गई है। हालांकि वो इसके साथ-साथ कई अभियान चलाए हुए हैं और फिलहाल हरियाणा व उत्तर प्रदेश में महिलाओं के उत्थान को लेकर सरकार के साथ मिल कर महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में सुनील जागलान को पीएम मोदी की तारीफ मिलने से उनके हौंसले उड़ान पर हैं। रविवार को मन की बात कार्यक्रम के तीन साल पूरे हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उनके मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात ने समाज के हर वर्ग को एकजुट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके जरिये देशभर से मिलने वाले सुझावों से शासन में सुधार लाने में मदद मिलती है। मोदी ने कार्यक्रम के 36वें संस्करण में कहा कि मन की बात के लिए उन्हें बहुत ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलती हैं। हमने इस कार्यक्रम के तीन साल पूरे कर लिए हैं। स्वभाविक रूप से मैं सभी का उल्लेख नहीं कर सकता लेकिन इससे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं से हमें सरकार चलाने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि इसने समाज के हर वर्ग को एकजुट करने में सहयोग दिया है। मोदी ने कहा कि मन की बात भारत की ताकत दिखाने का एक प्रभावी तरीका है। उन्हें ई-मेल नरेंद्र मोदी एप फोन और अन्य माध्यमों से जानकारी का खजाना मिलता है। बातों ही बातों में उन्होंने हरियाणा के गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच के सेल्फी विद डॉटर अभियान का जिक्र किया और उनके सेल्फी विद डॉटर अभियान की शुरूआत की। मन की बात कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि एक बार मैंने हरियाणा के एक सरपंच की सेल्फी विद डॉटर अभियान का जिक्र किया और इसे सबके सामने रखा। उन्होंने जब टूर पर जाने वाले लोगों से कहा था कि आप इनक्रेडिबल इंडिया पर जहां भी जाएं वहां की फोटों लें और भेजें। इसके तुरंत बाद लाखों फोटो आ गए। ऐसे में सुनील बीबीपुर के इस अभियान को जो सफलता मिली है उससे बेटियों की महत्ता उजागर हुई है और ऐसे ही कई अभियान सैल्फी के साथ शुरू हुए। उनके इस अभियान से देशभर में बेटियों को बचाने को लेकर मुहिम से शुरू हो गई। गौरतलब है कि 14 जुलाई 2012 को गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान ने अपने कार्यकाल के दौरान खाप पंचायतों को इक_ा कर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की जो मुहिम चलाई थी वह लिंगानुपात सुधार को लेकर अपने आप में पूरे देश में एक पहला प्रयास था। इस खाप पंचायत की विशेष बात यह थी कि पहली बार महिलाओं ने मंच पर आकर अपने मन की बात खुल कर कही थी और सुनील जागलान की यह मुहिम पूरे प्रदेश में होते हुई देश के कोने-कोने तक पहुंच गई थी। उनकी इस मुहिम के लिए भारत सरकार द्वारा सुनील जागलान को दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। 

क्या कहना है सुनील जागलान का 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में गांव बीबीपुर के पूर्व सरपंच सुनील जागलान का जिक्र होने पर सुनील जागलान ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पांचवीं बार मन की बात कार्यक्रम में उनके कार्यक्रम को लेकर चर्चा की है। इससे उनका हौंसला और बढ़ जाता है। क्योंकि अंतररराष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री जिस अभियान को ले जाना चाहते हैं वह उस अभियान से जुड़ हुए हैं और प्रधानमंत्री की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। उन्होंने कहा कि वो जल्द ही प्रधानमंत्री के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में उन दो गांवों मेें महिला सशक्तिकरण पर कार्य करेंगे जो दो गांव प्रधानमंत्री ने गोद लिए हुए हैं वो गांव हैं जयापुर व नागेपुर और वे लिंगानुपात मामले में इन दोनों गांवों को देश में आदर्श गांव बनाएंगे। वहीं उन्होंने कहा कि वे फिलहाल राष्ट्रपति द्वारा बीबीपुर मॉडल बनाए जाने वाले जो 100 गांव गोद लिए हुए हैं उनमें वे महिला सशक्तिकरण अभियान चलाए हुए हैं। 

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...