Sunday, 3 December 2017

जींद में मुद्रा योजना का अब तक 3686 ने लिया लाभ

सर्विस और उत्पादन क्षेत्र को 37.39 करोड़ रूपए का ऋण
जींद : निजी क्षेत्र में रोजगार सृजन और इसमें भी सर्विस सैक्टर तथा मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई मुद्रा योजना जींद में ठीक-ठाक कदम आगे बढ़ा रही है। इस योजना का अब तक जींद में 3686 लोगों ने लाभ उठाया है। इन लोगों को विभिन्न बैंकों ने सर्विस और मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर के लिए 37.39 करोड़ रूपए का ऋण दिया है। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो मुद्रा योजना शुरू की है, उसकी हरियाणा में प्रगति ज्यादा अच्छी नहीं है। पिछले दिनों प्रदेश सरकार ने मुद्रा योजना को लेकर केंद्र सरकार को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें कहा गया है कि मुद्रा योजना को बैंकों के रवैये ने पलीता लगाया है और यह योजना ज्यादा सफल नहीं हो पाई है। भले ही पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री की मुद्रा योजना को लेकर रिपोर्ट अच्छी नहीं हो लेकिन जींद में यह योजना ठीक-ठाक कदम आगे बढ़ाती नजर आ रही है। 
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अब तक 3686 लोगों को 37.39 करोड़ के ऋण
मुद्रा योजना के तहत जींद जिले में चालू वित्तीय वर्ष की पहली छमाही में सितम्बर के अंत तक 37.39 करोड़ रूपए के ऋण 3686 लोगों को जारी किए गए हैं। सर्विस और मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर के लिए योजना के तहत यह ऋण दिए गए हैं। इसमें भी शिशु योजना के तहत 2733 लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई गई है। योजना में शिशु पर ही ज्यादा जोर देते हुए कुल आर्थिक मदद का 60 प्रतिशत दिए जाने का प्रावधान किया गया है। शिशु योजना में 50 हजार रूपए तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। मुद्रा योजना में किशोर योजना के तहत 50 हजार से 5 लाख रूपए तक का लोन दिया जाता है। जींद जिले में किशोर के तहत 759 लोगों को आर्थिक सहायता दी गई है। तरूण में 194 लोगों को आर्थिक मदद दी गई है। योजना में यह प्रावधान किया गया है कि तरूण के तहत 5 लाख से 10 लाख रूपए तक का लोन सर्विस सैक्टर और मैन्यूफैक्चरिंग सैंटर में दिया जाए। 
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क्या कहते हैं लीड बैंक मैनेजर
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की जींद में प्रगति को लेकर लीड बैंक मैनेजर एमके झा का कहना है कि जींद जिले में मुद्रा योजना को बैंक काफी बढ़ावा दे रहे हैं। चालू वित्तीय वर्ष में सितम्बर महीने के अंत तक मुद्रा योजना के तहत शिशु, किशोर और तरूण कैटेगरी में 3686 लोगों को 37.39 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद दी जा चुकी है। इससे रोजगार और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है। 

जींद में बढ़ रही एड्स के मरीजों की संख्या

3 साल में 426 मरीज आए सामने
इनमें 40 गर्भवती महिलाएं भी शामिल
जींद : जींद जिले में एड्स के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 3 साल की बात की जाए तो 426 मरीज सामने आए हैं। इनमें 40 गर्भवती महिलाएं भी एड्स से ग्रस्त मिली हैं। हालांकि हरियाणा एड्स कंट्रोल सोसायटी और स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा एडस के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाते हैं। फिर भी एडस का ग्राफ कम होने की बजाय एक शतक से पार हर साल पहुंच रहा है। 
जींद में स्वास्थ्य विभाग और एडस कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारियों पर एडस को रोकने की जिम्मेदारी है। विभाग द्वारा प्रचार और जागरूकता के नाम पर लाखों रूपए खर्च किए जा रहे हैं। विभाग के लाखों प्रयास के बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। पिछले 3 सालों के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले में 426 लोग एडस से ग्रस्त मिले। साल 2014 में 150 लोग एडस से ग्रस्त मिले। इनमें 79 पुरूष और 61 महिलाएं शामिल थी। इस साल स्वास्थ्य विभाग द्वारा 7881 महिलाओं और पुरूषों की जांच की गई थी। इसके अलावा 6554 गर्भवती महिलाओं की जांच के बाद 10 गर्भवती महिलाएं एडस से ग्रस्त मिली। साल 2015 में एडस से ग्रस्त लोगों की संख्या 137 रही। इस साल 92 पुरूष और 35 महिलाओं को एडस से पीडि़त होने की पुष्टि हुई। इस साल जांच के दौरान 10 गर्भवती महिलाएं एडस से ग्रस्त मिली। स्वास्थ्य विभाग द्वारा साल 2015 में 8969 मरीजों की जांच की गई। इसके अलावा 7190 गर्भवती महिलाओं की जांच स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई। साल 2016 में एडस पीडि़त मरीजों की संख्या 139 रही। इस साल गर्भवती महिलाओं की संख्या 20 रही। विभाग की ओर से 7847 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इसके अलावा 71 पुरूषों और 48 महिलाओं को एडस की पुष्टि हुई। 
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एक साल में 100 से ज्यादा मरीजों ने बढ़ाई चिंता
स्वास्थ्य विभाग द्वारा एडस की बीमारी के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाते हैं। सबसे ज्यादा कैंप सार्वजनिक स्थलों पर लगाए जाते हैं। हरियाणा एडस कंट्रोल सोसायटी के कर्मचारी और काउंसलर खुद फील्ड में जाकर कैंप लगाते हैं और लोगों को एडस से बचाव के बारे में जागरूक करते हैं। लाख प्रयासों के बाद भी जींद में एडस पीडि़तों की संख्या हर साल 100 से अधिक सामने आ रही है। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के अनुसार सबसे ज्यादा एडस चालकों को मिली है। 
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ड्राइवरों के सबसे ज्यादा पाजीटिव केस
एच.आई.वी. पाजीटिव पुरुषों के मामलों में सबसे ज्यादा तादाद ड्राइवरों की है। सूत्रों के अनुसार पुरुषों में करीबन 60 प्रतिशत तक ड्राइवर पाजीटिव मिले हैं। ये लोग असुरक्षित यौन संबंधों के चलते इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ रहे हैं। जिले में एच.आई.वी. के फैलाव का बड़ा कारण इसे ही माना जाता है। 
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पर्याप्त संतुलित आहार और नशे से दूरी बढ़ा सकती है लाइफ
चिकित्सकों के अनुसार एच.आई.वी. की रिपोर्ट पाजीटिव आने पर पीडि़त को रोहतक मैडीकल कालेज स्थित ए.आर.टी. सैंटर में रैफर कर दिया जाता है। वहां पर उसके कुछ और टैस्ट किए जाते हैं। इसके बाद उसका उपचार शुरू कर दिया जाता है। एड्स एक लाइलाज बीमारी है। अभी तक इस बीमारी का कोई स्थायी उपचार नहीं है। पीडि़त रेगूलर दवाइयां लेता रहे तो उसको काफी आराम मिलता है। इसके साथ ही नशे से दूर रहकर तथा पर्याप्त संतुलित आहार लेने से पीडि़त एच.आई.वी. वायरस से लड़ कर अपने जीवन की डोर को काफी लंबा रख सकता है।
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एच.आई.वी. को रोकने के लिए विभाग करता है हर संभव प्रयास : डॉ. दहिया
इस बारे में जब सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया से बात की गई तो उन्होंने कहा कि एचआईवी को रोकने के लिए विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। लोगों को जागरूक करने के लिए कैंप लगाए जाते हैं। कैंपों में लोगों को एचआईवी से बचाव के बारे में जानकारी दी जाती है। डॉ. दहिया ने कहा कि लोगों को भी जागरूक होने की जरूरत है। जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक एडस ग्रस्त लोगों की संख्या कम होना मुश्किल है।

...और बाजारों में अतिक्रमण को लेकर बनाई लक्ष्मण रेखा

मेन बाजार में नप ने अतिक्रमण रोकने को बनाई पीले रंग की पट्टी
इससे आगे सामान रखा तो दुकानदारों की खैर नहीं
जींद  : शहर के मेन बाजार और दूसरे बाजारों में अतिक्रमण को लेकर रविवार को नगर परिषद प्रशासन ने सड़कों पर पीले रंग की लक्ष्मण रेखा खींचने का काम शुरू कर दिया। अब इस पीले रंग की लक्ष्मण रेखा को दुकानदारों ने सामान रखने को लेकर पार किया तो उनकी खैर नहीं। 
पिछले कुछ समय से नगर परिषद प्रशासन ने शहर में अतिक्रमण के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया हुआ है। इस अभियान के तहत नप प्रशासन मेन बाजार, तांगा चौक, झांझ गेट, गोहाना रोड पर दुकानदारों के अतिक्रमण को हटा चुका है। पिछले दिनों नप के कार्यकारी अधिकारी डा. सुरेश कुमार चौहान और व्यापार मंडल प्रतिनिधियों के बीच अतिक्रमण को लेकर बैठक हुई थी। इस बैठक में खुद व्यापारियों के प्रतिनिधियों ने यह कहा था कि अतिक्रमण रोकने के लिए बाजारों में सड़कों पर दोनों तरफ पीले रंग की पट्टी बना दी जाएं। पीले रंग की इन पट्टियों के आगे कोई भी दुकानदार अपना सामान नहीं रखेगा। व्यापारियों के इस सुझाव पर रविवार से नगर परिषद प्रशासन ने अमल शुरू करते हुए शहर के मेन बाजार की सड़क पर दोनों तरफ पीले रंग की पट्टी बनाना शुरू कर दिया। यह काम नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डा. एसके चौहान के निर्देश पर शुरू किया गया है। इसके तहत पूरे बाजार की सड़क के दोनों तरफ पीले रंग की पट्टी बना दी गई हैं। पीले रंग की यह पट्टियां अतिक्रमण के मामले में दुकानदारों के लिए लक्ष्मण रेखा का काम करेंगी। 
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कई बार चलाया अभियान, नगर परिषद अमला के जाते ही वापस रख लेते हैं दुकानदार सामान
पिछले कुछ समय से नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण को हटाने के लिए बड़ा अभियान छेड़ा हुआ है। इसके तहत जब भी नगर परिषद प्रशासन का अमला दुकानों के आगे से अतिक्रमण हटाने के लिए आते थे, तो सभी दुकानदार अपनी दुकानों के आगे रखे सामान को हटा लेते थे और उनके जाने के बाद वापस रख लेते थे। इससे नगर परिषद की कार्रवाई के दौरान दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल बन जाता था। इसके समाधान के लिए पिछले सप्ताह नगर परिषद और व्यापारियों ने बैठक की और बाजार में दुकानों के आगे पीली पट्टी लक्ष्मण रेखा के रूप में खींचने का निर्णय लिया गया था। 
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लक्ष्मण रेखा से पार रखा सामान तो खैर नहीं : चौहान
नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी डा. एसके चौहान ने कहा कि पिछले सप्ताह व्यापारियों ने बैठक में मुद्दा उठाया था कि नप अधिकारी जब भी बाजार में अतिक्रमण हटवाने के लिए आते हैं, तो अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। इसके चलते ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे दुकानदारों को भी सुविधा हो। इसके बाद कार्यकारी अधिकारी ने फैसला लेते हुए कहा था कि अतिक्रमण को रोकने के लिए बाजार की दुकानों के आगे पीली पट्टी बनाई जाएगी। अगर किसी दुकानदार ने पीली पट्टी से आगे सामान रखा तो उसका सामान तो जब्त किया ही जाएगा साथ ही उसका चालान भी किया जाएगा। 

दूसरी बार वापस जाने की तैयारी में सफेद मक्खी का मुआवजा

5 करोड़ 68 लाख की राशि से वितरण हो पाया महज 35 प्रतिशत 
21 हजार 850 किसान हुए थे प्रभावित, सामने आए 3700 किसान 
जींद : सफेद मक्खी के कारण वर्ष 2015 में खराब हुई नरमा फसल की मुआवजा राशि एक बार फिर राजस्व विभाग के पास पहुंचे लगभग 7 माह हो चुके हैं। बावजूद इसके पौने 4 करोड़ की राशि का वितरण अभी तक नहीं हो पाया है। पूर्व में सफेद मक्खी के कारण फसल खराब होने पर सरकार ने 144 करोड़ की सहायता राशि भेजी थी। इसमें से 127 करोड़ का वितरण हो गया था। दावेदारों के सामने नहीं आने तथा औपचारिकता पूरी नहीं होने के कारण 17 करोड़ की राशि वापस चली गई थी। बाद में कुछ किसानों ने औपचारिकताएं पूरी कर मुआवजा राशि की मांग की तो सरकार ने 5 करोड़ 68 लाख 78 हजार रूपए राजस्व विभाग को किसानों में वितरण के लिए भेज दिए हैं। भेजी गई मुआवजा राशि में से 3 करोड़ 71 लाख रूपए की राशि पर वापस होने का खतरा मंडराने लगा है। दोबारा आई मुआवजा राशि को 21 हजार 850 किसानों में बांटा जाना था जबकि मुआवजा राशि का 35 प्रतिशत ही प्रयोग हो पाया। 3700 किसानों ने सहायता ली जबकि 18150 किसान अभी भी मुआवजा राशि लेने नहीं आए।  अलेवा में शतप्रतिशत राशि का भुगतान हो चुका है लेकिन उचाना ब्लाक में अभी तक मुआवजा राशि लेने के लिए कोई भी किसान आगे नहीं आया है। हैरानी कि बात यह है कि मुआवजा राशि राजस्व विभाग के पास आ चुकी है, लेकिन मुआवजा राशि को लेने वाले किसान आगे नहीं आ रहे हैं। 
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जींद ब्लाक में हुआ 95 प्रतिशत राशि का भुगतान
जींद ब्लाक में सफेद मक्खी के कारण हुए नुकसान का 8 लाख 53 हजार 192 रूपए की मुआवजा राशि मिली। जिसमें से 8 लाख 12 हजार 158 रूपए का वितरण किया गया। सफेद मक्खी के कारण 266 किसान प्रभावित हुए जिसमें से 263 किसान मुआवजा राशि ले चुके हैं। जबकि 3 किसानों के 41 हजार 34 रूपए अभी तक कोई भी दावेदार किसान आगे नहीं आया है। 
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जुलाना ब्लाक में 2281 किसान हुए प्रभावित 668 में बंटा अब तक मुआवजा
जुलाना ब्लाक में सफेद मक्खी के कारण हुए नुकसान का 38 लाख 52 हजार 799 रूपए की मुआवजा राशि मिली। जिसमें से 35 लाख 98 हजार 773 रूपए का वितरण किया गया। सफेद मक्खी के कारण 2281 किसान प्रभावित हुए जिसमें से 648 किसान मुआवजा राशि ले चुके हैं। जबकि 1633 किसानों के 2 लाख 54 हजार रूपए अभी भी बकाया है। 
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अलेवा ब्लाक में बंटा शत प्रतिशत मुआवजा राशि
अलेवा ब्लाक में सफेद मक्खी के कारण हुए नुकसान का 3 लाख 95 हजार 599 रूपए की मुआवजा राशि मिली। जिसमें पूरी राशि का वितरण कर दिया गया। सफेद मक्खी के कारण 109 किसान प्रभावित हुए जिसमें से 109 किसान मुआवजा राशि ले चुके हैं। अलेवा ब्लाक में सफेद मक्खी से हुए नुक्सान का मुआवजा शत प्रतिशत बंट चुका है। 
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नरवाना ब्लाक में 17769 किसान हुए प्रभावित 2680 में बंटा अब तक मुआवजा
नरवाना ब्लाक में सफेद मक्खी के कारण हुए नुकसान का 4 करोड 33 लाख 15 हजार 426 रूपए की मुआवजा राशि मिली। जिसमें से 1 करोड़ 49 लाख 49 हजार 640 रूपए का वितरण किया गया। सफेद मक्खी के कारण 17769 किसान प्रभावित हुए जिसमें से 2680 किसान मुआवजा राशि ले चुके हैं। जबकि 15089 किसानों के 2करोड़ 83 लाख 65 हजार 786 रूपए अभी भी बकाया है। 
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उचाना ब्लाक में अभी तक नहीं दोबारा से आई मुआवजा राशि का वितरण 
उचाना ब्लाक में सफेद मक्खी के कारण हुए नुकसान का 84 लाख 61 हजार 338 रूपए की मुआवजा राशि मिली। जिसमें से अभी तक किसानों को कोई सहायता राशि नहीं मिली है। सफेद मक्खी के कारण 1425 किसान प्रभावित हुए थे। राशि राजस्व विभाग के पास पहुंची हुई है। बावजूद राशि को लेने के लिए किसान आगे नहीं आ रहे हैं।  
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किसानों की मांग पर आई थी मुआवजा राशि
जिला राजस्व अधिकारी रामफल कटारिया ने बताया कि किसानों की मांग पर अतिरिक्त मुआवजा राशि विभाग को मिली थी। राशि को 7 माह का समय बीतने जा रहा है। बावजूद इसके किसान मुआवजा राशि लेने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं, या फिर वे औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पा रहे हैं, या फिर यह भी हो सकता है कि जमीन के हिस्सेदार ज्यादा हों और अनुपात रूप में उन्हें कम राशि मिल रहे हो। लगभग पौने 4 करोड़ रूपए की राशि बची हुई है। दिसम्बर के बाद राशि को वापस भेज दिया जाएगा। 

वाहनों में मौत के सरिए

कड़े कानून के बावजूद नहीं आ रहे बाज
इस साल अब तक ऐसे 29 वाहनों के काटे चालान
जींद : ट्रक, ट्राला और टै्रक्टर-ट्राली जैसे वाहनों की बाडी के बाहर मौत के सरिए झांक रहे हैं। कड़े कानून के बावजूद सरियों को वाहन की बाडी के बाहर निकालने से लोग बाज नहीं आ रहे। ऐसे मौत के सरियों से कभी भी किसी की जान जा सकती है। 
भवन निर्माण के काम में आने वाले सरियों को ट्रक, ट्राला और टै्रक्टर-ट्राली जैसे वाहनों में लोड किया जाता है। पहले सरिए बनाने वाली फैक्टरी से सरिए वाहनों में लोड होकर इनके डिस्ट्रीब्यूटर तक पहुंचते हैं। डिस्ट्रीब्यूटर से यह सरिए आगे फुटकर विक्रेताओं और फिर ग्राहक तक इसी तरह के वाहनों में लोड होकर जाते हैं। नियम यह है कि किसी भी वाहन में सरिए इस तरह से लोड नहीं हो सकते, जिससे वह वाहन की बाडी से बाहर निकलें। वाहन की बाडी से बाहर सरिए निकाल कर वाहन को सड़क पर चलाना गैर-कानूनी है। लोहे के यह सरिए जब वाहन की बाडी से बाहर निकले होते हैं तो इनकी जगह सीधे-सीधे मौत वाहन से बाहर झांक रही होती है। जींद में भी ट्रक, ट्राला और टै्रक्टर-ट्राली जैसे वाहनों से लेकर रेहड़ी और रिक्शा आदि में भी बेहद खतरनाक तरीके से लोहे के सरियों को ढोते हुए कभी भी और कहीं भी देखा जा सकता है। यह सीधे-सीधे सड़क पर मौत का सामान होते हैं और ऐसे वाहन के पीछे आ रहे दुपहिया वाहन सवार की जान जाने से लेकर उसके गंभीर रूप से घायल होने का खतरा बना रहता है। बड़े वाहन के पीछे फिर भी लटक रहे सरियों के साथ खतरे के संकेत के रूप में लाल कपड़ा बांध दिया जाता है लेकिन छोटे वाहनों के बाहर झांक रहे सरियों के मामले में ऐसा भी नहीं किया जाता। कई बार अंधेरे में दुपहिया वाहन सवार या कार और दूसरे वाहन के चालक को कई फुट बाहर निकले लोहे के सरिए नजर नहीं आते और ऐसे वाहन से टकराकर बड़ा हादसा हो जाता है। 
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लोडिंग पर ही रोक लेकि न बिना रोक-टोक हो  रही लोडिंग
वाहनों की बाडी से बाहर निकले सरिए लोड करने पर पूर्ण रोक है। मोटर वाहन एक्ट में साफ प्रावधान है कि किसी भी वाहन में इस तरह से लोहे के सरिए लोड नहीं किए जा सकते, जिसमें सरिए वाहन से बाहर निकले हों। इस एक्ट के बावजूद छोटे से लेकर बड़े तक सभी वाहनों में बेहद खतरनाक तरीके से बाहर निकले लोहे के सरिए लोड किए जा रहे हैं। इस पर किसी तरह की रोक नहीं लग पा रही। धुंध के समय अगर ऐसा वाहन सड़क पर खड़ा हो और पीछे से दूसरा वाहन उससे टकरा जाए तो इसमें कई लोगों की जान जाना निश्चित है। 
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अब तक 29 वाहनों के काटे चालान
ऐसा नहीं है कि जींद में आरटीए सचिव कार्यालय की नजर वाहन से मौत के रूप में बाहर झांक रहे लोहे के सरियों की तरफ नहीं गई हो। आरटीए सचिव कार्यालय की चैकिंग टीम जब चैकिंग पर निकलती है तो खतरनाक तरीके से वाहन से बाहर निकले सरिए दिखाई देने पर वाहन चालक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। जींद के सहायक आरटीए सचिव ओपी मोर का कहना है कि जींद जिले में इस साल अब तक ऐसे 29 वाहनों के चालान कर उन पर भारी जुर्माना किया गया है, जिनमें सरिए लदे हुए थे और सरिए मौत के रूप में बाहर झांक रहे थे। मोर के अनुसार वाहनों की चैकिंग के समय सरिए लदे वाहनों पर खास नजर रखी जाती है। विभाग का प्रयास यह है कि इस पर पूर्ण रोक लगाई जाए। 
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सरिए लोड करने के वाहन ही नहीं 
कायदे से लोहे के सरिए लोड करने के लिए बंद बाडी के विशेष वाहन होने चाहिएं। इनमें सरिया इस तरह बंद होना चाहिए कि वह आधा फुट भी बाडी से बाहर नहीं निकल पाए। जींद में ऐसे वाहन ही नहीं हैं। इसके चलते टै्रक्टर-ट्राली से लेकर रेहड़ी और रिक्षा तथा ट्रक आदि में सरिए लोड किए जाते हैं। इसमें सरिए वाहन की बाडी से कई बार तो 10 फुट तक बाहर निकले होते हैं और वह सड़क को टच करते हुए जाते हैं। ऐसे वाहन सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों के लिए बेहद खतरनाक हैं। 

जींद में वर-वधू की माला की बात तो दूर, बैंकों में भी नहीं 200 के नोट

10, 20 और 50 के नोटों की मालाओं की शादियों में डिमांड
जींद : जींद में हो रही शादियों में वर-वधू को 200 के नोटों की मालाओं के दीदार नहीं हो पा रहे। वर-वधू को शादी में 200 के नोटों की माला तो बहुत दूर की बात है, जींद में बैंकों के पास आज तक 200 के नोट की सप्लाई नहीं आई है। शादियों के इस सीजन में जींद में 10, 20 और 50 के नोटों की मालाओं की ही डिमांड है और यह डिमांड नोटों की माला बनाने वाले कुछ अतिरिक्त पैसा लेकर पूरी कर रहे हैं। 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले साल की गई नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने 200 रूपए का नया नोट पिछले दिनों जारी किया है। गुडग़ांव, अंबाला, पानीपत, सोनीपत, करनाल जैसे शहरों में ही अभी तक 200 के नोट की सप्लाई बैंकों में हो रही है। जींद के बैंकों में अभी तक 200 के नोट पहुंचे ही नहीं हैं। ऐसे में जींद में वर-वधू 200 के नोटों की मालाओं के लिए तरस गए हैं। उन्हें 200 के नोटों की मालाओं के दीदार नहीं हो रहे। इन नोटों के दीदार के लिए जींद के वर-वधू ही नहीं, बल्कि आम लोग भी खासे बेकरार हैं और उनकी यह बेकरारी अभी दूर होने की कोई संभावना भी नहीं लग रही। 200 के नोट को लेकर जींद में पंजाब नैशनल बैंक की मेन ब्रांच के चीफ मैनेजर बीएम पंवार का कहना है कि अभी तक जींद के किसी भी सरकारी या गैर-सरकारी बैंक में 200 के नोट नहीं पहुंचे हैं। मालाओं की बात तो दूर, जींद में बैंकों में भी 200 के नोट नहीं हैं। 
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10, 20 और 50 के नोटों की मालाएं सज रही वर-वधू के गले में 
इस समय चल रहे शादियों के सीजन में जींद में वर-वधू के गले में 10, 20 और 50 रूपए के नोटों की मालाएं ही सज रही हैं। इनमें भी 10 रूपए के नोटों वाली एक हजार रूपए की माला 1300 रूपए में मिल रही है। 20 रूपए के नोटों वाली एक हजार रूपए की माला 1100 रूपए में मिल रही है तो 50 रूपए के नोटों वाली एक हजार रूपए की माला 1500 रूपए में भी मुश्किल से मिल पाती है। दरअसल 50 रूपए के नए नोट बैंकों से मिल ही नहीं रहे। दिल्ली आदि शहरों से 50 रूपए के नए नोटों का जुगाड़ नोटों की माला बनाने वाले कर रहे हैं। 
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नोटों की मालाओं में पिन का हो रहा इस्तेमाल
रिजर्व बैंक आफ इंडिया भले ही नोटों में पिन का इस्तेमाल करने पर पूर्ण रोक लगा चुका हो लेकिन वर-वधू के गले में डाली जा रही नोटों की मालाओं को नोटों में पिन लगाकर ही बनाया जा रहा है। इस पर किसी तरह की कोई रोक नहीं लग पा रही है। 
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इंडियन करैंसी का हो रहा सरेआम अपमान
कायदे से नोटों को माला बनाकर बेचा नहीं जा सकता। यह इंडियन करैंसी के अपमान की श्रेणी में आता है। ऐसा करने वालों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है लेकिन अब तक नोटों की मालाएं बेचने वालों पर जींद में कार्रवाई नहीं हुई है। शहर में पटियाला चौक नोटों की मालाओं का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। पटियाला चौक पर एक दर्जन से ज्यादा दुकानों पर नोटों की मालाएं बाहर सुबह ही टांग दी जाती हैं। इसके अलावा झांझ गेट, मेन बाजार, बस अड्डे के सामने भी कुछ दुकानदार इंडियन करैंसी का अपमान करते हुए नोटों की मालाएं बेच रहे हैं। इसमें वह मोटा मुनाफा भी कमा रहे हैं। 
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क्या कहते हैं लीड बैंक मैनेजर
इंडियन करैंसी का नोटों की मालाएं बनाकर और बेचकर जींद में सरेआम अपमान किए जाने को लेकर जब जींद में लीड बैंक मैनेजर एमके झा से बात की गई तो उनका कहना था कि इस मामले में कार्रवाई करना प्रशासनिक अधिकारियों का कार्यक्षेत्र है। वह लीड बैंक मैनेजर होने के नाते प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में यह मामला लाकर नोटों की माला बनाकर बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अनुरोध करेंगे। 

Thursday, 30 November 2017

वृंदावन से आए कलाकारों ने मोहा मन

गीता महोत्सव को देखने के लिए उमड़ी लोगों की भीड़
स्कूली बच्चों ने प्रस्तुत किए रंगारंग कार्यक्रम 
जींद 
गीता जयंती समारोह के दूसरे दिन सफीदों के विधायक जसबीर देशवाल ने कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में शिरकत की। उन्हें बीन बांसूरी के मधुर संगीत के बीच समारोह स्थल तक ले जाया गया। इसके बाद उन्होंने समारोह स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी स्टालों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने समारोह स्थल पर बनाये गए प्राचीनकालीन दंगल में कुश्ती कर रहे पहलवानों से परिचय लिया और कुश्ती देखी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के स्टाल पर लगाये गये बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के तहत लगाये गये बैनर पर हस्ताक्षर कर अभियान को गति प्रदान की। विधायक जसबीर देशवाल ने समारोह स्थल पर बने अस्थाई जींद धरोहरशाला का भी अवलोकन किया। 
उन्होंने यहां जींद रियासत के राजाओं के चित्र, उनके समय के दौरान प्रयोग होने वाले स्टाम्प पेपर, राजाओं द्वारा लिये गये निजी पत्रों, राजाओं के सरकारी रिकार्ड को भी देखा। उन्होंने धरोहरशाला में रखी प्राचीन कालीन वस्तुओं का भी अवलोकन किया। धरोहरशाला के एक प्रतिनिधि ने विधायक को बताया कि यहां 4०० से 5०० साल पुरानी वस्तुओं को संजोया गया है। वहां मौजूद पर्यटकों ने इन पुरानी वस्तुओं के साथ विधायक जसबीर देशवाल के साथ सैल्फि भी ली। इस दौरान उन्होंने एक स्टाल पर बनी मशरूम की जलेबियों तथा पकोडिय़ों का भी आनंद भी लिया। इसके उपरान्त मुख्य अतिथि को घासफूस से बने अतिथि गृह में ले जाकर जलपान करवाया गया। उन्होंने कहा कि यहां आकर लगता है कि हम प्रकृति की गोद में आ गये है और वह हमें धीरे-धीरे प्यार से सहला रही है। इसके बाद विधायक जसबीर देशवाल ने विजिटर बुक में हस्ताक्षर कर गीता जयन्ती समारोह पर टिप्पणी करते हुए इसे लाजवाब करार दिया। इस दौरान उनके साथ नगराधीश सत्यवान सिंह मान, जिला परिषद के सीईओ मंदीप कुमार व अन्य अधिकारीगण साथ रहे। 
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन 
गीता जयंती समारोह के दूसरे दिन भी स्थानीय बाल कृष्ण रंगशाला में शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में स्वामी आर्यवेश ने बतौर मुख्यअतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने दीप प्रवल्लिजत कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर नगराधीश सत्यवान सिंह मान, जिला परिषद के सीईओ मंदीप कुमार, जिला रैडक्रॉस सोसायटी के सचिव राजकपूर सूरा समेत कई प्रशासनिक अधिकारी एवं मौजिज व्यक्ति मौजूद थे। सांस्कृतिक समारोह को सम्बोधित करते हुए स्वामी आर्यवेश ने कहा कि श्रीमद् भगवत गीता जीवन का मुल है। मानव को गीता में दिए संदेशों के अनुरूप ही जीवन बिताना चाहिए, जो व्यक्ति गीता के अनुरूप जीवन बिताता है उसे न केवल जीवन में बल्कि जीवन के बाद भी किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं होता। उन्होंने कहा कि गीता एक ऐसा पवित्र ग्रंथ है जिसमें सभी समस्याओं का समाधान छूपा हुआ है। इसलिए व्यक्ति को अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के लिए इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं है। उसे समस्या के समाधान के लिए गीता का पाठ पढऩा चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गीता हमें सदकर्म करने की प्रेरणा देती है। इसलिए जीवनभर सदकर्म करते हुए समाज को आगे ले जाने के प्रयास करने चाहिए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दे रहे कलाकारों की प्रशंसा करते हुए स्वामी आर्यवेश ने कहा कि कलाकारों द्वारा एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि सभी प्रस्तुतियां भगवान श्रीकृष्ण की जीवन लीलाओं एवं उनके जीवन से प्रेरित रही। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति जो देखता है, सुनता है एवं बोलता है वह उसी प्रकार से संस्कारित होता चला जाता है। आज बच्चों की प्रस्तुतियां देखकर लगा कि बच्चों के अन्दर का मानव पूरी तरह से कृष्णमय हो चुका है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से गीता जयन्ती मनाने का औचित्य सही साबित हो रहा है, क्योंकि हजारों की संख्या में लोग यहां आकर गीता ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम में कलाकारों एवं स्कूली बच्चों द्वारा एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। सभी प्रस्तुतियां शानदार रही। लगभग सभी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भगवान श्री कृष्ण की जीवन लीलाओं एवं एवं उनके जीवन पर आधारित रही। सभी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोहा। 

गीता जीवन जीने की कला है : जसबीर देशवाल 

गीता नि:स्वार्थ भाव से कर्म करने का संदेश देती है : स्वामी आर्यवेश


गीता जयंती महोत्सव के दूसरे दिन बुधवार को स्थानीय डीआरडीए के सभागार में पवित्र ग्रंथ गीता का मानव जीवन में महत्व विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सफीदों के विधायक जसबीर देशवाल ने बतौर मुख्यअतिथि के रूप में शिरकत करते हुए सेमिनार का विधिवत रूप से उद्घाटन किया। विधायक जसबीर देशवाल ने सेमिनार को संबोधित करते हुए कहा कि गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि गीता जीवन जीने की कलां है। आने वाली पीढिय़ो को गीता ज्ञान उपलब्ध करवाने के लिए सरकार द्वारा गीता के कुछ श्लोकों को पाठयक्रम में भी शामिल करवाया गया है। उन्होंने कहा कि गीता ज्ञान का भण्डार है। हर व्यक्ति को गीता का ज्ञान प्राप्त करना चाहिए। सेमिनार में पवित्र ग्रंथ गीता की विस्तृत जानकारी रखने वाले प्रबुद्ध व्यक्ताओं ने गीता के सम्बन्ध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान हर चीज का आधार होता है। कर्म योग ज्ञान का साकार रूप है। गीता ज्ञान का भंडार है।  सदकर्म करने के लिए गीता ज्ञान को प्राप्त करना होगा। कर्म को बदलने के लिए ज्ञान को बदलना होता है, ज्ञाान से ही कर्म बनता है। उन्होंने कहा कि आज गीता का ज्ञान घर-घर पंहुच रहा है। सरकार द्वारा गीता जयंती मनाने के निर्णय की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि सरकार का यह निर्णय स्वस्थ समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।  

गीता नि:स्वार्थ भाव से कर्म करने का संदेश देती है : स्वामी आर्यवेश
स्वामी आर्यवेश ने अपने व्याख्यान में कहा कि गीता नि:स्वार्थ भाव से कर्म करने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की दुरगामी सोच रखने वाले लोग ही इतिहास रचते है। ज्ञान के बगैर कोई भी कार्य नहीं हो सकता और गीता ज्ञान का भंडार है। इसलिए गीता को न केवल पढऩा चाहिए बल्कि इसे अपने जीवन में भी आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने भगवान श्री कृष्ण  के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके जीवन से हमें जीवन जीने की प्रेरणा मिलती है। उनके द्वारा दिया गया गीता का ज्ञान आज भी प्रासांगिक है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को गीता का अधिकाधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, जीवन को सुखमय एवं कष्टमुक्त बनाना है तो गीता में दिए गए संदेश के अनुरूप दूसरों का अपने प्रति जो आच्चरण चाहते है, वहीं आच्चरण दूसरे के साथ करना चाहिए। जीवन में कभी भी गलती से भी गलती नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जो कर्म हम करते है, उसी के फल हमें भोगने पड़ते है। उन्होंने संयासी का मतलब समझाते हुए कहा कि संयासी वस्त्रों का धारण कर निठला बैठ जाने से कोई व्यक्ति संयासी नहीं बन जाता बल्कि संयासी वह व्यक्ति है जो संयास धारण कर धर्म की राह पर चलकर समाज को आगे ले जाने का काम करता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अगर बाल्यकाल से ही गीता का ज्ञान दिया जाये तो समाज से हर प्रकार की बूराई को जड़ से समाप्त किया जा सकता है। जिस दिन बच्चों ने बाल्यकाल से ही गीता के ज्ञान को आत्म सात करना शुरू कर दिया तो उस भारत को दूनिया का सिरमौर बनने से कोई ताकत नहीं रोक पायेगी। उन्होंने यह भी कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता दूनिया में सबसे अधिक पढ़ाया जाता है। एक सर्वे के अनुसार दूनिया में बाईबल को 19० करोड़ लोग मानते है। लेकिन गीता को इस से भी बड़ी संख्या में लोग पढ़ते है। सियाराम शास्त्री ने कहा कि भारत को विश्व गुरू बनाने में ऋषियों, महात्माओं, एवं संतों का बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि गीता, गंगा, गायत्री, गुरु, गऊ तथा गौरी ये छह ऐसे बिन्दू है अगर इनकी दशा सही रही तो देश की दशा भी सही रहती है।  जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदीप कुमार ने सेमीनार में आये वक्ताओं को गीता की एक प्रति एवं चदर भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर एडीसी धीरेंद्र खडगटा, नगराधीश सत्यवान सिंह मान, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंदीप कुमार मौजूद रहे। सेमिनार में स्वामी आर्यवेश, स्वामी रामवेश तथा आचार्य देवी दयाल, राजेश स्वरूप शास्त्री, कुमारी सिवानी शर्मा ने मुख्य व्यक्ताओं के रूप में शिरकत की।  

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...