Thursday, 7 December 2017

विश्व मृदा दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन

किसान मोबाइल ऐप पर करें पंजीकरण
जींद 
कृषि विज्ञान केंद्र पांडु पिंडारा तथा जिला उप निदेशक जींद के संयुक्त तत्वाधान में मंगलवार को विश्व मृदा दिवस का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला के कृषि अधिकारियों के साथ सैंकड़ों किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम में जिला भाजपा के अध्यक्ष अमरपाल राणा भी मौजूद थे। उन्होंने किसानों को सरकार द्वारा चलाई जा रही स्कीमों का लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार किसानों के हितों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं चला रही है जिसका फायदा उठाना चाहिए। कृषि विज्ञान केंद्र पांडू पिंडारा के संयोजक डॉ. आरडी पंवार ने किसानों को बताया कि आज देशभर में एक ऐप का लॉच किया गया है जिसके माध्यम से किसान पंजीकरण करके अपने मोबाईल फोन पर मिट्टी की जांच का रिजल्ट प्राप्त कर सकते हैं और यह मोबाइल ऑफ लाइन भी क्रियाशील रहती है। एसडीओ डॉ. अनिल नरवाल ने बताया कि मिट्टी की जांच के अभाव में किसान अच्छी तकनीकों, किस्मों, यंत्रों के प्रयोग के बावजूद भी यथोचित परिणाम नहीं प्राप्त कर पाता। उन्होंने बताया कि मिट्टी की जांच का नमूना लेने के लिए किसानों को 15 से.मी. वी सेप का गढ्ढा खोदना चाहिए फिर खुरपी की मदद से एक सार खड़ी परत काट लें। किसान एक एकड़ जमीन में से पांच जगहों पर से मिट्टी का नमूना एकत्रित करके उसको छाया में सुखा कर आधा किलो मिट्टी को थैले में भर कर व उस थैली पर अपना पूरा नाम, पता, किले का नंबर अंकित करे। मृदा वैज्ञानिक डा. रामेश्वर सिंह ने बताया कि संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन एफएओ द्वारा पांच दिसंबर 2014 को प्रथम मृदा दिवस मनाया गया था। उन्होंने बताया कि मिट्टी को प्राकृतिक प्रणाली के एक महत्वपूर्ण घटक और मानव जीवन हेतु भोजन, पानी और उर्जा सुरक्षा के माना गया है। किसानों को मिट्टी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और महत्वपूर्ण संसाधन के स्थाई उपयोग को बढ़ावा देने के लिए देशभर में आज विश्व मृदा दिवस मनाया जा रहा है। डॉ. सत्यवान आर्य व डॉ. देवेेंद्र बाजवा ने लवणीय व क्षारीय भूमियों का वैज्ञानिक तरीकों से प्रबंधन करना भी किसानों को बतलाया। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा मौके पर किसानों से वार्ता कर उनकी समस्याओं का समाधान किया गया। डॉ. सूरजमल ने गन्ने की काश्त, उपज व तकनीकों के बारे में जानकारी दी। डॉ. अनिल नरवाल एसडीओ व डॉ. नरेंद्र पाल ने किसानों से आह्वान किया कि अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं ताकि उनकी जमीन उर्वरा से पूरी तरह भरपूर रहे। डॉ. मुकेश मेहला ने फसलों के विविधिकरण पर जोर दिया तथा मिट्टी जांच को किसानों के लिए आवश्यक बताया। कार्यक्रम में बैंक अधिकारियों ने भी जानकारी दी। 

एग्जाम फोबिया बच्चों की मेहनत पर फेर रहा पानी


बोर्ड परीक्षाएं पास आते ही बच्चे हो रहे एग्जाम फोबिया का शिकारअध्यापिका ज्योति कर रही एग्जाम फोबिया को दूरमेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है :  ज्योति छिब्बर


जींद 

बोर्ड एग्जाम का समय आते ही परीक्षाओं को लेकर बच्चों पर टेंशन हावी हो जाती है। ऐसे में एक अध्यापिका का रोल काफी अहम हो जाता है और वह परीक्षार्थी बच्चों में पॉजिटिव माहौल बना दे तो बच्चे परीक्षा के तनाव से दूर हो सकते हैं। ऐसा ही कुछ कर रही हैं जीवन ज्योति संस्थान चलाने वाली अध्यापिका ज्योति छिब्बर। पटियाला चौंक स्थित आनंद अस्पताल के ऊपर जीवन ज्योति संस्थान चला रही अध्यापिका ज्योति छिब्बर जहां ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्र से आने वाली छात्राओं का परीक्षाओं को लेकर फोबिया दूर कर रही हैं वहीं इस तरह से उनकी परीक्षाओं की तैयारी करवाती हैं कि बच्चों में बोर्ड परीक्षा का भय दूर हो जाता है। बोर्ड एग्जाम आते ही अधिकतर छात्र परीक्षाओं को लेकर तनावग्रस्त हो जाते हैं और खाना-पीना और सोना सब छोड़ देते हैं। इससे उनकी सेहत और याददाश्त पर बुरा असर पड़ता है। इतना ही नहीं रात भर जाग कर पढऩे के लिए कई छात्र ऐसी दवाओं का प्रयोग भी करते हैं जिनसे उन्हें नींद न आए, जिसका बाद में उन पर साइड इफेक्ट्स का खतरा बढ़ जाता है। फिर धीरे-धीरे उन्हें इन चीजों की लत पड़ जाती है और कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं भी शुरू हो जाती हैं। अध्यापिका ज्योति छिब्बर बच्चों की इसी मनोदशा को दूर करने के लिए संस्थान में घर जैसा माहौल उपलब्ध करवाती हैं। ज्योति का कहना है कि एग्जाम फोबिया एक ऐसी मानसिक दशा है कि जिसमें एग्जाम के डर और घबराहट की वजह से स्टूडेंट्स का उर्जा स्तर गिरने लगता है और मानसिक और शारीरिक तनाव के साथ-साथ मेमरी भी कम होने लगती है। छात्रों को आसान से सब्जेक्ट भी कठिन लगने लगते हैं। उसके लिए बार-बार याद करने पर भी चीजों को याद करना कठिन हो जाता है। ऐसे में स्टूडेंट्स निराशा और हताशा जैसी मानसिक दशा में तेजी के साथ घिरने लगता है। बच्चे की ऐसी आंतरिक मनोदशा को ही एग्जाम फोबिया कहा जाता है। 


बच्चों से करें परीक्षा का भय दूर करने के जाने कारण

अध्यापिका ज्योति छिब्बर ने बताया कि सबसे पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि बच्चे को एग्जाम से डर क्यों लग रहा है। क्या वह सही ढंग से तैयारी नहीं कर रहा है। क्या उसको परीक्षा में फेल हो जाने का डर सता रहा है। क्या वह परीक्षा को लेकर आसपास के वातावरण और लोगों के पूर्वानुमान से भयभीत है। 
एग्जाम की सही तैयारी करवाएं 
अध्यापिका ज्योति छिब्बर ने बताया कि किसी भी परीक्षा की तैयारी पूरी लगन, सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास के साथ करवाई जानी चाहिए। बच्चों को नोट्स से तैयारी करवाई जाए तो उससे बच्चे को काफी मदद मिलती है। इसके साथ ही पिछले साल के सैंपल पेपर से उसे टैस्ट बना करने को दें और बच्चों को यह समझाएं कि मेहनत का कोई शॉर्टकट नहीं है। 
नकारात्मक व्यक्तियों से बचें 
अध्यापिका ज्योति छिब्बर ने बताया कि बच्चे के आसपास नकारात्मक विचारों के व्यक्ति को न आने दें। ऐसे व्यक्तियों का दृष्टिकोण काफी निराशावादी होता है और वे हमेशा नकारात्मक सुझाव देते हैं। ऐसे लोगों का संपर्क आपके बच्चे के आत्मविश्वास को कम कर सकता है। यदि बच्चा एग्जाम फोबिया से परेशान है तो घर के वातावरण को बदलें। सुबह-शाम बच्चे के साथ सैर पर जाएं। पॉजिटिव लोगों और मित्रों से मिलें। पारिवारिक आयोजनों में भाग लें, रोचक और ज्ञानवर्धक टीवी प्रोग्राम देखें और प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ें। बच्चे को मानसिक तनाव को दूर करने के लिए कम से कम छह से आठ घंटे की गहरी नींद लेने दें। बच्चे को हल्की डाइट दें। अधिक मात्र में पेय पदार्थों का सेवन करवाएं। अगर बच्चे  परीक्षा को लेकर बच्चे की जरा सी हौसंलाअफजाही की जाए तो बच्चों से परीक्षाओं का भय दूर होगा और वह अच्छे से अपनी परीक्षा को दे पाएगा। 

Monday, 4 December 2017

पद्मावती के विरोध के विरोध में जींद के छात्र-छात्राएं


फिल्म के विरोध को बताया अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला
पद्मावती के रिलीज होने का जींद में बेसब्री से इंतजार


जींद : संजय लीला भंसाली की बेहद चर्चित और अब पूरे देश में विवाद का विषय बन चुकी फिल्म पद्मावती की जींद में छात्र-छात्राओं को रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार है। इस ऐतिहासिक फिल्म का विरोध करने वालों के विरोध में जींद के छात्र-छात्राएं आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका साफ कहना है कि फिल्म को देखे बिना महज एक सीन के आधार पर फिल्म का विरोध अभिव्यक्ति की आजादी पर बहुत बड़ा हमला है। 
जींद के राजकीय महिला कालेज की छात्राओं से लेकर प्राध्यापिकाओं और राजकीय पीजी कालेज के छात्रों तक सब इस बात के पक्ष में हैं कि पहले फिल्म को देखा जाए। उसमें कुछ गलत नजर आए, तब उसका विरोध किया जाए। फिल्म को देखे बिना उसका इतने बड़े स्तर पर विरोध करना समझ से बाहर है। इस मुद्दे पर जितने विद्यार्थियों से बात की गई, उनमें से सभी ने एक सुर में कहा कि अभी तक जो बात गर्भ में है, उसका इस तरह से विरोध करना अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। इस तरह के हमले भारतीय संस्कृति पर भी हमले हैं और यह समझ से बाहर है। छात्र-छात्राओं ने कहा कि उन्हें फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार है और फिल्म के रिलीज होते ही वह इसे देखने के लिए जरूर जाएंगे। अगर फिल्म में कहीं भी इतिहास के साथ छेड़छाड़ मिली और रानी पद्मावती तथा राजपूत समुदाय के मान-सम्मान को यह फिल्म ठेस लगाती मिली, तब वह एकजुट होकर फिल्म का पुरजोर विरोध करेंगे। 
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फिल्म देखने से पहले इतना विरोध कतई तर्क संगत नहीं : अमृत कौर
जींद के राजकीय महिला कालेज की बीएससी मैडीकल अंतिम वर्ष की छात्रा अमृत कौर पिलानिया का कहना है कि पद्मावती फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है। इस फिल्म में संजय लीला भंसाली ने राजपूतों का सम्मान और गौरव बढ़ाया है या उस पर चोट की है, यह गर्भ में है। फिल्म अभी राजपूत समाज और देश ने देखी नहीं है और इससे पहले ही इतने बड़े स्तर पर फिल्म का विरोध तथा संजय लीला भंसाली और फिल्म में काम करने वाले कलाकारों दीपिका पादूकोण तथा रणबीर सिंह की नाक आदि काट लेने के फरमान जारी करने से साफ है कि कुछ लोग अपने निजी स्वार्थों और रंजिश के कारण फिल्म का विरोध कर रहे हैं। यह भारतीय संस्कृति और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। फिल्म का विरोध पूरी तरह तर्क विहीन है तथा इसे किसी भी तरह से तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता। आज के पढ़े-लिखे युग में इस तरह का विरोध समझ से बाहर है। अमृत कौर ने यह भी कहा कि संजय लीला भंसाली ने अपनी फिल्म में राजपूतों का गौरव बढ़ाया है। एक बार राजपूत समाज फिल्म देख लेगा तो उसे भी लगेगा कि संजय लीला भंसाली ने राजपूतों का सम्मान घटाने की बजाए उसे बढ़ाने का काम किया है। 
कलाकारों, निदेशक को धमकी देने वालों पर दर्ज हो केस : नंदिनी

कालेज छात्रा नंदिनी ने फिल्म पद्मावती का विरोध करने वालों और इसमें काम करने वाले कलाकारों तथा फिल्म निदेशक को धमकी देने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ऐसे लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने चाहिएं। फिल्म को तुरंत रिलीज करने की इजाजत दी जानी चाहिए। इस फिल्म को राजनीति के फेर में उलझाकर रख दिया गया है। नंदिनी के अनुसार फिल्म में जिस घूमर नृत्य को लेकर राजपूत समाज इतना बवाल मचा रहा है, वह हकीकत में भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी धरोहर है। भारतीय संस्कृति की धरोहर बचाने के लिए सरकार करोड़ों रूपए खर्च कर रही है और संजय लीला भंसाली ने यह खुद अपने खर्च पर किया है। इसके बावजूद संजय लीला भंसाली की गर्दन कलम करने जैसे फरमान जारी किए जा रहे हैं। यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। फिल्मकार स्वतंत्र होते हैं और उन पर इस तरह की पाबंदियां लगाना कतई उचित नहीं। 

फिल्म देखने से पहले विरोध समझ से बाहर : रिचा
छात्रा रिचा के अनुसार फिल्म देखने से पहले उसका इस तरह विरोध हर किसी की समझ से बाहर है। पहले फिल्म रिलीज होनी चाहिए। फिल्म देखने के बाद इसमें कुछ गलत नजर आए तो विरोध करें। रिचा का कहना है कि फिल्म को देखे बिना इसका विरोध करने वालों पर केस दर्ज होने चाहिएं।
फिल्म तुरंत रिलीज होने का इंतजार : राधा

छात्रा राधा, मंजू के अनुसार पद्मावती के तुरंत रिलीज होने का युवा वर्ग को इंतजार है। फिल्म देखने के बाद ही इस पर कोई राय कायम होनी चाहिए। फिल्म देखे बिना उसका विरोध केवल राजनीतिक रंजिश है और यह नहीं होना चाहिए। अगर इस फिल्म में कहीं भी निदेशक संजय लीला भंसाली राजपूतों के सम्मान को ठेस पहुंचाते नजर आएं तो कोर्ट का सहारा लेना चाहिए। अभी फिल्म गर्भ में है और गर्भ में ही इसका विरोध पूरी तरह गलत है। 

फिल्म देखे बिना विरोध किसी भी तरह उचित नहीं : अमित
राजकीय पीजी कालेज के छात्र अमित भारद्वाज का कहना है कि पद्मावती को देखे बिना इसका विरोध कतई उचित नहीं। इस तरह फिल्म का विरोध अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। ऐसे हमले की इजाजत किसी भी वर्ग को नहीं होनी चाहिए। 
फिल्म को रोककर जन भावनाओं को पहुंचाई जा रही ठेस : प्रो. सुमिता आसरी

राजकीय महिला कालेज की प्राध्यापिका सुमिता आसरी का कहना है कि फिल्म को देखे बिना उसे इस तरह रोककर जन भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है। आज फिल्म रिलीज होती और लोग इसे देखते, तब पता चलता कि संजय लीला भंसाली ने इतिहास के साथ छेड़छाड़ की है या नहीं और राजपूत समुदाय के सम्मान को बढ़ाया है या कम किया है। फिल्म देखे बिना यह धारणा बना लेना कि इसमें राजपूत समुदाय का अपमान किया गया है, सरासर गलत है। उन्होंने कहा कि घूमर नृत्य भारतीय संस्कृति में शामिल है और नृत्य एक ऐसी कला है, जिसने भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन  किया है। एक घूमर नृत्य के सीन पर ही इतना बवाल मचा देना अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है। 





पांच किलोमीटर लंबी जागरूकता ने एड्स बचाव का दिया संदेश

विश्व एड्स दिवस पर निकाली जागरूकता यात्रा
एड्स आज भी विश्व के लिए एक चुनौती : डा. संजय दहिया

जींद 
विश्व एड्स दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कंडेला के तहत आने वाले गांव अमरहेड़ी से नागरिक अस्पताल जींद तक जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। रैली को सिविल सर्जन डा. संजय दहिया ने हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। रैली में डिप्टी सिविल सर्जन डा. मंजुला एवं वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कंडेला डा. राजेश भोला ने मुख्यअतिथि के तौर पर शिरकत की जबकि जागरूकता रैली में डा. पामेला दहिया, डा. पालेराम, डा. जतिंद्र, डा. ज्योति, डा. मंजू, डा. अनिल व आमजन ने हाथो में बैनर व् पोस्टर ले करके लोगो को जगरूक किया। रैली को रवाना करने से पहले स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए सिविल सर्जन डॉ. संजय दहिया ने कहा कि हमारे देश का भविष्य हमारे देश के युवाओं के हाथों में है, इसलिए हमें चाहिए कि हम हमारे देश के युवाओं को अच्छी शिक्षा दें व उन्हें गलत रास्ते पर जाने से रोकें। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे सभी तरह के नशों से दूर रहें व अन्य बुरी आदतों का त्याग करें व हमारे समाज व देश के विकास मे भागिदारी निभाएं। डॉ. भोला ने युवाओं को एड्स के बारे में विस्तार से बताते हुए इस बीमारी के होने व रोकथाम के बारे में बताया कि एड्स एक संक्रमण की बीमारी है और इस बीमारी का कोई ईलाज नहीं है, बस बचाव ही इसका इलाज है। यह बीमारी मनुष्य के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर देती है जिससे किसी प्रकार की बीमारी होने पर वह ठीक नहीं होती है। यह बीमारी विशेषत: एड्स संक्रमित खून के द्वारा, असुरक्षित यौन संबंध से व गर्भवती माता से शिशु में, एड्स रोगी की संक्रमित सूई द्वारा हो सकता है। डिप्टी सीएमओ डॉ. मंजुला ने बताया कि वर्ष 2016 में जिला जींद में 33103 लोगों के एचआईवी टैस्ट किए गए थे। इनमें से 210 लोग एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से 110 पुरूष तथा 100 महिला पॉजिटिव थी। जबकि 34 गर्भवती महिलाएं भी एचआईवी पॉजिटिव थी। वर्ष 2017 में जनवरी से नवंबर माह तक 29650 लोगों के टैस्ट किए गए थे। इनमें से 91 पुरुष व 61 महिलाए एचआईवी पॉजिटिव पाई गई थी। इनमें से 25 गर्भवती महिलाएं भी एड्स बीमारी से ग्रसित थी। डा. पामेला दहिया ने कहा कि लोगों में एड्स बीमारी को लेकर काफी भ्रम भी हैं। यह बीमारी साथ-साथ खाने से, हाथ मिलाने और गले मिलने से, खांसने, छींकने या हवा से, मच्छरों या कीड़े-मकोड़े के काटने से, खाने के बर्तन, कपड़े, शौचालय के सामूहिक उपयोग से नहीं होती है। एचआईवी एड्स केवल एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संपर्क से, संक्रमित सीरिंज व सुइयों के प्रयोग से, संक्रमित रक्त या रक्त उत्पाद चढ़ाने से, एचआई संक्रमित मां से उसके होने वाले शिशु को होता है। डा. राजेश भोला ने बताया कि एड्ïस एक लाइलाज बीमारी है। केवल जानकारी ही इसका बचाव है। एड्ïस का विषाणु मनुष्य के शरीर में घुस कर रोग प्रतिरोधक शक्ति को नष्ट कर देता है। एड्स एक ऐसी बीमारी है जिसके संबंध में जागरूक होना ही बचाव का एक बढिय़ा तरीका है। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है। इसलिए युवाओं को इस भयानक बीमारी के सम्बंध में पूर्ण जानकारी होनी चाहिए। युवाओं को चाहिए कि वो विवाह से पूर्व संयम रखें। असुरक्षित यौन संंबंध से बचें। यौन संबंध के दौरान निरोध का उपयोग करना चाहिए। जांच किया हुआ खून ही रोगी को चढ़वाना चाहिए।

टोल फ्री नंबर पर कभी भी ले सकते हैं जानकारी

डा. भोला ने कहा कि एड्स बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए विभाग द्वारा टोल फ्री नंबर 1097 भी दिया गया है। इस टोल फ्री नंबर पर कोई भी व्यक्ति फोन कर एड्स से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी ली जा सकती है। बस हम एड्स विषय के बारे में थोड़ी सी जानकारी रखें तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। 

यहां-यहां से निकली रैली 

रैली गांव अमरेहड़ी से शुरू होकर निरंकारी भवन, एक रुपया चौंक, शिव चौंक, पंजाबी बाजार, मेन बाजार, शहर थाना, पालिका बाजार, रानी तालाब से होते हुए जिला मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में संपन्न हुई। यहां पर समाजसेवी राजकुमार द्वारा रैली में शामिल स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। इस मौके पर जोगिंद्र भोला, आशीष सिहाग, विजेंद्र सिंह, देवीराम कौशिक, कुलदीप सिंह, रोहताश,  नरेंद्र, सुभाष, सरिता देवी, बिमला देवी, स्नेहलता, पिंकी देवी, गुलाब कौर सहित आशा वर्कर मौजूद रहे। 

Sunday, 3 December 2017

आग बुझवाकर राशि भरना भूले लोग

दर्जनों लोगों ने नहीं किया फायर ब्रिगेड का भुगतान
3 साल में लगभग डेढ़ लाख रूपए पहुंची राशि

जींद : आग लगने पर 101 नंबर डायल करना होता है। इसके बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी मौके पर पहुंच जाती है और आग पर काबू पाती है। आग बुझाने के बाद शहरी क्षेत्र के लोगों से किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाती, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आग बुझाने गई गाड़ी की फीस 300 रूपए प्रति घंटे के हिसाब से पीडि़त को देनी होती है। पिछले 3 साल के आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो लोग दमकल विभाग की आग बुझाने के बाद राशि का भुगतान नहीं कर रहे हैं। 3 साल में लगभग डेढ़ लाख रूपए की राशि अब भी लोगों में बकाया है। 
सफीदों गेट के पास दमकल विभाग का कार्यालय है। दमकल विभाग के कार्यालय में आग लगने की सूचना मिलने के बाद गाड़ी दौड़ती देखी जा सकती है। शहरी क्षेत्र के लोग प्रोपर्टी टैक्स या बिजली बिल में फायर ब्रिगेड को टैक्स के रूप में राशि देते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में आग लगने पर मौके पर ही इस राशि का भुगतान करना होता है। आग लगने की सूचना के बाद जैसे ही गाड़ी निकलती है तो उसका समय नोट कर लिया जाता है। आग बुझाने के बाद कार्यालय पहुंचने के बाद ही समय समाप्त होता है। ग्रामीण क्षेत्र में 300 रूपए प्रति घंटा आग बुझाने के लिए दमकल विभाग द्वारा लिया जाता है। दमकल विभाग द्वारा अब ऐसे लोगों को नोटिस भेजे जाएंगे, जो उनकी राशि को अदा नहीं कर रहे हैं। विभाग के अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2015 में लगभग 65 हजार रूपए की राशि लोगों की ओर बकाया है। 2016 में यह राशि लगभग 49 हजार और अक्तूबर 2017 तक लगभग 37 हजार रूपए की राशि बकाया है। कुल मिलाकर अब दमकल विभाग ऐसे लोगों को अब नोटिस भेजेगा, जो उनकी राशि नहीं भर रहा है। 
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अप्रैल महीने में होती हैं आगजनी की ज्यादा घटनाएं
अप्रैल महीने में आगजनी की ज्यादा घटनाएं होती हैं। उस समय गेहंू की फसल कटनी होती है। ऐहतियात के तौर पर बिजली निगम द्वारा उस समय बिजली कट भी लगाए जाते हैं, लेकिन कभी शार्ट सर्किट तो कभी अन्य कारणों से फसल में आग लग जाती है। अप्रैल महीना आते ही दमकल विभाग भी काफी अलर्ट हो जाता है। इस महीने में दमकल विभाग के कर्मचारियों की छुट्टियां तक रद्द करने की नौबत आ जाती है। 
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लोगों को भेजे जाएंगे नोटिस : वर्मा
इस मामले में फायर अफसर कृष्ण चंद्र वर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि जिन लोगों ने आग बुझाने के फायर ब्रिगेड के बिल नहीं भरे हैं, उन्हें नोटिस भेजकर जल्द पैसा जमा करवाने को कहा जाएगा। इसके बाद भी यह लोग पैसा जमा नहीं करवाते हैं तो उनके खिलाफ आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। 

इस बार गन्ने से मिल रही ज्यादा चीनी

चीनी मिल को ज्यादा रिकवरी से होगा फायदा

जींद :  जींद सहकारी चीनी मिल को इस साल गन्ने से चीनी पिछले साल के मुकाबले ज्यादा मिल रही है। यह मिल के लिए अच्छा और शुभ संकेत है। गन्ने से मिल को ज्यादा चीनी मिलने से काफी फायदा होगा। 
चालू पिराई सत्र को 21 दिन हो गए हैं। अब तक जींद सहकारी चीनी मिल 3 लाख 29 हजार 600 क्विंटल गन्ने की पिराई कर चुकी है। एक दिन में जींद सहकारी चीनी मिल चालू गन्ना पिराई सत्र में लगभग 17 हजार क्विंटल गन्ने की पिराई कर रही है। चीनी मिल की गन्ने से चीनी बनाने की रिकवरी 9.01 प्रतिशत है। पिछले साल यह रिकवरी 8.33 प्रतिशत थी। इससे साफ है कि इस बार जींद सहकारी चीनी मिल को गन्ने की पिराई से चीनी पिछले पिराई सत्र के मुकाबले कहीं ज्यादा मिल रही है। करोड़ों रूपए घाटे में चल रही जींद सहकारी चीनी मिल के लिए इस साल रिकवरी पिछले पिराई सत्र की तुलना में ज्यादा होने को अच्छा और शुभ संकेत माना जा रहा है। 
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अपनी क्षमता से कहीं ज्यादा पर काम कर रही चीनी मिल
जींद सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता 12500 क्विंटल प्रतिदिन की है। चालू गन्ना पिराई सत्र में जींद सहकारी चीनी मिल 100.49 प्रतिशत की क्षमता पर गन्ना पिराई का काम कर रही है जबकि पिछले पिराई सत्र में यह 62.45 प्रतिशत था। मिल के प्रबंधक निदेशक अश्विनी मलिक के अनुसार चालू पिराई सत्र में गन्ना पिराई का काम पिछले पिराई सत्र के मुकाबले ज्यादा सुचारू रूप से चल रहा है। 
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02जेएनडी07- जींद सहकारी चीनी मिल, जिसमें रिकवरी पिछले साल के पिराई सत्र के मुकाबले इस साल ज्यादा है। सुनील
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क्या कहते हैं मिल के प्रबंधक निदेशक
जींद सहकारी चीनी मिल के प्रबंधक निदेशक अश्विनी मलिक का कहना है कि इस बार गन्ने की पिराई का काम सुचारू रूप से चलने और रिकवरी पिछले पिराई सत्र के मुकाबले ज्यादा होने का कारण यह है कि गन्ने की फसल अच्छी है और किसान गन्ने को अच्छी तरह से साफ कर चीनी मिल में ला रहे हैं। मिल के स्टाफ और गन्ना उत्पादक किसानों के सहयोग से ही यह सब संभव हो पाया है। 
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02जेएनडी08- चीनी मिल के एमडी अश्विनी मलिक का फोटो। 
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जल्द बढ़े सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता : रढाल
माजरा खाप के प्रधान महेंद्र रढाल ने सरकार से मांग की कि जींद सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता जल्द बढ़ाई जाए। पिछले 20 साल से सहकारी चीनी मिल की पिराई क्षमता 25 हजार क्विंटल प्रतिदिन किए जाने की योजना कागजों में दफन है। लगभग 10 बार इसकी घोषणा हो चुकी है लेकिन आज तक मिल की पिराई क्षमता नहीं बढ़ी है। इस कारण मई और जून महीने तक चीनी मिल को चलाना पड़ता है तथा इससे सबसे ज्यादा दिक्कत गन्ना उत्पादक किसानों को होती है। 

सर्दी में भी महंगी सब्जियों से लोगों को नहीं मिल रही राहत

मंडी में 60, रेहडिय़ों पर 80 रूपए किलो बिक रहा टमाटर
प्याज भी भाव के मामले में कर रहा टमाटर का मुकाबला

जींद : टमाटर और प्याज सब्जी मंडी से लेकर रेहडिय़ों तक इस समय तमाम सब्जियों के सिरमौर भाव के मामले में बने हुए हैं। टमाटर अपने बढ़े हुए भाव के कारण और लाल सुर्ख हो रहा है तो प्याज भी अपने रिकार्ड तोड़ भाव के चलते लोगों की आंख से आंसू निकाल रहा है। सर्दी में आम तौर पर सब्जियों के भाव कम हो जाते हैं लेकिन इस बार सर्दी में भी सब्जी के भाव कम नहीं हो रहे। 
इस समय जींद की सब्जी मंडी में टमाटर 55 से 60 रूपए प्रति किलो के भाव बिक रहा है। यह भाव पिछले महीने भर से चला आ रहा है। अब प्याज भी मंडी में 60 रूपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। यही टमाटर और प्याज रेहडिय़ों तथा रिटेलर के पास आते 80 रूपए प्रति किलो तक पहुंच गया है। टमाटर और प्याज ने लोगों का दम निकाल दिया है। अब सलाद से प्याज और टमाटर पूरी तरह से गायब हो रहे हैं। इनकी जगह अब मूली और गाजर ले रही है। मंडी में दूसरी सब्जियों के भाव भी इस समय आसमान छू रहे हैं। इन दिनों गोभी 15 से 20 रूपए प्रति किलो के भाव मिलने लगती थी लेकिन यह 40 रूपए प्रति किलो से नीचे नहीं आ रही। घीया भी 40 रूपए प्रति किलो के भाव है। बीन का भाव 60 रूपए प्रति किलो है तो मंडी में शिमला मिर्च भी 60 रूपए प्रति किलो के भाव बिक रही है। मटर 50 रूपए प्रति किलो के भाव है तो गाजर भी 35 से 40 रूपए प्रति किलो के भाव है। इन दिनों मटर 20 रूपए प्रति किलो, गाजर 10 रूपए प्रति किलो के भाव आसानी से मिलने लग जाती थी लेकिन इस साल इस तरह की सर्दी की सब्जियों के भाव भी कम होने का नाम नहीं ले रहे। 
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अब सब्जी की जगह दाल और फल ही विकल्प
गृहणी सुशीला, सुमित्रा, रानी, कमला, राजवंति आदि का कहना है कि इस समय सब्जियों के भाव जिस तरह आसमान छू रहे हैं, ऐसे में सब्जी की जगह दाल और फल ही बेहतर विकल्प हैं। सब्जी से तो दाल भी सस्ती पड़ रही है। मंडी में सेब 50 से 60 रूपए प्रति किलो के भाव आसानी से मिल जाता है। इस भाव पर टमाटर और प्याज खरीदने की बजाय सेब खरीदकर सेहत भी बनाई जा सकती है और प्याज तथा टमाटर की जगह सेब का सलाद स्टेटस भी बढ़ाएगा। 
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महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश में फसल खराब होने से बढ़े भाव : सैनी
सब्जी मंडी आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान जगत सिंह सैनी का कहना है कि टमाटर और प्याज के भाव बढऩे का कारण यह है कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में बेमौसमी बारिश से फसल खराब हो गई। जींद में टमाटर और प्याज महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से आता है। दूसरी सब्जियों के भाव आने वाले दिनों में कम होने की संभावना है। 

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...