Saturday, 23 September 2017

एनएसएस का उद्देश्य सेवा की भावना को बलवती करना : डा. सुमिता

स्वयंसेविकाओं ने महिला महाविद्यालय में चलाया सफाई अभियान

जींद

राजकीय महिला महाविद्यालय में शुक्रवार को राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में राष्ट्रीय सेवा योजना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्या राजेश्वरी कौशिक ने की। कार्यक्रम के प्रथम चरण में डा. संदीप शर्मा व डा. सुमिता आशरी के नेतृत्व में स्वयंसेविकाओं ने महाविद्यालय में सफाई अभियान चलाया गया। यहां स्वयंसेविकाओं को संबोधित करते हुए डा. सुमिता आशरी ने कहा कि समाजसेवा मानव जीवन का अभिन्न अंग है। इसके बिना मानव जीवन का उद्देश्य सार्थक नहीं हो सकता है। युवा शक्ति अपार ऊर्जा का स्त्रोत होती है तथा इस प्रकार के सेवा योजना के शिविरों के माध्यम से हमारी ऊर्जा शक्ति का राष्ट्र की उन्नति में अहम योगदान होता है। उन्होंने कहा कि एनएसएस शिविर लगाने का उद्ïदेश्य की एकता की भावना का बलवती करना है। छात्र शिविर में मिलजुल कर कार्य करते हैं। एक छात्र से न होने वाला कार्य जब दो छात्र मिलकर करते हैं तो उनमें एकता की भावना का विकास होता है। उन्होंने कहा कि आज समाज में दहेज व भू्रणहत्या जैसी अनेकों बुराइयां फैली हुई हैं तथा ये बुराइयां समाज के लिए बहुत बड़ी समस्या हैं। इन बुराइयों से केवल कानूनों के आधार पर नहीं अपितु समाज की हर बिरादरी के लोगों की आपसी सूझबूझ व प्रयासों के द्वारा ही काबू पाया जा सकता है।  इस मौके पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया। 


पीजी कॉलेज की सुरक्षा में लगी सेंध



छात्र गुटों के तनाव को देखते हुए हो सकती है बड़ी वारदात
झाडिय़ां तथा उगी घास बनी शरारती तत्वों की शरण स्थली
दीवार के साथ लगा कूडे का ढेर, दीवार फांद फरार होते हैं शरारती तत्व


जींद
राजकीय महाविद्यालय की सुरक्षा में लगी सेंध कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। महाविद्यालय के पिछवाड़े खाली पड़ी जगह में कई-कई फूट ऊंची घास तथा झाडिय़ां उग चुकी हैं। इसके अलावा हाऊसिंग बोर्ड कालोनी की तरफ लगती दीवार के साथ कूड़े का पांच फूट के लगभग ढेर लगाया गया है। घास तथा झाडिय़ां शरारती तथा आवारा तत्वों की शरणस्थली बनी हुई हैं। दीवार के साथ लगा कूड़े का ढेर शरारती तत्वों द्वारा दी गई वारदात के बाद बच निकलने का रास्ता बना हुआ है। बड़ी-बड़ी घास तथा झाडिय़ों के बीच खाली पड़ी शराब की बोतल तथा रेपर भी इस तरफ साफ इशारा कर रहे हैं कि झाडिय़ों तथा घास के बीच मौज मस्ती भी होती है। जिसकी तरफ कॉलेज प्रशासन बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा है।
घास तथा झाडिय़ों के बीच चलता हुआ इंसान नहीं देता दिखाई
राजकीय महाविद्यालय के पिछवाड़े खाली पड़े मैदान में घास तथा झाडिय़ां इतनी ऊंची तथा गहरी हो चुकी हैं कि उनके बीच से चलता हुआ इंसान दिखाई नहीं देता। स्टडी ब्लॉक से निकलते ही झाडिय़ों तथा घास का सिलसिला शुरु हो जाता है। झाडिय़ों और घास के बीच काफी संख्या में शराब की खाली बोतलें, रेपर, डिस्पोजल गिलास व अन्य खादय सामग्री के पैकेट पड़े हुए हैं। जिससे साफ है कि शरारती तथा आवारा तत्व झाडिय़ों में छुपकर मौज मस्ती करते हैं।
कूड़े का ढेर लगा, दीवार फांदकर भाग निकलते हैं शरारती तत्व
राजकीय महाविद्यालय के पिछवाड़े हाऊसिंग बोर्ड कालोनी की तरफ सुरक्षा की दृष्टि से दीवार तो बनाई गई है लेकिन दीवार के साथ कूड़े का इतना बड़ा ढेर लगाया हुआ है की शरारती तथा आवारा तत्व दीवार फांदकर आराम से हाऊसिंग बोर्ड कालोनी की तरफ निकल जाते हैं। जिससे यह भी साफ है कि कॉलेज में लगे कूड़े के ढेर और झाडिय़ां, घास की तरफ कॉलेज प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
झगड़ते रहते हैं छात्र गुट, बना रहता है बड़े हादसे का अंदेशा
राजकीय महाविद्यालय में छात्र गुट वार्चस्व को लेकर अक्सर भिड़ते रहते हैं और कई वारदात भी हो चुकी हैं। कॉलेज में छात्र-छात्राओं की अच्छी खासी संख्या है। हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि हर रोज कोई न कोई गुट डंडों तथा बिंडों के साथ राजकीय महाविद्यालय के आसपास मंडराता रहता है। कॉलेज में घुसे शरारती तत्वों का पुलिस पीछा करती है तो पिछवाड़े में लगे कूड़े के ढेर से दीवार फांदकर फरार हो जाते हैं।
कॉलेज स्टाफ नहीं करता टोकाटाकी, जांचने का काम पुलिस का
राजकीय महाविद्यालय में वारदातों को देखते हुए पीसीआर को तैनात किया गया है। इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस बल भी गश्त करता रहता है। हैरानी की बात यह है कि शरारती तत्व कॉलेज में घुस जाते हैं। जिन्हें कॉलेज स्टाफ बिल्कुल भी नहीं रोकता। संदेह होने पर कॉलेज परिसर में तैनात पुलिस कर्मी जरूर संदिग्ध युवकों से पूछताछ कर लेती है। शुक्रवार को कुछ ऐसा ही देखने को मिला। भिडऩे को आतूर छात्र गुट कॉलेज में घुस गए, पुलिस को संदेह हुआ तो उन्होंने युवकों को रोकने की कोशिश की। जिस पर युवक झाडिय़ों तथा घास से होते हुए दीवार फांदकर फरार हो गए।
क्या कहती है पीसीआर इंचार्ज
राजकीय महाविद्यालय में पीसीआर चार की इंचार्ज सरोज ने बताया कि वारदात की आशंका के चलते शरारती तत्वों का पीछा किया जाता है तो वे पीछे से दीवार फांदकर फरार हो जाते हैं। इसके अलावा झाडिय़ां तथा घास भी काफी बड़ी है। जिसमे चलता हुआ इंसान भी दिखाई नहीं देता।
राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य आरपी हुड्डा ने बताया कि कालोनी की तरफ से कूड़ा डाला जाता है। बारिश का मौसम होने के कारण घास तथा झाडिय़ां काफी बड़ी हो चुकी हैं। कूड़ा डालने पर कॉलोनी के लोगों को नोटिस दिए जाएंगे और जेसीबी की सहायता से घास को जल्द साफ करवा दिया जाएगा। 

Thursday, 21 September 2017

छात्रों को मोबाइल का सदुपयोग और दुष्परिणामों से अवगत करवाया

विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाना ही परम उद्देश्य : रश्मि विद्यार्थी

जींद 
डीएवी संस्था का प्रथम उद्देश्य विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ संस्कारवान बनाना है इसी उद्देश्य को लेकर सफीदों के कली राम डीएवी स्कूल में आए दिन विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। विद्यार्थियों में अच्छे संस्कार भरने के लिए वि
द्यालय की प्राचार्या रश्मि विद्यार्थी सदैव प्रयासरत रहती हैं। अभिभावकों तथा अध्यापकों के लिए बच्चों का मोबाइल, इंटरनेट का अत्यधिक प्रयोग गहन चिंता का विषय बन गया है। बच्चों को मोबाइल के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए वीरवार को स्कूल में संस्कारशाला विषय का आयोजन करवाया गया। इस पर अध्यापिका सुनीता कंधवाल के द्वारा कहानी सुनाई गई। इसमें छात्रों को मोबाइल का सदुपयोग और दुष्परिणामों के विषय में गहनता से बताया गया। उन्होंने कहा कि अगर छात्र मोबाइल का प्रयोग सही दिशा में जानकारी एकत्रित करने में करेंगे तो इससे उनके ज्ञान में वृद्धि होगी। इसके अलावा छात्रों को फेसबुक  जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों से दूर रहने का सुझाव दिया। मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से आंखों और मस्तिष्क पर खतरनाक प्रभाव पड़ता है। इसके विपरित बच्चों को पार्क अथवा मैदान में जाकर खेल खेलने चाहिए। इससे मानसिक और शारीरिक विकास होता है। 
छात्रों ने भी बताए मोबाइल के दुरूपयोग
मोबाइल दुरूपयोग पर आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थी विभोर जैन और महक ने बताया कि इसका अत्यधिक प्रयोग हमें इस पर निर्भर बना देता है और हम अपने दिमाग का प्रयोग करना बंद कर देते हैं।  हर विषय पर जानकारी उसी में खोजते हैं।  हमें मोबाइल का कम से कम प्रयोग करना चाहिए । सिर्फ  जरूरी समय में ही इसका उपयोग करना है।  यह हमारी बुद्धि और विवेक पर निर्भर करता है कि हम इसका प्रयोग किस प्रकार करते हैं।  

शारदीय नवरात्र के पहले दिन मां दुर्गा के दर्शनों को उमड़ी भीड़


मंदिरों में लगी श्रद्धालुओं की लाइनें 
मां भगवती से मांगी परिवार कल्याण की मन्नतें 

जींद

शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन वीरवार सुबह मंदिरों में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा तथा मां शैलपुत्री के दर्शन कर सुखी जीवन की कामना की। अल सुबह से ही श्रद्धालुओं की शहर के सभी मंदिरों में लंबी लाइन लगनी शुरू हो गई थी। माता के दर्शनों के लिए महिलाओं की संख्या अधिक थी। नवरात्रों में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रख कर मंदिर कमेटी द्वारा सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। मंदिर प्रबंध समिति ने महिला तथा पुरूषों के लिए मंदिर प्रांगण में बेरीकेटिंग की गई है। इस दौरान मंन्दिर की भव्य सजावट की गई। वहीं प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टिï से पुलिस की चौकसी की गई थी वहीं मेला कमेटी के सदस्य भी पूरी सतर्कता से जुटे रहे। जयंती मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने कहा कि मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या न हो, इसके लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है। नवरात्र के अंतिम दिन जयंती देवी मंदिर में जागरण तथा मेले का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मंदिर के अंदर रेलिंग तथा बाहर बेरीगेट्स लगाए गए हैं। असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए पुलिस सुरक्षा का प्रबंध किया गया है। 

नवरात्रों में बढ़े सब्जी और फलों के भाव
नवरात्र पर्व शुरू होते ही सब्जी और फलों के भाव काफी बढ़ गए हैं। वीरवार को केला 50 से 60 रुपये प्रति दर्जन के भाव मिल रहा था, जो पहले 30 से 40 रुपये प्रति दर्जन था। इसी तरह सेब का भाव भी 60 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 70 से 80 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। नवरात्रों में ज्यादातर महिलाएं माता के व्रत रखती हैं और व्रत के दौरान वह केवल सब्जी आहार में लेती हैं। इसी के चलते सब्जी के दामों में भी वृद्धि हो रही है। 
कुटू के आटे पर स्वास्थ्य विभाग की नजर
माता के नवरात्रों में व्रत रखने वाले काफी लोग कुटू के आटे की रोटी खाते हैं। कई बार कुटू का पुराना आटा सेहत के लिए बेहद नुक्सानदायी साबित होता है। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने करियाणा की दुकानों के संचालकों को यह निर्देश दिए हैं कि कुटू का पुराना आटा किसी भी कीमत पर नहीं बेचा जाए। ऐसा करते कोई पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। 
देवी मंदिर में भक्तों ने की मां शैलपुत्री की पूजा 
हनुमान मंदिर के निकट देवी मंदिर में मां शैलपुत्री का पूजन हर्षोल्लास के साथ किया गया। इसमें भवानीशंकर ने सपरिवार मां शैलपुत्री का पूजन किया। इस अनुष्ठान में मन्दिर के पुजारी पं राकेश शास्त्री ने बताया कि मां दुर्गा के नौ रुपों में पहला रुप है शैलपुत्री का। नवरात्र के पहले दिन घट स्थापना के साथ देवी के इसी रुप की पूजा की जाती है। मां का यह रूप सौम्य और भक्तों को प्रसन्नता देने वाला है। ऐसी मान्यता है कि देवी पार्वती पूर्व जन्म में दक्ष प्रजापति की पुत्री सती थी। दक्ष के यज्ञ कुंड में जल कर देवी सती ने जब अपने प्राण त्याग दिए तब महादेव से पुन: मिलन के लिए उन्होंने पर्वतराज हिमालय की पुत्री के रुप में जन्म लिया। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये हेमवती और उमा नाम से जानी जाती हैं। पर्वत को शैल भी कहा जाता है इसलिए माता का प्रथम रुप शैलपुत्री के नाम से जाना जाता है। नवरात्र के पहले दिन मां के शैलपुत्री रुप की पूजा की जाती है। भगवती का वाहन बैल है। इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है। साथ ही इन्हें समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक माना जाता है । 

रक्तदान करने से स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता प्रतिकूल प्रभाव : डा. भोला

रक्तदान शिविर में 71 युवाओं ने किया रक्तदान 

सारिका ने तीसरी बार किया रक्तदान 
जींद 
गांधी नगर स्थित आईएएमएस स्टडी प्वायंट पर वीरवार को रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुख्यअतिथि के तौर पर स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डिप्टी सीएमओ डा. राजेश भोला ने विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शिरकत की जबकि फरीदाबाद से समाजसेवी सत्यवान समरीवाल, निदेशक सारिका समरिवाल व मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज समरिवाल, रेडक्रॉस जींद से ईश्वर सांगवान मौजूद रहे। शिविर में 71 युवाओं ने रक्तदान किया। शिविर की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सारिका और कविता दो बहनों ने एक साथ रक्तदान किया। सारिका का बुधवार को जन्मदिन भी था और उन्होंने रक्तदान कर युवाओं को प्रेरित किया। शिविर में युवाओं को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएमओ डा. राजेश भोला ने कहा कि रक्तदान करने से स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन माह बाद रक्तदान कर सकता है। इन्हीं रक्तदाताओं की बदोलत जींद जिला में फिलहाल रक्त की कोई कमी नहीं है। रक्तदान शिविरों में एकत्रत किया गया रक्त किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को नया जीवन दे सकता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वो रक्तदान की मुहिम से जुड़ें और देश सेवा में अपना योगदान दें। निदेशक सारिका समरिवाल व मैनेजिंग डायरेक्टर पंकज समरिवाल ने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं होता है। रक्तदाता अपना रक्त देकर दूसरों की जान बचाता है। इससे भारत की समृद्ध एवं संस्कारवान संस्कृति के दर्शन होते हंै। उन्होंने कहा कि भारत देश ने विभिन्न क्षेत्रों में आशातीत उन्नति की है। जिनकी बदोलत भारत की गिनती विश्व के शीर्ष शक्तिशाली देशों में होती है। आज विज्ञान के क्षेत्र में भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र बन कर उभरा है लेकिन अबतक दुनिया भर के वैज्ञानिकों द्वारा रक्त का कोई भी विकल्प नहीं ढूंढा जा सका है। इसलिए हर किसी को चाहिए कि वो अपने जीवन में रक्तदान अवश्य करें। फरीदाबाद से समाजसेवी सत्यवान समरीवाल ने कहा कि हम रक्तदान करके किसी जरूरत मंद की जान बचा सकते हैं। जबकि हमारा कुछ भी घटने वाला नहींं है। मनुष्य के रक्त की पूर्ति रक्तदान करके ही की जा सकती है। अन्य कोई साधन नहीं है। ऐसे में युवकों को रक्तदान करके  मानवता के प्रति अपना कर्तव्य निभाने के लिए आगे आना चाहिए। इस मौके पर रक्तदान करने वाले युवाओं को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में देवीराम कौशिक, राजेश खर्ब, रमेश जांगड़ा, डा. कुलदीप आर्य, बलवान जांगड़ा, संजय वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे। 
रक्तदान कर मिली विशेष अनुभूति 
सारिका ने कहा कि उन्होंने तीसरी बार रक्तदान किया है और रक्तदान कर उन्हें विशेष अनुभूति हो रही है। जिसे शब्दों में ब्यां नहीं किया जा सकता है। उनके द्वारा दिया गया रक्त  न जाने किसके काम आएगा, यह उसे मालूम नहीं है। उन्होंने आमजन से भी आह्वान किया कि वो भी अपने हर विशेष अवसर पर ऐसे शिविरों का आयोजन करें ताकि समाजसेवा के कार्यों में हम भी अपनी आहूति डाल सकें। 

...पॉलिथिन के प्रयोग पर लगे रोक


नगर परिषद ने पॉलिथिन की रोक पर उठाया विशेष कदम
अस्थायी नंदीशाला में भी पॉलिथिन खाने से हुई थी पशुओं की मौत
पॉलिथिन सीवरेज ब्लॉक होने का सबसे बड़ा कारण बन रहा

जींद 
सख्ती से पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाए जाने से हिमाचल प्रदेश की गिनती आज स्वच्छ प्रदेशों में होती है वहीं इसके विपरित हरियाणा प्रदेश में पॉलीथिन पर बैन न होने के चलते यहां रहने वाले लोगों को पर्यावरण तथा अन्य समस्याएं तो झेलनी ही पड़ रही हैं वहीं हजारों निरीह बेजुबान पशुओं को भी मौत का कारण पॉलीथिन बन रहा है। ऐसा नहीं है कि जींद शहर में पॉलीथिन पर बैन न लगाया गया हो लेकिन दुकानदार पॉलीथिन का प्रयोग करने से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसे में अब नगर परिषद ने पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले और इसे बेचने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। शीघ्र ही नगर परिषद कर्मचारी पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले दुकानदारों और इसके कारोबारियों पर छापेमारी करेगी ताकि पॉलीथिन पर जींद में बैन लगाया जा सके। 
शहर के पर्यावरण में जहर घोल रहा प्लास्टिक 
प्लास्टिक मूल रूप से विषैला या हानिप्रद नहीं होता है परंतु प्लास्टिक के थैले रंग और रंजक धातुओं और अन्य तमाम प्रकार के अकार्बनिक रसायनों को मिलाकर बनाए जाते हैं। जिससे यह विषैला हो जाता है और इसका निष्पादन भी मुश्किल हो जाता है या यूं कहा जाए कि पॉलिथिन अनबायोगे्रडेबल है और प्रकृति में विलय नहीं हो पाता और इसका एक बार प्रयोग करने के बाद दोबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है लेकिन आज यही प्लास्टिक की थैलियां आज मानव के साथ-साथ पशुओं के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा है। आज शहर में कोई ऐसी जगह नहीं है  जहां पॉलिथिन पड़ा न मिले। खेत-खलिहान यह जहां भी होगा, वहां भूमि की उर्वरता शक्ति कम करेगा। मजबूरन इसे जलाना पड़ता है जिससे इससे उठने वाला धुआं पर्यावरण को विषैला बनाता है। 
शहर में सीवरेज बाधित करने का सबसे बड़ा कारण पॉलिथिन 
प्लास्टिक थैलियों का निपटान यदि सही ढंग से नहीं किया जाता है तो वे जल निकास (नाली) प्रणाली में अपना स्थान बना लेती हैं जिसके फलस्वरूप नालियों में अवरोध पैदा होकर पर्यावरण को अस्वास्थ्य कर बना देती हैं। आज शहर में जहां भी सीवरेज समस्या है वहां पॉलिथिन ही इसका सबसे बड़ा कारण है। लोग अपने घरों में पॉलिथिन का प्रयोग करने के बाद बाहर फैंक देते हैं जो नालियों के माध्यम से सीवरेज समस्या को ब्लॉक कर देता है और लोगों की परेशानी का सबब बनता है। 
हजारों निरीह पशुओं की मौत का काल बन रहा पॉलिथिन 

प्लास्टिक की कुछ थैलियों जिनमें बचा हुआ खना पड़ा होता है अथवा जो अन्य प्रकार के कचरे में जाकर पड़ा होता है, उन्हें प्राय: पशु अपना आहार बना लेते हैं, जो उनकी मौत का कारण बनता है। पिछले दिनों जींद-हांसी ब्रांच नहर के निकट बनाई गई अस्थायी नंदीशाला में 10 से 20 पशुओं की मौत का कारण भी यही पॉलीथिन था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि जिन पशुओं की मौत हुई थी उन्होंने अधिक मात्रा में पॉलीथिन खाया हुआ था, जो अपाच्य था और यही उनकी मौत का कारण बना। 

प्लास्टिक उत्पादों को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने की मांग
समाजसेवी सुनील, सुभाष, वासदेव ने कहा कि पूरी दुनिया में प्लास्टिक उत्पादों को नियंत्रित और प्रतिबंधित करने की लगातार मांग उठ रही हैं। नए अध्ययनों में प्लास्टिक के इस्तेमाल से कैंसर तक होने की आशंका जताई जा रही है। हालत यह है कि जीवन से जुड़ी हर जरूरत के सामान में प्लास्टिक ने जड़ जमा ली है। भारत के 60 बड़े शहर रोजाना 3500 टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा निकाल रहे हैं। प्लास्टिक से बने पॉलिथीन से इंसान और जानवरों समेत प्रकृति के लिए भी घातक सिद्ध हो रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन को चाहिए कि वो पॉलीथिन पर बैन लगाने के लिए ठोस कदम उठाए। 
नगर परिषद चलाएगी अभियान 
नगर परिषद प्रधान पूनम सैनी ने कहा कि शहर में सीवरेज ब्लॉक होने का सबसे बड़ा कारण पॉलीथिन बन रहा है। इसके साथ ही कचरे में भी सबसे ज्यादा पॉलीथिन ही पाया जा रहा है। ऐसे में इसका निष्पादन कर पाना मुश्किल हो रहा है। नगर परिषद द्वारा अब पॉलीथिन पर बैन लगाने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। नगर परिषद कर्मचारी पॉलीथिन का प्रयोग करने वाले दुकानदारों और इसके कारोबारियों पर छापेमारी करेगी ताकि पॉलीथिन पर जींद में बैन लगाया जा सके। 
खुले में नहीं फैंकना चाहिए पॉलीथिन : डा. मलिक 
पशु उपनिदेशक डा. आरएस मलिक ने कहा कि लोगों द्वारा खुले में पॉलिथिन की थैलियां फैंक दी जाती हैं। जिसे खुले में घूम रहे पशु भूखा होने के चलते खा लेते हैं। जैसे ही यह पॉलीथिन पशुओं के पेट में पहुंचता है तो उनके पेट में जाकर फंस जाता है और उनके लिए हानिकारक साबित होता है। पॉलीथिन की अधिक मात्रा होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक थैलियों के विकल्प के रूप में जूट और कपड़े से बनी थैलियों और कागज की थैलियों का प्रयोग किया जाना चाहिए। 


16 संस्कार नाटक का मंचन, जीवन से मृत्यु तक के फेर को समझाया

भोपाल के श्री नाटयम थियेटर ग्रुप ने दी नाटक की प्रस्तुति
जींद
एक्टिव थियेटर एंड वैलफेयर सोसायटी के तत्वाधान में दस दिवसीय नवरस राष्ट्रीय नाटय उत्सव का शुभारंभ दीवान बाल कृष्ण रंगशाला में हुआ। नाटय उत्सव का शुभारंभ कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा. एके चावला, डा. डीपी जैन, जितेंद्र चहल, मंजू मानव व डा. अनिल जैन ने संयुक्त रूप से किया। नाटय उत्सव के पहले दिन भोपाल के श्री नाटयम थियेटर ग्रुप ने सोलह संस्कार नाटक की शानदार प्रस्तुति दी। दर्शकों ने नाटक का जमकर लुत्फ उठाया। नाटक का निर्देशन मनोज मिश्रा ने किया। मुख्यअतिथि डा. डीपी जैन ने कहा कि यह उत्तर भारत का बड़ा राष्ट्रीय नाटय उत्सव ऐसे शहर में हो रहा है जिसे पिछड़े इलाके के रूप में जाना जाता है। ऐसे इलाके में राष्ट्रीय स्तर का नाटक महोत्सव होना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। 16 संस्कार नाटक मानव जीवन पर आधारित है। नाटक के माध्यम से जीवन के हर स्तर तथा हर पहलू को दिखाने का प्रयास किया गया कि मानव जीवन किन संस्कारों से होकर गुजरता है। जन्म लेने से मृत्यु तक 16 संस्कार किए जाते हैं। 16 संस्कारों में गर्भधान, पुंसवन, सीमंतोत्रयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राषन, मुंडन, कर्णवेध, अक्षरांभ, उपनयन, वेदारंभ, केंषांत, समावर्तन, विवाह, अंतयेष्ठि शामिल हैं। नाटक में सोलह संस्कारों की जानकारी गुरू शिष्य के कथोपथन के माध्यम से दी गई। साथ ही इन आचारों की प्रक्रिया को समझाया गया है। जैसे गर्भधान, गर्भ के पंच तत्वों से शरीर का निर्माण, दृष्य आधुनिक उपकरणों से दर्शक को दिखाया गया है। इस प्रकार क्रमश 16 संस्कारों को सरल सुगम सुबोध रीति से जन-मानस तक पहुंचाया गया है। कलाकारों ने अपने अभिनय व हास्य व्यंगय से दर्शकों को लोट-पोट कर दिया व सोचने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर संरक्षक सुरेश जैन, मंगत राम शास्त्री, डा. रोशनलाल, डा. पवन आर्य, डा. हनीफ खान, डा. केएस गोयल,  अजय सिंगला, मंजू मानव, राष्ट्रीय अवार्डी सुभाष ढिगाना, ओमप्रकाश चौहान, प्रवीण दुग्गल मौजूद रहे।




खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...