Monday, 19 March 2018

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी

जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक प्रदेश में 177 त्रिवेणी खुद लगवा चुकी हैं। संतोष यादव का टारगेट 1000 त्रिवेणी लगाने का है। 
पेशे से वकील संतोष यादव पर प्रदेश में जिला मुख्यालयों और दूसरे शहरों तथा कस्बों में त्रिवेणी लगवाने का एक जुनून सा सवार है। उन्होंने शनिवार को जींद में 177 वीं त्रिवेणी इनैलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के हाथों से लगवाने का काम किया। त्रिवेणी को लेकर संतोष यादव का कहना है कि यह 3 पौधों का ऐसा संगम है, जो पर्यावरण की सबसे ज्यादा रक्षा करता है और वायुमंडल में केवल आक्सीजन छोड़ता है। आक्सीजन भी 24 घंटे त्रिवेणी से मिलती है। उनका कहना है कि बआज धरती पर मानव जीवन के पर्यावरण और ग्लोबल वार्मिंग से बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस खतरे से निपटने का केवल एक जरिया है और वह है ज्यादा से ज्यादा संख्या में पौधे लगाना। पौधों में भी त्रिवेणी सबसे बढिय़ा मानी गई है और यही कारण है कि उन्होंने त्रिवेणी लगाने को लेकर एक मुहिम शुरू की है। मुहिम के तहत वह अब तक 177 त्रिवेणी लगा चुकी हैं। उनका टारगेट 1 हजार त्रिवेणी लगाने का है। जब यह टारगेट पूरा हो जाएगा तो दूसरे लोगों को भी इससे पौधारोपण को लेकर बड़ी पे्ररणा मिलेगी। यादव के अनुसार पौधों के बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। 

Sunday, 18 March 2018

जींद महिला थाना महिलाओं की उम्मीदों पर उतर रहा खरा


3 साल, 3719 शिकायत, 3372 का समाधान, 338 पर केस दर्ज

यह है जींद के महिला पुलिस थाना का रिकार्ड 
जींद।  3 साल, 37 शिकायत, 3372 का समाधान और 338 पर केस दर्ज। यह है जींद के महिला पुलिस थाने का रिकार्ड, जिसे महिलाओं को जल्द इंसाफ और राहत दिलवाने के लिए बनाया गया है। 
जींद में 28 अगस्त 2015 को महिला पुलिस थाना अस्तित्व में आया था। तब से लेकर अब तक महिलाओं को न्याय दिलाने में थाना कारगर भूमिका निभा रहा है। अब तक महिला पुलिस थाना में 3710 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 338 शिकायतों पर माम
ले दर्ज किए जबकि अन्य शिकायतों का आपसी बातचीत से महिला थाना पुलिसकर्मियों द्वारा समझौता करवा दिया गया। महिला थाने में अब तक प्राप्त 3719 शिकायतों में 3372 का समाधान करवाया गया है। महिलाओं को पुलिस थानों में अपनी शिकायत दर्ज करवाने में किसी प्रकार शर्म और परेशानी नहीं हो, इस उद्देश्य से महिला पुलिस थाने खुलवाए गए थे। इससे पहले पुरूषों के सामने अपनी शिकायत दर्ज करवाने में कई तरह की परेशानियों का सामना महिलाओं को करना पड़ता था। वह पुरूषों के सामने अपनी शिकायत को दर्ज करवाने और आपबीती को बताने में शर्माती थी। 
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महिला हैल्प लाइन पर अब तक 16340 काल प्राप्त
महिला हैल्प लाइन भी महिलाओं की सुरक्षा के लिए कारगर साबित हुई। शुरूआती दौर से अब तक महिला हैल्प लाइन पर शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। महिला हैल्प लाइन से वर्ष 2015 से अब तक महिला पुलिस थाना को 16340 कॉल आई। हैल्प लाइन के माध्यम से आई 16340 काल में से 5681 शिकायतों पर मामला दर्ज हुआ। साल 2015 में 4333 कॉल आई जबकि 1364 शिकायतें हैल्प लाइन से मिली। इसी तरह वर्ष 2016 में 3635 कॉल महिला हैल्प लाइन पर आई और 1167 काल पर शिकायत दर्ज हुई। वर्ष 2017 में महिला हैल्पलाइन को 6966 काल मिली और 2829 काल पर शिकायत दर्ज हुई। इसी तरह वर्ष 2018 में अब तक महिला हैल्प लाइन को 1406 कॉल आई और इनमें से  321 पर मामले दर्ज हुए। 
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महिलाएं अपराध के सामने नहीं झुकें : संतोष
महिला पुलिस थाना प्रभारी संतोष ने कहा कि महिलाएं अपने ऊपर किसी प्रकार के अपराध को कभी बर्दाश्त नहीं करें। अगर कोई व्यक्ति घर, परिवार या फिर समाज में महिलाओं के आत्मसम्मान के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश करे तो महिलाओं को तुरंत ऐसे असामाजिक व्यक्ति के खिलाफ महिला थाने में आकर अपनी शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। इस पर महिला महिला हैल्पलाइन नंबर 1091 पर भी कॉल कर सकती हैं। इससे भी पीडि़त महिला को न्याय दिलाने का काम किया जाता है। महिला थाने में आने वाली शिकायत का प्रथम प्रयास बातचीत से समझौता करवाने का होता है, लेकिन फिर भी बात सिरे नहीं चढ़ती तो वह  तुरंत प्रभाव से पीडि़ता की शिकायत पर मामला दर्ज कर दिया जाता है। 

युवा सोच और युवा जोश से बदल रही जींद की सूरत

पीएम मोदी की बात डीसी अमित खत्री पर हो रही सही साबित

जींद, जींद के युवा डीसी अमित खत्री की युवा सोच और युवा जोश से जींद की सूरत तेजी से बदल रही है। तकनीकी रूप से जींद जिला अब प्रदेश के अनेक जिलों को पीछे छोड़ रहा है और इस क्षेत्र में जींद के माथे से पिछड़ेपन का दाग अब मिट रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपायुक्तों को लेकर कही गई बात जींद में डीसी अमित खत्री पर एकदम सही साबित हो रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को यह कहा कि जिलों में उपायुक्त उम्र दराज अधिकारी नहीं होने चाहिएं। जिलों में इन पदों पर युवा अधिकारी नियुक्त हों तो वह ज्यादा एनर्जी के साथ काम करते हैं। प्रधानमंत्री की यह बात जींद में डीसी अमित खत्री पर एकदम सही साबित हो रही है। जब से युवा आईएएस अधिकारी अमित खत्री ने जींद में डीसी का पद संभाला है, उन्होंने अपनी युवा सोच और युवा जोश से जींद की सूरत बदलनी शुरू की है। पहली बार उन्हें किसी जिले में उपायुक्त के पद पर लगाया गया है। 2012 बैच के इस आईएएस अधिकारी ने तकनीकी रूप से जींद को प्रदेश के अग्रणी जिलों में शुमार करने में अपनी सारी एनर्जी लगाई है। इसी का नतीजा है कि जींद का तमान रैवेन्यू रिकार्ड अब कप्यूटराइज्ड होने जा रहा है। यह खुद में बहुत बड़ा ककाम है और इसे करवाने का मादा डीसी अमित खत्री ने दिखाया। इसी तरह जींद में जीआईएस लैब स्थापित होना भी युवा डीसी की सोच का नतीजा है। इस तरह की लैब वाला जींद प्रदेश का महज चौथा जिला है। जीआईएस लैब से जींद के विकास को नई गति मिलेगी। हाल ही में 30 लाख रूपए की लागत से बनी जीआईएस लैब को प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने जनता को समर्पित किया। जिले के ई-दिशा केंद्रों की सूरत बदलने जैसे बड़े कदम भी डीसी अमित खत्री ने उठाए हैं। कंप्यूटर लिटरेसी बस भी जल्द जींद में आ रही है। इसे भी डीसी अमित खत्री ने जींद जिले में रोजगार के लिए सबसे अहम मानते हुए जिला इनोवेशन फंड से इसके लिए लगभग 38 लाख रूपए की राशि का प्रावधान किया है। कंप्यूटर लिटरेसी बस को लेकर डीसी अमित खत्री का मानना है कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। अब रोजगार सरकारी या निजी, जिस भी क्षेत्र में चाहिए, इसके लिए कंप्यूटर लिटरेसी जरूरी है। 

शहर के कचरे से कम्पोस्ट खाद की योजना 
डीसी अमित खत्री ने शहर के गीले और ठोस कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाने की योजना भी हाथ में ली है। गुरू ग्राम में नगर निगम के प्रशासक रहते अमित खत्री ने वहां कचरे से कम्पोस्ट खाद बनते देखी थी। लगभग 2 लाख की आबादी वाला जींद शहर हर रोज 80 टन ठोस और इससे कहीं ज्यादा गीला कचरा उगलता है। कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाने को लेकर उन्होंने शहर के 2 वार्डो 14 और 16 में काम शुरू कर वा दिया है। यहां बनने वाली कम्पोस्ट खाद को कृषि और बागवानी विभाग को दिया जाएगा, ताकि वह इसका इस्तेमाल अपने प्लांटों में कर सकें । यह पायलट प्रोजैक्ट सफल रहता है तो फिर 15 अगस्त तक शहर के तमाम 31 वार्डो में कचरे से कम्पोस्ट खाद बनाकर उसे किसानों को बेचना शुरू किया जाएगा। इस योजना को लेकर डीसी अमित खत्री का कहना है कि शहर के कचरे का इससे बेहतर इस्तेमाल नहीं हो सकता। दक्षिण भारत में कुछ जगह कचरे का कम्पोस्ट खाद बनाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। इससे एक तो पर्यावरण साफ रहता है और दूसरे गंदगी भी नहीं फैलती। तीसरा फायदा यह है कि खेतों और बागों के लिए कम्पोस्ट खाद उपलब्ध हो जाती है। 
2 साल से भी ज्यादा समय से अधर में लटकी सीसीटीवी लगाने की योजना को चढ़ाया सिरे
2 लाख की आबादी वाले जींद शहर को सुरक्षा के लिए तीसरी आंख की पहरेदारी में लाने की योजना 2 साल से भी ज्यादा समय से अधर में लटकी हुई थी, जब मुकेश देवी नगर परिषद की प्रधान थी, तब शहर में 50 सीसीटीवी कैमरे अहम और संवेदनशील स्थानों पर लगाए जाने की योजना बनी थी। इस योजना की फाइल 2 साल से भी ज्यादा समय तक धूल फांकती रही। अब डीसी अमित खत्री ने इस अहम फाइल को खंगालते हुए इसकी धूल हटाई। योजना की तमाम खामियों को दूर किया और सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए लगभग 4 करोड़ रूपए की राशि को मंजूरी दिलवाई। 4 करोड़ रूपए की लागत से शहर के 20 चौराहों पर हाई क्वालिटी के 80 सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। इससे अपराध रोकने में मदद मिलेगी और शहर की सुरक्षा मजबूत होगी। पुलिस को भी इससे काफी मदद अपराध रोकने में मिलेगी। 

सेहतमंद रहना है तो खाना सीखो और भोजन में करो सुधार

 500 से ज्यादा लोगों को दिया स्वस्थ रहने का यह मूल मंत्र
नैचुरल लाइफ स्टाइल संस्था ने हिंदू कालेज में लगाया शिविर
जींद
सेहतमंद रहना है और बीमारियों से खुद को और अपने नजदीकियों को दूर रखना है तो खाना सीखो और अपने भोजन में सुधार करो। यह करने से सेहत बनती है और पैसा बचता है। 

यह मूल मंत्र दिया रविवार को नैचुरल लाइफ स्टाइल संस्था ने। इस संस्था ने रविवार को जींद के हिंदू कन्या कालेज में नैचुरल लाइफ स्टाइल पर एक शिविर का आयोजन किया। शिविर में संस्था के आचार्य मोहन गुप्ता खुद दिल्ली के रोहिणी से चलकर पहुंचे। हिंदू कन्या कालेज के बृजमोहन सिंगला मैमोरियल आडिटोरियम हाल में 500 से ज्यादा लोग शिविर में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। लगभग खचाखच भरे इस आडिटोरियम हाल में आचार्य मोहन गुप्ता ने लोगों को खाना सीखो, भोजन में सुधार करो का मूलमंत्र देते हुए कहा कि यह करने से ही स्वस्थ रहा जा सकता है। इसमें उन्होंने कहा कि बिना दवा जीवन जीने की कला यह है कि आपके भोजन में नींबू, मिर्च और नमक का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। नमक को लेकर उन्होंने कहा कि केवल सेंधा नमक और वह भी बेहद कम मात्रा में भोजन में लिया जाए। आचार्य मोहन गुप्ता ने कहा कि भोजन पूरी तरह चबाकर खाना चाहिए। जो लोग जल्दी में और बिना चबाए भोजन करते हैं, वह कई तरह की बीमारियों को खुद न्यौता देते हैं। आचार्य मोहन गुप्ता ने लोगों को बताया कि कैसे भोजन में सुधार किया जाए और भोजन कैसे लेना चाहिए। इन 2 बातों में ही उन्होंने स्वस्थ जीवन के तमाम सार बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति इस नैचुरल लाइफ स्टाइल को अपना लेगा, वह बीमारियों और डाक्टरों से सदा दूर रहेगा। 

बोला ही नहीं, करके भी दिखाया
हिंदू कन्या कालेज में आयोजित नैचुरल लाइफ स्टाइल शिविर में आचार्य मोहन गुप्ता और यहां इसके आयोजक रामबिलास मित्तल आदि ने खाना सीखो और भोजन में सुधार करो को लेकर केवल मंच से बोला ही नहीं बल्कि इसे करके भी दिखाया। शिविर में पहुंचे लोगों के लिए खीरा, ककड़ी, टमाटर, कच्चा नारियल, हरा धनिया का सलाद बनाकर खिलाया गया। इसमें दिखाया गया कि सलाद किस तरह बनाया जाए। उसे किस तरह से खाया जाए। इसी तरह नैचूरल स्टाइल का भोजन भी तैयार करवाया गया। यह भोजन किस तरह से बना और इसे किस तरह से खाया जाए, इसे लेकर भी शिविर में आए लोगों को पूरी जानकारी दी गई। इस शिविर में भाग लेने के बाद कई लोगों ने कहा कि उन्हें पहली बार यह पता चला है कि जिस भोजन को वह पौष्टिक मानकर ले रहे थे, उसमें जहर भी रहता है। अब इस जहर से बचने की जानकारी शिविर के माध्यम से उन्हें मिली है। सफीदों रोड पर सुजूकी शोरूम के संचालक अनिल जैन ने कहा कि पहली बार उन्हें यह पता चला कि भोजन कैसा हो और उसे कैसे खाया जाए। अब तक भोजन को लेकर जो चल रहा था, वह सही नहीं था। इस तरह के शिविर लगातार लगते रहने चाहिएं। हिंदू कन्या कालेज के प्रधान अंशुल सिंगला ने भी कहा कि शिविर में स्वस्थ जीवन के बारे में अहम जानकारी मिली। भोजन कैसा हो और कैसे खाया जाए, इसी में सब कुछ है। पता पहली बार चला है। 
रामबिलास मित्तल ने कहा, नैचुरल लाइफ स्टाइल से बची जिंदगी
इस शिविर के आयोजक रामबिलास मित्तल ने कहा कि उन्हें दिल की बीमारी थी। साथ में शुगर भी थी। 2 बार वह स्टंट डलवा चुका था और डाक्टरों ने तीसरी बार फिर स्टंट डलवाने के लिए बोल दिया था। आचार्य मोहन गुप्ता के नैचुरल लाइफ स्टाइल के जरिये उन्होंने भोजन में सुधार किया और भोजन कैसे लिया जाए, इसे जाना तो तीसरी बार स्टंट डलवाने की नौबत नहीं आई। अब वह सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने केवल अपने भोजन में सुधार किया और खाना खाने का सही तरीका जाना। 

Wednesday, 17 January 2018

जरूरत से ज्यादा जल सेहत के लिए घातक : डा. अरोड़ा

शुगर, बीपी के मरीजों को लंबी उम्र चाहिए तो कम से कम पानी लें

जींद : स्वस्थ रहने को लेकर आम धारणा यह है कि ज्यादा से ज्यादा जल गटका जाए। ज्यादा से ज्यादा पानी पीने को स्वस्थ रहने के लिए बहुत जरूरी बताया जा रहा है। इस धारणा के ठीक विपरीत दिल्ली के गंगाराम अस्पताल के सीनियर कन्सलटैंट एमडी (आयुष) गोल्ड मैडलिस्ट और शोधकर्ता डा. परमेश्वर अरोड़ा का यह कहना है कि शरीर की जरूरत से ज्यादा जल सेहत के लिए घातक है। शुगर और हाई बीपी के मरीजों को लंबी उम्र चाहिए तो वह कम से कम पानी लें। इसके लिए डा. अरोड़ा वेदों और चरक को आधार बता रहे हैं। वह अब तक अपनी इस थ्यूरी को लेकर कई यूरोपिय देशों और चाइना आदि में अपनी बात रख चुके हैं। पिछले डेढ़ साल में अपनी इस मुहिम पर वह अपनी जेब से लगभग 28 लाख रूपए की राशि लोगों को जल के सेवन को लेकर जागरूक करने पर खर्च कर चुके हैं। डा. परमेश्वर अरोड़ा मंगलवार को इस सिलसिले में जींद पहुंचे। उन्होंने लोक निर्माण विश्राम गृह में इस मसले पर अपनी बात बेहद प्रभावशाली तरीके से रखते हुए कहा कि आज जहां संपूर्ण विश्व स्वास्थ्य लाभ के लिए अधिक से अधिक जल पीने की वकालत कर रहा है वहीं अपने पौराणिक वेदों एवं आयुर्वेद के विस्तार से अध्ययन करने पर बहुत ही हैरान कर देने वाला तथ्य सामने आता है। डा. अरोड़ा ने कहा कि सभी शास्त्र एक मत होकर अच्छे स्वास्थ्य के लिए किसी भी व्यक्ति को न्यूनतम पर्याप्त मात्रा में ही जल पीने का निर्देश देते हैं। साथ ही अनेकों ऐसे रोग भी हैं, जहां जल सेवन को निषेध करते हुए असहनीय होने पर ही जल अल्प मात्रा में पीने का विधान बतलाया गया है। स्पष्ट है कि जल सेवन को लेकर आधुनिक विचार एवं शास्त्रोक्त निर्देषों में विरोधाभास देखने को मिलता है।
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आज कल कहा जाता है, कि यदि पेट की बीमारियों जैसे कब्ज, एसिडिटी एवं गैस आदि को ठीक करना है तो खूब पानी पियो। शरीर का विशुद्धिकरण करना है तो खूब पानी पियो। पेशाब में जलन होती हो तो खूब पानी पियो। मोटापा कम करना है तो खूब पानी पियो। डा. अरोड़ा ने कहा कि इन परिस्थितियों में अपनी शक्ति एवं जरूरत से बढ़ाकर पिया गया पानी कैसे मदद करता है, इसकी कोई वैज्ञानिक विवेचना पढऩे या सुनने को नहीं मिल पाती। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, आयुर्वेद शास्त्रों के अनुसार इन परिस्थितियों में जल का अधिक मात्रा में सेवन शरीर को लाभ नहीं बल्कि नुकसान पंहुचाता है। पेट के सभी रोग कब्ज, एसिडिटी इत्यादि पाचक अग्नि की मंदता के कारण उत्पन्न होते हैं। अत: इन रोगों में पाचक अग्नि को बढ़ा कर ही इन रोगों से पूर्ण मुक्ति पाई जा सकती है। डा. अरोड़ा ने ज्यादा जल पीने की वकालत करने वालों से सवाल किया कि ऐसे में अग्नि के प्रबल विरोधी जल का अत्याधिक प्रयोग, कैसे हमारे अग्नि बल को बढ़ाएगा और कैसे हमें इन बीमारियों से मुक्ति दिलाएगा। कहीं ऐसा तो नहीं कि इन रोगों में क्षणिक लाभ के लिए लिया गया अत्याधिक पानी ही, पेट के इन सामान्य रोगों को कभी नहीं ठीक होने वाले असाध्य रोग बना देता हो।
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प्यास लगने पर भी एक साथ अधिक जल का सेवन बना सकता है आपको रोगी
डा. अरोड़ा ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार किसी भी स्वस्थ व्यक्ति को ग्रीष्म (मई मध्य से जुलाई मध्य तक का समय) एवं शरद ऋतु (सितम्बर मध्य से नवम्बर मध्य तक का समय) में सामान्य मात्रा में तथा शेष अन्य ऋतुओं में न्यूनतम पर्याप्त मात्रा में जल पीना चाहिए। प्यास लगने पर भी एक साथ अधिक मात्रा में जल पीने की प्रवृति यदि किसी व्यक्ति की होती है तो पिया गया यह जल पित्त एवं कफ  रोगों जैसे अपच, आलस्य, पेट का फूलना, जी मिचलाना, उल्टी लगना, मुंह में पानी आना, शरीर में भारीपन और यहां तक की खांसी, जुकाम एवं श्वास के रोग को उत्पन्न करता है। विशेषत: बुखार के रोगी को तो बहुत ही संयम के साथ अल्प मात्रा में बार-बार गरम पानी का ही सेवन करना चाहिए।
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शुगर, बीपी के मरीजों के लिए जरूरत से ज्यादा जल घातक
डा. अरोड़ा ने कहा कि शुगर और बीपी के मरीजों के लिए जरूरत से ज्यादा जल घातक साबित हो सकता है। ऐसे मरीजों के दिल पर जो दबाव बनता है, उसे शरीर पेशाब के रूप में बाहर निकालता है और ऐसे मरीज अगर जरूरत से ज्यादा जल का सेवन करेंगे तो उनकी दिक्कत निश्चित रूप से बढ़ेगी। बाक्स
सही विधि से लिया गया जल ही अमृत अन्यथा शरीर के लिए विष के बराबर 
डा. अरोड़ा का मानना है कि शास्त्रों के अनुसार जल को अकेले लिया जाए या औषधियों से सिद्ध करके लिया जाए, उबाल कर लिया जाए अथवा शीतल लिया जाए, या सिर्फ  गरम करके लिया जाए, शरीर की अवस्था के अनुसार ऐसा विचार करके, सही मात्रा में, सही समय पर एवं सही विधि से लिया गया जल अमृत के समान गुणकारी होता है अन्यथा शरीर में विषाक्तता को उत्पन्न करता है। स्पष्ट है कि आयुर्वेद में गलत विधि से पिए गए जल को विष तक की संज्ञा दी गई है।
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अधिक जल सेवन से शरीर में पेट के रोग, मधुमेह, रक्तचाप, एवं किडनी इत्यादि से संबंधित अनेक रोग होने का खतरा 
डा. अरोड़ा के अनुसार आयुर्वेद यह मानता है कि अधिक जल के सेवन से शरीर में पेट के रोग, मधुमेह, रक्तचाप, एवं किडनी इत्यादि से संबंधित अनेक रोग उत्पन्न हो सकते हैं। अधिक जल सेवन किस प्रकार से शरीर में मधुमेह, रक्तचाप, किडनी की बीमारी इत्यादि में कारण बन सकता है और कैसे शरीर के अन्य अंगो कों नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, इसका ‘जल-अमृत या विष?’ नामक पुस्तक में आयुर्वेदिक एवं आधुनिक आधार पर विस्तार से स्पष्टीकरण दिया गया है। 
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जरूरत के अनुसार पानी लिया जाए तो हर रोज बच सकता है देश में 1500 करोड़ लीटर पानी 
डा. अरोड़ा का कहना है कि देश की 25 प्रतिशत जनता भी अगर शरीर की जरूरत के अनुसार पानी पीना शुरू करे तो हर रोज लगभग 1500 करोड़ लीटर पानी बचाया जा सकता है। इससे जल संरक्षण तो होगा ही, साथ ही लोग बीमार भी नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि 150 साल तक भारत के लोगों ने विदेशियों का स्वास्थ्य के मामले में अनुकरण किया है। नतीजा यह है कि देश के लोगों के स्वास्थ्य और शारीरिक ताकत का लेवल शून्य पर आ गया है। महाराणा प्रताप जैसे बली और महारानी लक्ष्मीबाई जैसी ताकतवर महिलाएं अब देश में नहीं हैं। उस समय न तो बड़े चिकित्सक थे और न ही बड़े अस्पताल थे।  केवल खान-पान और शारीरिक मेहनत से ही लोग स्वस्थ रहते थे। आयुर्वेद और चरक जैसे ग्रंथों में स्वस्थ रहने के जो तरीके बताए गए थे, केवल उन्हीं का पालन वह लोग करते थे। अब समय आ गया है कि भारत के लोग स्वस्थ रहने और खासकर स्वस्थ रहने के लिए ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की विदेशियों की बातों में नहीं आकर आयुर्वेद और चरक जैसे ग्रंथों को मानें और शरीर की जरूरत के अनुसार ही जल का सेवन करें। 

Thursday, 4 January 2018

भाग दौड़ की जिंदगी में सबकुछ डिस्आर्डर

तनावपूर्ण जिंदगी दे रही साइको को जन्म
गजेटस, महत्वकांक्षा, एकाकीपन मुख्य कारण

जींद
भाग दौड़ की जिदंगी तनावपूर्ण हो गई है। जिसके चलते मनुष्य हर समय तनाव में रहता है। यदि समय रहते काबू न किया जाए तो एक समय के बाद मानसिक विकार या मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर में तब्दील हो जाता है। मानसिक स्वास्थ्य के अंतर्गत कई तरह के विकार आते हैं। जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूरी तरह प्रभावित करते हैं। बीमारी में तब्दील होने पर व्यक्तित्व साइको हो जाता है। जिसमे दिमागी तौर पर निर्णय लेने की क्षमता समाप्त हो जाती है और व्यवहार भी अजीब हो जाता है। साइको व्यक्ति को पता नहीं चल पाता की वह क्या कदम उठा रहा है। आंतरिक रूप से शक करना, फिर हिंसक हो जाना साइको के लिए आम बात है। जिसके लिए हालात, परिस्थितियां, स्टेटस, बीमारी समेत सामाजिक पहलू मुख्य कारण हैं। तनावपूर्ण जिंदगी में 100 में से 60 व्यक्ति मानसिक विकार से ग्रस्त हो चुके हैं। बढ़ते मानसिक बीमारी के चलते विश्व स्वास्थ्य संगठन दस अप्रैल से एक वर्ष के लिए डिप्रेशन वर्ष के रूप में मना रही है। ताकि लोग मानसिक रूप से स्वस्थ रहें। पलवल में सेवानिवृत लेफ्टिनेंट द्वारा छह लोगों की हत्या उसी बीमारी का कारण रही है। 
लाइफ में बढ़ा टेक स्ट्रेस
लाइफ स्टाइल में टेक स्ट्रेस की बीमारी बढ़ी है। भाग दौड़ की जिंदगी, जीवन शैली, खान-पान, रहन सहन में बदलाव का सीधा असर दिमाग पर पड़ता है। जिसके चलते तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। जीवनशैली में हुए बदलाव से एकाकी जीवन में बढ़ा है। जिससे व्यक्ति समाज तथा परिवार से दूर होता जा रहा है। जिसके परिणामस्वरूप डिसऑर्डर के हालात पैदा हो रहे हैं। आज की जीवनशैली में गैजेट्स की अहमियत को नकारा नहीं जा सकता है। बेसिक जरूरतों के लिए मोबाइल फोन व लैपटॉप का इस्तेमाल हर किसी की जरूरत बन गया है। गैजेट्स से निकलने वाली सूक्ष्म तरंगें कॉर्टिकल दिमाग की कार्य प्रणाली पर गंभीर असर डालती हैं। जिससे दिमाग की तर्क क्षमता भी प्रभावित होती है। इससे मन में तनाव होने लगता है, जिसे टेक स्ट्रेस का नाम दिया गया है और अनेक मानसिक विकार पैदा हो जाते हैं जो बाद में मानसिक बीमारी में तब्दील हो जाते हैं। 
मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर के प्रकार  
1. अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर  
इस डिस्ऑर्डर में व्यक्ति का मन काम में नहीं लगता है, या तो वह जरूरत से ज्यादा एक्टिव दिखेगा या एकदम नीरस। ऐसा व्यक्ति अकेले बैठकर घंटों बिता सकता है। ऐसा अधिकतर बच्चों में होता है जो कि बड़े होने तक भी बना रह सकता है।
2. एंजायटी या पैनिक डिस्ऑर्डर 
ऐसा व्यक्ति किसी घटना विशेष के कारण आहत होता है जो कि दोबारा उससे संबंधित चीजों या स्थान को देखने पर अनियंत्रित व्यवहार करता है।
3. बाईपोलर डिस्ऑर्डर  
यह एक लंबे समय तक बने रहने वाला डिस्ऑर्डर है। बचपन से ही किसी चीज को लेकर दुखी या परेशान रहना दिमाग में घर कर जाता है जो कि बड़े होने तक भी नहीं निकलता।
4. तनाव 
इसके तहत कई तरह की परिस्थितियां शामिल हैं। व्यक्ति के तनाव में रहने से उसके जीवन के प्रति नजरिया नीरस हो जाता है और किसी भी कार्य को करने में मन नहीं लगता।
5. सिग्जोफ्रिनिया 
यह डिस्ऑर्डर साधारण नहीं है। सिग्जोफ्रिनिया होने पर व्यक्ति को न होने वाली स्थितियों का भी आभास होता है। तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती है। ऐसा व्यक्ति हर लोगों को शक की दृष्टि से देखता है। हालांकि कभी-कभी ऐसे व्यक्ति एकदम सामान्य व्यवहार करते हैं जिनसे इनकी बीमारी का पता लगाना भी मुश्किल होता है।
6. ईटिंग डिस्ऑर्डर 
इसके तहत व्यक्ति या तो बहुत ज्यादा खाता है या बहुत कम। कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें पतले होते हुए भी खुद के मोटे का शक होता है और वो लोग खाना बिल्कुल छोड़ देते हैं। ऐसे लक्षणों को एनोरेक्सिया नर्वोसा कहते हैं।
7. सोने और जगने से संबंधित डिस्ऑर्डर 
इस मानसिक विकार में व्यक्ति को लाख चाहने पर नींद नहीं आती। कई बार सोने के लिए नींद की गोलियों का इस्तेमाल करते हैं जो कि मस्तिष्क पर और भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इसके उलट कई व्यक्ति जरूरत से ज्यादा सोते हैं।
8. पर्सनेलिटी डिस्ऑर्डर 
इस डिस्ऑर्डर में व्यक्ति खुद को दूसरों से कमतर आंकता है। दूसरों के सामने आने में हिचक महसूस करता है। बात करने या साथ किसी कार्य को करने से सहज महसूस करता है। ऐसे व्यक्ति कई बार प्रतिभावान होते हुए भी अपना प्रतिभा को दूसरों के सामने नहीं ला पाते हैं।

मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर के कारण 

मानसिक विकारों का आमतौर पर कोई एक खास कारण नहीं होता बल्कि इनके लिए बॉयोलॉजिकल, सायक्लॉजिकल और आसपास के वातावरण का प्रभाव जिम्मेदार होता है। यदि किसी को परिवार में मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर हो तब भी यह उसकी अगली पीढ़ी में जाए ऐसा संभव है। बच्चे को किस माहौल में बड़ा किया गया है और उसके साथ कैसा व्यवहार रहा है यह सब भी व्यक्ति की आने वाली मेंटल इलनेस का कारण बनती है।
मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर के लक्षण 
1. यदि व्यक्ति हमेशा निराश और हताश नजर आता हो।
2. अकेले रहने की आदत हो, किसी के आते ही व्यक्ति दूसरी जगह बदल लेता हो।
3. व्यक्ति का व्यवहार अचानक आक्रामक हो जाता हो।
4. किसी भी घटना पर इमोशन एक जैसे रहते हैं।
5. यदि कोई व्यक्ति हमेशा फेंटेसी मे रहता हो और रियलिटी न सुहाती हो।
6. खाने पीने की आदतें भी असंतुलित हों, या तो बहुत ज्यादा खाता हो या बिल्कुल कम।
मेंटल हेल्थ डिस्ऑर्डर के शारीरिक लक्षण 
1. एकदम से वजन का बढऩा या कम होना।
2. असामान्य खाने की आदतें।
3. महिलाओं में रक्त की कमी।
4. एंजायटी महसूस करना।
5. आंखें हमेशा सवाल करती हुई नजर आना।
6. चेहरा बुझा हुआ और बेजान नजर आना।
पहचानना है जरूरी
आज की व्यस्त व प्रतिस्पर्धा वाली जीवनशैली में बच्चों से लेकर बड़ों तक के मन पर अलग-अलग प्रकार का तनाव हावी रहता है। यहां इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि विभिन्न वजहों से उपजे तनाव को पहचानने व उसे दूर करने के तरीके भी अलग होते हैं। 
क्या हैं इसके लक्षण
1. गैजेट्स से जऱा भी दूरी बर्दाश्त न होना।
2. आसपास मोबाइल फोन न होने पर भी उसकी रिंगटोन या नोटिफिकेशन टोन सुनाई देना।
3. सोते समय भी फोन आसपास रखना या गाने सुनने, विडियो देखने की आदत होना। 
4. सिर में अकसर दर्द होना या बेचैनी महसूस होना।
5. हर समय रोगी को शक होता है कि परिजन और संगी-साथी रोगी के खिलाफ हैं और वे कोई साजिश रच रहे हैं।
6. रोगी को हर वक्त महसूस होता है कि सभी उसके बारे में बातें करते हैं या उसे घूर रहे हैं।
7. रोगी को ऐसा भी लगता है कि जैसे कुछ लोग उसके ऊपर जादू-टोना करवा रहे हैं या फिर उसके खाने में जहर मिलाया जा रहा है।
8. रोगी अपने पति या पत्नी के चरित्र व चाल-चलन पर बेबुनियाद ही शक करता है।
9. शक के चलते रोगी अपनों से ही कटा-कटा रहता है और अक्सर अपने बचाव में दूसरों के प्रति आक्रामक हो जाता है या बार-बार पुलिस को भी बुला लेता है।
10. शराब, गांजा, भांग व कोकीन का नशा करने से भी शक व वहम स्थायी रूप से पैदा हो जाता है।
क्या कहते हैं मनोरोग विशेषज्ञ
मनोरोग विशेषज्ञ डा. विकास फौगाट ने बताया कि आजकल जिंदगी तनावपूर्ण हो गई है। क्रिया कलापों को लेकर आदमी हर समय तनाव में रहता है। शुरू में मानसिक विकार होते हैं जो बाद में मानसिक बीमारी में बदल जाते हैं। मानसिक बीमारी मस्तिष्क में रसायनों की कमी के चलते भी होते हैं। ऐसी मानसिक बीमारियों पर दवाईयों तथा काऊंसलिंग से निपटा जा सकता है। मनो रोगी को तनावपूर्ण माहौल से दूर रखने तथा सौहार्दपूर्ण माहौल देकर ठीक किया जा सकता है। जिसमे योगा, मैडीटेशन तथा रहन सहन में बदलाव करना जरूरी है ओर एकांत से हटकर सामाजिक कार्यो में व्यस्त कर हालातों से निपटा जा सकता है। 


शहर में स्वच्छता को लेकर निकाली जागरूकता रैली

पैट्रोल पंप मालिकों ने शौचालयों को सार्वजनिक किया
शहर में स्वच्छता रैंकिंग सुधरने की जगी आस

जींद 
नगर परिषद द्वारा जींद जिला में स्वच्छता की रैंकिंग को सुधारने को लेकर अब सार्थक परिणाम सामने आने लगे हैं। नगर परिषद द्वारा चलाई जा रही मुहीम के तहत पैट्रोल पंप मालिकों ने शौचालयों को जहां सार्वजनिक कर दिया है वहीं पर पार्षदों के अलावा सामाजिक संगठनों का सहयोग भी नगर परिषद को मिल रहा है। बुधवार को नगर परिषद द्वारा जागरूकता रैली निकाली गई और इसमें भारी संख्या में सामाजिक संगठनों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया। लोग शहर के बाजारों में स्वच्छता का संदेश देने वाली तख्तियां और अन्य प्रचार सामग्री हाथों में उठाए कदम से कदम मिलाकर चलते नजर आए। बुधवार को नगर परिषद द्वारा निकाली गई जागरूकता रैली का नेतृत्व नगर परिषद के ईओ डॉ. एसके चौहान, नगर परिषद की प्रधान पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी और नगर परिषद के एमई सतीश गर्ग ने किया। जागरूकता रैली शहर के मुख्य बाजारों से गुजरी। रैली में शामिल लोगों ने दुकानदारों से स्वच्छता की अपील की। लोगों ने दुकानदारों को स्वच्छ मैप एप डाऊन लोड करने के लिए कहा। 

पैट्रोल पंप मालिकों ने शौचालयों को किया सार्वजनिक घोषित

नगर परिषद को स्वच्छता सर्वेक्षण में अधिक से अधिक दिलाने के लिए जींद के पैट्रोल पंप मालिकों ने अपना सहयोग दिया है। जींद के 16 पैट्रोल पंप मालिकों ने नगर परिषद को सूची भेजते हुए पैट्रोल पंपों पर बने शौचालयों को सार्वजनिक शौचालय घोषित किया है। इन पैट्रोल पंपों में पुराना हांसी रोड का अमी लाल जैन एंड कंपनी, जैन सर्विस स्टेशन, भिवानी रोड का मोती राम एंड सन्स, रोहतक रोड का मलिक पैट्रोल पंप, हांसी रोड का आईवीपी आटो सर्विस, राजकीय कालेज के पास का पैट्रो केयर, जिला जेल के पास का महेश कुमार एंड ब्रैदर्स, सफीदों गेट का एचपी मोहित पैट्रोल पंप, रोहतक रोड का चौधरी फिलिंग स्टेशन, रोहतक रोड बाईपास का हाईवे आटो सर्विस, पटियाला चौक के हांसी रोड का क्वालिटी फिलिंग स्टेशन, सफीदों रोड पर गोल्डन हट के पास का मामनराम चांदराम, हांसी रोड का रोहतक पैट्रो केयर, सफीदों रोड का भारद्वाज पैट्रोलियम, उधम सिंह मार्ग का महादेव पैट्रो शामिल हैं। इन पैट्रोल पंप संचालकों ने अपने पैट्रोल पंप पर सार्वजनिक शौचालय के बोर्ड भी लगाए हैं। 
स्वच्छता मैप एप पर तुरंत डाले गंदगी के फोटो 
जागरूकता रैली में शामिल लोगों ने दुकानदारों को स्वच्छता मैप एप के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने दुकानदारों को बताया कि स्वच्छता मैप एप किस प्रकार से डाऊन लोड किया जा सकता है और किस प्रकार से यह काम करता है। स्वच्छता मैप एप पर डाली गई फोटो पर कितने दिन में एक्षन होता है। यदि एक अधिकारी काम नहीं करता तो यह फोटो आगे किस-किस जगह तक जाता है। 
आज जींद पहुंचेगी स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम
वीरवार को केंद्र सरकार की स्वच्छता सर्वेक्षण टीम जींद आएगी। लोगों के मिल रहे सहयोग के बाद नगर परिषद के अधिकारियों के हौंसले बुलंद हो गए हैं। धरातल से लेकर आन लाइन प्रयासों में भी आगे निकलने की कोशिश तेज हो गई है। नगर परिषद प्रशासन द्वारा अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। सामाजिक संस्थाओं के सदस्य भी अलग-अलग तरीकों से इस मुहिम को बल दे रहे हैं। लोगों को अब शहर की रैंकिंग सुधरने की पूरी आस बंधी है। 
इस साल अच्छी रैंकिंग लाने के प्रयास : डॉ. चौहान
नगर परिषद के ईओ डॉ. एसके चौहान ने कहा कि नगर परिषद ने अपनी ओर से अच्छी रैंकिंग लाने के लिए प्रयास तेज किए हैं। सामाजिक संगठनों और गणमान्य लोगों का सहयोग मिल रहा है। पैट्रोल पंप संचालकों ने भी अपना पूरा सहयोग नगर परिषद को दिया है। वीरवार को स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर टीम जींद आ रही है। उम्मीद है कि इस साल अच्छी रैंकिंग आएगी। नगर परिषद और लोगों द्वारा किए गए तमाम प्रयास रंग लाएंगे।

नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र तबाह होते परिवारों को बचाने में जुटे

जिला में चार नशा मुक्ति केंद्र दे रहे हैं सेवाएं
सरकार द्वारा नशा मुक्ति केंद्रों को उपलब्ध करवाई जा रही सहायता राशि

जींद 
लोगों को नशे जैसी बुराई से मुक्त रखने को लेकर राज्य सरकार द्वारा नशामुक्ति योजना लागू की गई है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से लागू की गई इस योजना के तहत राज्य में नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं। गैर सरकारी संगठनों द्वारा संचालित इन केन्द्रों में नशे से ग्रस्त लोगों को इससे मुक्त करने के लिए नि:शुल्क इलाज किया जाता है। जींद जिला में इस योजना के तहत फिलहाल चार नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चलाए जा रहे हैं। जिनके माध्यम से सैंकड़ों लोग इलाज करवाकर समाज की मुख्य धारा में शामिल हो रहे है। 
हर माह बच रहे सैंकडों परिवार तबाह होने से
नशामुक्ति योजना के बारे में अगर यह कहा जाए कि यह योजना हर माह सैंकड़ों तबाह होते परिवारों को बचा रही है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। इस योजना के तहत नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है। इस सहायता से इन केंद्रों में नशे से ग्रस्त लोगों का नि:शुल्क इलाज किया जाता है। यही नहीं केंद्रों में दाखिल होने वाले लोगों को रहने, खाने एवं दवाइयों की सुविधा भी नि:शुल्क प्रदान की जाती है। ये नि:शुल्क सुविधाएं मात्र उन्हीं नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में उपलब्ध करवाई जाती हैं, जिन्हें सरकार द्वारा आर्थिक मदद उपलब्ध करवाई जा रही है। अन्य केंद्रों में कम से कम खर्च पर लोगों को नशामुक्त करने का इलाज प्रदान किया जाता है। 
पार्ट टाइम डॉक्टर की होती है तैनाती
नशे से ग्रस्त लोगों को इस बुराई से छुटकारा दिलवाने के लिए नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों में एक पार्ट टाईम डॉक्टर तैनात होता है। इन केंद्रों में नशे से ग्रस्त लोगों की काउंसलिंग करने को लेकर एक काउंसलर भी नियुक्त किया जाता है। डॉक्टर की सलाह पर ही व्यक्ति को केंद्र में दाखिल किया जाता है और उन्हें दवाइयां इत्यादि दी जाती हैं। जींद जिला में इस योजना के तहत चार नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र चल रहे है, जिनकी क्षमता 15-15 बैड की है। 
नशा मुक्ति केंद्र अनुदान राशि के लिए कर रहे आवेदन
नई सोच नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ने सरकार को अनुदान राशि उपलब्ध करवाने के लिए आवेदन कर दिया है। इसके अलावा रैडक्रॉस स्थित नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ने लाइसैंस नवीनीकरण को लेकर, जुलाना स्थित अमर ज्योति फाऊंडेशन नशमुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र ने भी लाइसैंस नवीनीकरण को लेकर आवेदन जमा कर दिया है। लाइसैंस नवीनीकरण के बाद अगर इन केन्द्रों द्वारा अनुदान राशि के लिए आवेदन किया जाता है तो उनके आवेदन पत्रों को अनुदान राशि प्रदान करने के लिए सरकार को भेज दिया जाएगा।
तीन सदस्यीय कमेटी का किया गया है गठन
नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र सही तरीके से काम कर सके और यहां नशा छोडऩे को लेकर आने वाले लोगों को कोई दिक्कत न हो, इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा भवन एवं सडक़ निर्माण विभाग के कार्यकारी अभियंता को शामिल किया गया है। इस कमेटी द्वारा समय-समय पर नशामुक्ति एवं पुनर्वास केन्द्रों का निरीक्षण कर जायजा भी लिया जाता है। इस कमेटी का दूसरा मुख्य कार्य केंद्रों के लाइसैंस बनवाने के लिए सिफारिश करना भी है। 
सरकार द्वारा केंद्रों को उपलब्ध करवाई जाती अनुदान राशि
नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों को वैसे तो गैर सरकारी संगठन संचालित कर रहे हैं लेकिन सरकार द्वारा नशामुक्ति योजना के तहत अनुदान राशि उपलब्ध करवाई जाती है। मान लो कि एक नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र की क्षमता 15 बैड की है तो उसे हर वर्ष 15 से 2० लाख रुपये की अनुदान राशि उपलब्ध करवा दी जाती है। केंद्रों की बैड क्षमता बढऩे के साथ-साथ अनुदान राशि में भी बढ़ोत्तरी होती रहती है। इस राशि से इन केंद्रों के प्रतिनिधि नशा छोडऩे को लेकर आने वाले लोगों को केन्द्रों में तमाम प्रकार की सुविधाएं प्रदान करवाते हैं। 
क्या कहना है डीसी का 
डीसी अमित खत्री ने कहा कि लोगों को नशे जैसी बुराई से मुक्त करने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही, यह कल्याणकारी योजना हर माह सैंकड़ों की संख्या में लोगों को नशामुक्त करने में अपना अहम योगदान निभा रही है। हर वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस मनाया जाता है। इस दिन नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के प्रतिनिधियों द्वारा लोगों को नशे से दूर रहने के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के प्रतिनिधियों से कहा गया है कि वे इस तरह के जागरूकता कार्यक्रम न केवल अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित करे बल्कि समय- समय पर इन कार्यक्रमों का आयोजन करते रहें।

Wednesday, 3 January 2018


स्वच्छता सर्वेक्षण में भी आगे होगा जींद 
सर्वेक्षण को लेकर नगर परिषद ने कसी कमर
चार को जींद का दौरा करेगी टीम
300
से ज्यादा ने किया स्वच्छता मैप एप डाउनलोड


जींद 
जींद जिला स्वच्छता में सबसे अव्वल हो, इसको लेकर नगर परिषद द्वारा स्वच्छता सर्वेक्षण करवाया जाएगा। इस स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत टीमें शहर का दौरा करेगी और अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी। इस रिपोर्ट के माध्यम से यह आंकलन किया जाएगा कि जींद में स्वच्छता का आंकड़ा किया है। इसके लिए नगर परिषद और सामाजिक संगठनों के सहयोग से शहर में जागरूकता रैली निकाली जाएगी। अब तक 300 से ज्यादा लोग अपने मोबाइल में स्वच्छता मप एप डाउन लोड कर चुके हैं। स्वच्छता के मामले में जींद सबसे अग्रणीय हो इसे लेकर नगर परिषद ने कमर कसी हुई है। पिछले साल भले ही जींद स्वच्छता के मामले में अन्य जिलों से पिछड़ गया हो लेकिन इस बार नगर परिषद का प्रयास है कि जींद सफाई के मामले में प्रदेश में नंबर वन बने। इसके लिए नगर परिषद के अधिकारी खुद अपनी देख-रेख में रात के समय में भी सफाई अभियान चलवा रहे हैं। खुद नगर परिषद के ईओ डॉ. एसके चौहान, नगर परिषद की प्रधान पूनम सैनी के पति जवाहर सैनी, सफाई निरीक्षक अशोक सैनी सहित अन्य अधिकारी रात के समय में शहर के बड़े हिस्से में सफाई अभियान चलाते हैं। रातों-रात जींद की गंदगी को साफ किया जा रहा है।
सामाजिक संगठन और नगर परिषद आज निकालेगी जागरूकता रैली
नगर परिषद और शहर के सामाजिक संगठनों द्वारा शहर में बुधवार को जागरूकता रैली निकाली जाएगी। यह रैली नगर परिषद के कार्यालय से शुरू होगी। रैली में हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल, अन्ना टीम, सेव संस्था और अन्य सामाजिक संगठन अपना सहयोग करेंगे। जागरूकता रैली के माध्यम से दुकानदारों को सफाई के महत्व के बारे में बताया जाएगा। दुकानदारों और लोगों को बताया जाएगा कि सफाई रखने के क्या-क्या फायदे होते हैं। 
अब तक 300 लोगों ने डाउनलोड किया स्वच्छता मैप एप
नगर परिषद द्वारा लोगों को स्वच्छता मैप एप्प डाऊन लोड करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह एप्प डाऊन लोड करना बहुत आसान है। इसको डाऊन लोड करने के तरीके लोगों को समझाने के लिए नगर परिषद ने शहर के सार्वजनिक स्थलों पर होर्डिंग और पोस्टर लगाने का काम किया है। लोगों द्वारा अपने आस-पास की गंदगी के फोटो डालने के लिए भी होर्डिंग और पोस्टरों के माध्यम से जागरूक किया गया है। भले ही नगर परिषद स्वच्छता मैप एप के टारगेट को पूरा नहीं कर पाई, लेकिन जींद शहर को स्वच्छता के मामले में आगे लाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है।
केवल दो घंटे में हुई स्वच्छता मैप एप पर कार्रवाई
नगर परिषद का स्वच्छता मैप एप जींद शहर के लोगों के लिए रामबाण साबित हो रहा है। नगर परिषद के अधिकारी एप्प पर शिकायत मिलते ही केवल दो घंटे में उस स्थान पर पहुंच रहे हैं। एरिया नगर परिषद का नहीं होने के बाद भी नगर परिषद फिर भी गंदगी को उठा रही है। डीआरडीए के सामने की हुडा मार्केट में गंदगी का फोटो सुबह दुकानदारों ने स्वच्छता मैप एप्प पर डाला। यह मार्केट हुडा की है। इस मार्केट की देख-रेख की जिम्मेदारी हुडा प्रशासन की है। यहां पर हुडा द्वारा किसी भी सफाई कर्मचारी की तैनाती नहीं की गई है लेकिन नगर परिषद के अधिकारियों ने स्वच्छता मैप एप्प पर मिली शिकायत पर दो घंटे में ही कार्रवाई की। नगर परिषद की टीम शिकायत मिलने के दो घंटे के अंदर मार्कीट में पहुंचे और रिपोर्ट में दर्शाई गई जगह की सफाई करते हुए मौके पर ही इसको क्लिन करते हुए इसके फोटो अपलोड किए। 
चार को टीम करेगी जींद का दौरा
नगर परिषद के ईओ डॉ. एसके चौहान ने बताया कि स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए टीम द्वारा चार जनवरी को जींद शहर का दौरा किया जाएगा। दौरे के दौरान टीम द्वारा शहर के बाजार, सार्वजनिक स्थलों और अन्य जगहों पर स्वच्छता को लेकर सर्वे किया जाएगा। पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर टीम ने जींद की सब्जी मंडी, मेन बाजार और अन्य बाजारों में जाकर यहां पर सफाई व्यवस्था के बारे में जानकारी जुटाई थी और लोगों से बात करके वहां की स्थिति के बारे में पूछा था। बुधवार को नगर परिषद द्वारा जींद शहर में स्वच्छता को लेकर जागरूकता रैली निकाली जाएगी।  

बालिकाओं के लिए खुलेगा शांति बाल आश्रम

अनाथ, जरूरतमंद, उत्पीडि़त बालिकाओं को दिया जाएगा आश्रय
डिफेंस कालोनी में तय हुई साइट, एनजीओ चलाएगा आश्रम
25 बालिकाओं के रहने, खाने तथा पढ़ाई की होगी व्यवस्था
अब तक जिले में नहीं है बालिकाओं के लिए आश्रय स्थल

जींद
डिफेंस कालोनी में जल्द ही अनाथ, जरूरतमंद तथा उत्पीडऩ का शिकार हुई बालिकाओं के प्रोटेक्शन के लिए शांति बाल आश्रम खुलने जा रहा है। आश्रम में बालिकाओं के रहने, खाने, सोने तथा पढ़ाई का पूरा प्रबंध होगा। आश्रम को समाज सेवी संस्था चलाएगी, जबकि जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग आश्रम की व्यवस्थाओं पर नजर रखेगा। विभाग ने बालिकाओं के आश्रम के लिए फाइल को अपूर्वल के लिए मुख्यालय को भेजा हुआ है। अपूर्वल मिलते ही बालिकाओं के लिए शांति बाल आश्रम अस्तित्व में आ जाएगा और आश्रम बालिकाओं की सुरक्षा, पढ़ाई, लिखाई समेत तमाम बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। आश्रम में 18 साल से कम वर्ष की बालिकाओं को रखने का प्रावधान किया गया है। 
जरूरतमंद बालिकाओं के लिए नहीं है जिले में कोई व्यवस्था
अनाथ, घर छोडऩे वाली तथा उत्पीडऩ का शिकार हुई बालिकाओं के रहने के लिए जिले में कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी लड़कियों को नारी निकेतन भेजने के सिवाए कोई चारा जिला प्रशासन के पास नहीं है। काफी सारे मामले आमतौर पर उत्पीडऩ के आते रहते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी बालिकाएं भी हैं जो अनाथ है और उनका रहन, सहन तथा पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। कुछ बालिकाएं घर को छोड़ देती हैं और वह वापस नहीं लौटना चाहती। कुछ बालिकाओं को अभिभावक नहीं अपनाते, ऐसे हालात में दूसरे जिलों की तरफ देखना पड़ता है। जिले में ऐसी व्यवस्था हो की बालिकाओं को छत मिले और सहायता मिले ताकि उनका उत्थान हो सके तथा जिंदगी सवंर सके। जरूरत को देखते हुए जिला मुख्यालय पर बालिकाओं के लिए शांति बाल आश्रम स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। जबकि अनाथ लड़कों के लिए गांव निर्जन में जरूर अनाथ आश्रम चलाया जा रहा है। 
25 बालिकाओं के रहने की होंगी तमाम सुविधाएं
जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग द्वारा मुख्यालय को भेजी गई अपूर्वल के लिए फाइल में 25 बालिकाओं के कम से कम रहने के लिए जगह की व्यवस्था व तमाम सुविधाओं के बारे में जानकारी दी गई है। जिसमे बालिकाओं के रहने के लिए साफ सुथरा वातावरण, सुरक्षा के प्रबंध, खाने, आवासीय तथा पढ़ाई-लिखाई के बारे में लिखा गया है। आश्रम के अंदर का वातावरण ऐसा उपलब्ध करवाया जाएगा कि बालिकाओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और माहौल घर जैसा दिखाई दे। फिलहाल विभाग ने डिफेंस कालोनी में एक साइट को तय किया है। जिसमे 25 बालिकाएं आराम से रह सके और पढ़ाई लिखाई के संबंध में दूर भी न जाना पड़े। 
केयर लाइफ एनजीओ करेगा संचालित
जिला मुख्यालय के डिफेंस कालोनी में चलाए जाने वाले बालिकाओं के लिए शांति बाल आश्रम को केयर लाइफ एनजीओ संचालित करेगा। जिला महिला एवं बाल संरक्षण विभाग ने केयर लाइफ एनजीओ द्वारा दी गई फाइल को अप्रूवल के लिए मुख्यालय में भेजा है। संस्था के अध्यक्ष डा. दिनेश की देखरेख में यह शांति बाल आश्रम चलाया जाएगा। जबकि विभाग आश्रम के अंदर की व्यवस्थाओं तथा सुविधाओं पर नजर रखेगा और संस्था का सहयोग करेगा। 
जिला महिला एवं बाल सरंक्षण अधिकारी सुजाता महलान ने बताया कि जिला में अनाथ तथा जरूरतमंद बालिकाओं के रहने तथा उनका जीवन संवारने से संबंधित कोई व्यवस्था नहीं है। अब स्वयं सेवी संस्था केयर लाइफ की सहायता से डिफेंस कालोनी में बालिकाओं के लिए शांति बाल आश्रम खोला जाएगा। जिसमे बालिकाओं को रहने, खाने, आवासीय, पढ़ाई-लिखाई से संबंधित जीवन संवारने की तमाम सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। 

Wednesday, 13 December 2017

बच्चों के साथ बेहतर संवाद करें अभिभावक : अनिल

बुआना के सरकारी स्कूल में हुआ सेमिनार
जींद 
गांव बुआना स्थित राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में सेमिनार का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता स्कूल प्राचार्य सत्यवान ने की। इसमें जिला बाल कल्याण अधिकारी अनिल मलिक ने कहा कि किशोरावस्था में चारों ओर उलझनें नजर आती रहती हैं। बच्चों में मन में द्वंंद्व चलता रहता है। अनिल मलिक ने कहा कि अभिभावकों को अपनी परवरिश की जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हुए बच्चों के साथ बेहतर संवाद, सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार कायम करते हुए उनके परामर्शदाता, सलाहकार तथा उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। जैसा भी व्यावहार हम आपने जीवन में परिवार के सदस्यों के साथ-साथ सामाजिक भूमिका निभाते हुए करते हैं, इसका असर परोक्ष रूप से बच्चों के जीवन में नजर आता है। बच्चों में विशेष तौर से किशोरावस्था में, जो 12 से 18 साल की उम्र के दौरान जब कई तरह की घटनाएं एक साथ उनके जीवन में परिवर्तन और विकास के रूप में घटने लगती हैं, तब कौन सी बात तनाव के बीज बो देती है, कहा नजीं जा सकता। अभिभावकों को उसे पहचानते हुए बच्चों की मदद करनी चाहिए। उन्होंने चाइल्ड हैल्प लाइन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि पूरा समाज हमारा सबका बड़ा घर है और हमारी एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी बनती है कि कोई भी बच्चा आपातकालीन परिस्थिति में चाइल्ड हैल्प लाइन की सेवा का लाभ ले सकता है। 

सामान्य अस्पताल में स्थापित होंगी केयर सेंटर यूनिट

हिंसा पीडि़त महिलाओं के लिए बनेगा शकून सेंटर
कुपोषित बच्चों के लिए बनेगा न्यूट्रीशियन केयर यूनिट 
जच्चा-बच्चा के लिए स्थापित होगा कंगारू मदर केयर सेंटर 
जींद
सामान्य अस्पताल में हिंसा पीडि़त महिलाओं, अति कुपोषित बच्चों, कम वजन के बच्चे पैदा होने पर उनके ईलाज, देखभाल के लिए जल्द ही केयर यूनिट स्थापित होंगी। जिसमे ईलाज, सलाह, स्वास्थ्य से संबंधित सभी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इसके अलावा सामान्य अस्पताल में आने वाले मरीजों को कागजातों से संबंधित किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की सभी विंगों के कार्यालय एक ही छत के नीचे होंगे। सामान्य अस्पताल की पुरानी ईमारत सिविल सर्जन कार्यालय के साथ बनने वाली केयर यूनिट तथा कार्यालयों को एक जगह लाने के लिए होने वाले खर्च की 25 लाख रुपये की राशि विभाग को मिल चुकी है। केयर यूनिटों तथा कार्यालयों को बनाने और पुरानी ईमारत के जीर्णोद्वार का जिम्मा बीएंडआर को सौंपा जा चुका है। 
सामान्य अस्पताल में बनेगा शकून सेंटर
सामान्य अस्पताल में हिंसा पीडि़त महिलाओं के लिए शकून सेंटर बनेगा। जिसमे न केवल महिलाओं का ईलाज किया जाएगा बल्कि उनको सदमे से उभारने तथा कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। महिला शकून सेंटर में काऊंसलर के अलावा कानून विशेषज्ञ तथा सुरक्षा के लिए महिला पुलिस कर्मी भी तैनात रहेगी। शकून सेंटर में हिंसा पीडि़त महिलाओं को इस तरह का माहौल उपलब्ध करवाया जाएगा कि वे अपने अधिकारों के लिए खुलकर अपनी बात रख सकें। शकून सेंटर के लिए रूम नम्बर पांच को तैयार किया जा रहा है। 
न्यूट्रीशियन केयर यूनिट भी बनेगी 
अति कुपोषित बच्चों के लिए न्यूट्रीशियन केयर यूनिट को भी तैयार किया जा रहा है। जिसमे अति कुपोषित तथा कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए तमाम सुविधाएं न्यूट्रीशियन केयर सेंटर में उपलब्ध होंगी। अति कुपोषित तथा कुपोषित बच्चों को दवाईयां तथा पोष्टिक आहार दिया जाएगा। न्यूट्रीशियन केयर यूनिट मे बाल रोग विशेषज्ञ, न्यूट्रीशियन विशेषज्ञ व अन्य स्टाफ होगा। अति कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए 15 से 20 दिन तक न्यूट्रीशियन केयर सेंटर में रखा जाएगा। खास बात यह भी रहेगी कि अति कुपोषित बच्चों के साथ एक केयर टेकर भी रह सकेगा। 
कंगारू मदर केयर सेंटर की होगी स्थापना
सामान्य अस्पताल में कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों तथा उनकी मां की देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर सेंटर की स्थापना की जाएगी। जिसमे जच्चा-बच्चा दोनों को रखा जाएगा। अढ़ाई किलोग्राम से नीचे वजन के बच्चों को काफी कमजोर माना जाता है। उन्हीं बच्चों का वजन नॉर्मल तक लाने के लिए कंगारू मदर केयर सेंटर बनाया गया है। खास बात यह है कि जच्चा भी सेंटर में तब तक दाखिल रहेगी जब तक बच्चा नॉर्मल नहीं हो जाती। 
सभी कार्यालय बनेंगे एक छत के नीचे
सामान्य अस्पताल में विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के कार्यालय परिसर में अलग-अलग जगहों पर बने हुए हैं। कामकाज के सिलसिले में आने वाले लोगों को इधर-उधर घुमना पड़ता था। उसी समस्या का समाधान के लिए सभी स्वास्थ्य सेवाएं प्रमुखों के कार्यालय को सिविल सर्जन कार्यालय के निकट पुरानी ईमारत में बनाया जाएगा। जिसका सीधा फायदा सामान्य अस्पताल में आने वाले मरीजों तथा उनके तामिरदारों को मिल पाएगा। अपने कामकाज के लिए लोगों को इधर से उधर नहीं दौडऩा पड़ेगा। 
क्या कहते हैं जिला प्रतिरक्षण विभाग प्रमुख
जिला प्रतिरक्षण विभाग के प्रमुख डा. नितिन ने बताया कि पुरानी ईमारत में काफी बदलाव किया जा रहा है। जिसका कार्य बीएंडआर को सौंपा जा चुका है। पुरानी ईमारत में काफी सुविधाओं को बढ़ाया जा रहा है। जिस पर लगभग 25 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। 
क्या कहते हैं सीएमओ
सिविल सर्जन डा. संजय दहिया ने कहा कि सामान्य अस्पताल की पुरानी ईमारत में कई केयर यूनिटों को बनाया जा रहा है। केयर यूनिटों में तमाम प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केयर यूनिटों के अस्तित्व में आने से काफी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। 

सर्दी की पहली बारिश से फसलों को काफी लाभ

किसानों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ी
तापमान में आई गिरावट, ठिठूरन बढ़ी

जींद
सर्दी के मौसम की सोमवार दिन में हुई बूंदाबांदी तथा रात को हुई पहली बारिश के साथ ही तापमान में गिरावट आई। बारिश के बाद चली ठंडी हवा से पूरा क्षेत्र शीत लहर के आगोश में समा गया है। शीत लहर ने लोगों को घरों के अंदर दुबकने को मजबूर कर दिया। बारिश से किसानों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। बारिश से गेहूं की फसल को काफी लाभ होगा। सोमवार रात को जींद में सात एमएम, सफीदों में बूंदाबांदी, जुलाना में चार एमएम, उचाना में पांच एमएम, नरवाना में छह एमएम, पिल्लूखेड़ा में बूंदाबांदी दर्ज की गई। सोमवार को दिनभर आकाश में काले बादलों का जमावड़ा लगा रहा। दोपहर को हवा भी तेज हो गई और बंदूाबांदी शुरु हो गई जो रात को बारिश में तब्दील हो गई। जो रातभर रूक रूक कर जारी रही। मंगलवार को दिन का आगाज ठंड के साथ हुआ। दिनभर आकाश में बादलों का जमावड़ा लगा रहा और सुबह हलकी बूंदाबांदी हुई। मंगलवार को अधिकत्तम तापमान 21 डिग्री, न्यूनतम तापमान आठ डिग्री दर्ज किया गया। हवा की गति दस किलोमीटर प्रति घंटा रही। जबकि आद्रता 65 प्रतिशत रही। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक बादल छाए रहेंगे और बूंदाबांदी हो सकती है। खरीफ फसल बिजाई के बाद दिन में तापमान बढऩे लगा था और रात का तापमान नीचे जा रहा था। जिसके कारण किसानों को फसलों में चेपा, अल तथा अन्य बीमारियों की चिंता सताने लगी थी। इस बार जिले में किसानों ने 2.20 हजार हेक्टेयर में गेहूं तथा पांच हजार हेक्टेयर में सरसोंकी बिजाई की हुई है। लगभग दो हजार हेक्टेयर में चना, मेथी, जौ बरसीम की बिजाई की हुई है। सोमवार रात को हुई बारिश से गेंहू, चने, मेथी, जौ व सरसों की फसलों को काफी फायदा होगा। 
पांडू पिंडारा कृषि विज्ञान केंद्र के कॉर्डिनेटर डा. आरडी पंवार ने बताया कि बारिश से सरसों, चना व गेहूं के अलावा सब्जियों की फसल को भी फायदा होगा। यह पानी का काम करेगा। यदि ओर बारिश हो जाती है तो यह सोने पर सुहागा साबित होगा। 

भगवान श्रीराम कथा मानव को भक्ति का उज्जवल पथ दिखाती : साध्वी सुमेधा


ऋषियों के दिखाए मार्ग पर चलने से मानव जीवन में होगा कल्याण

जींद 
साध्वी सुमेधा भारती ने कहा कि श्रीराम कथा की पावन पयस्विनी जन-जन को प्रेम सुध से आप्लावित करती है। यह माया व विकारों के अंंंधेरे में भटक रहे मानव को भक्ति का उज्जवल पथ दिखला कर उसके शुष्क हृदय में संवेदनाओं और भावनाओं का संचार करने में भी सक्षम है। साध्वी सुमेधा भारती दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के तत्वावधान में सैनी कन्या स्कूल में आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिवस के दौरान श्रद्धालुओं को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि ईश्वरीय महिमा से ओतप्रोत प्रभु की कथा सदैव जन-जन का कल्याण करती है और जनमानस को जनकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा भी देती है। हमारे भारतवर्ष में सदा से परकल्याण की भावना प्रधान रही है। ईश्वर के सभी अवतारों या ऋषियों-मनीषियों ने यूं तो अनेकों महान कार्य किए हैं लेकिन अगर उनके कार्यों में साम्य देखा जाए तो सभी ने स्वयं साध्नस्थ रह कर परमार्थ किया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने कंटकाकीर्ण वन पथ का चयन इस लिए किया ताकि अधर्म का समूल नाश कर सभी के जीवन में सुख व समृद्धि के पुष्प खिलाए जाएं। भूतभावन भगवान भोलेनाथ ने जन-जन के रक्षण हेतु सागर से निकले विष को कण्ठस्त कर लिया। कहीं विवेकानंद तो कहीं रामतीर्थ, कहीं वर्धमान तो कहीं राजा शिबि, कहीं दधिचि ऋषि तो कहीं भर्तृहरि इसी परकल्याण रूपी मणिका के समुज्जवल मोती हैं जिन्होंने स्वयं परहित हेतु अपने जीवन के सुखों का त्याग कर दिया और मानव के आगे एक प्रेरणा स्रोत बन गए। उन्होंने कहा कि अर्वाचीन समाज में आवश्यकता है कि मानव इन महान विभूतियों को आदर्श बना कर इनसेे शिक्षा ग्रहण करें। क्योंकि आज घोर कलिकाल के प्रभाव के कारण प्रेम, भावनाओं व संवेदनाओं से रहित मानव का हृदय शुष्क हो चुका है। आपाधपी भरे जीवन में सभी केवल अपने लिए जीते हैं लेकिन शास्त्रा कहते हैं कि मानव तो वह है जो औरों के लिए जीए। अपने दुख में तो सभी गमगीन हो ही जाते हैं लेकिन सच्चा मानव तो वह है जो दूसरों के दुख देखकर द्रवित हो उठे। जो दूसरों की भलाई के लिए अपने सुखों का त्याग कर दे। साध्वी सुमेधा ने बताया कि मानव के अंधकारमय हृदय में परकल्याण रूपी भावना का सूर्य तभी उदय हो पाएगा जब उसकी सोच विशाल होगी। क्योंकि संकीर्ण दायरों में बंध मानव कभी भी विशाल संसार के बारे में नहीं सोच सकता है। हमारे ऋषियों की सोच विशाल थी, इसीलिए तो उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम का उद्घोष किया। उनके लिए तो सारा विश्व अपना परिवार था। वह सदा इस परिवार के सुख की कामना करते हुए कहते थे सभी सुखी हों, सभी के दुख-दर्द समाप्त हों, सभी अपने बुरे कर्मों से मुक्त हो कर सुंदर जीवन व्यतीत करें। प्रभु की कथा इसी अध्यात्म ज्ञान का संदेश देती है। इस अवसर पर जवाहर सैनी, नरेश सैनी, हरेंद्र सैनी, रामतीर्थ गुप्ता व कृष्ण लाल सहगल विशेष तौर पर मौजूद रहे।




हडवारा हटवाने की मांग को लेकर किया प्रदर्शन

डीसी को ज्ञापन सौंप स्वयं निरीक्षण करने की मांग
हडवारे से उठने वाली बदबू से परेशान हैं इलाके के लोग

जींद
न्यू हांसी रोड से हडवारा हटवाए जाने की मांग को लेकर हडवारा हटाओ समिति ने प्रदर्शन किया और प्रशासन तथा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में समिति सदस्यों ने डीसी अमित खत्री को ज्ञापन सौंपकर हडवारे का निरीक्षण कर वहां से हटवाने की मांग की। हडवारा हटाओ समिति के प्रधान राजा सैनी के नेतृत्व में एकत्रित हुए सदस्यों ने हडवारे के सामने पहुंचकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो हडवारा को पूर्णत वैज्ञानिक विधि से बताया जा रहा है। दूसरी तरफ हडवारे से उठने वाली बदबू के कारण वहां रहने वाले लोगों का जीना मुहाल हो गया है। इस संर्दभ में एसडीएम को भी हडवारे का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके हडवारे का निरीक्षण नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि डीसी स्वयं हडवारे का निरीक्षण करें और वहां के दुर्गंध पूर्ण वातावरण में रह रहे लोगों से भी जानकारी जुटाएं। उन्होंने कहा कि मृत पशुओं को खुले में डाला जा रहा है। जिससे बदबू उठ रही है। बदबू के कारण साथ लगते गांव, शिक्षण संस्थानों तथा कालोनी के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हडवारा में चिमनी तथा कुएं का निर्माण तो किया है लेकिन उनका प्रयोग नहीं किया जा रहा है। प्रदुषण को देखते हुए हडवारे को नगर परिषद क्षेत्र से बाहर होना चाहिए, जबकि यह बस्तियों के बीच में आ चुका है। उन्होंने चेताया कि अगर हडवारे को यहां से नहीं हटाया गया तो आसपास इलाके के गांव, शिक्षण संस्थान, कालोनियों के लोग आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इस मौके पर शमशेर, राजेश, बलजीत, चंद्रपाल, इंद्र, सुशील, सुभाष, सुनील, दीपक, कृष्ण, राजकुमार, ऋषिपाल, रणधीर सहित काफी लोग मौजूद थे। 

बनभौरी मंदिर को लेकर खापें उतरी सरकार के विरोध में

तत्काल प्रभाव से मंदिर के सरकारीकरण को रद्द करे सरकार : कंडेला
15 दिसम्बर को खापें, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि करें प्रदर्शन
मंदिर का सरकारीकरण कर जनभावना को भड़का रही है सरकार
जींद
बनभौरी मंदिर के सरकारीकरण के विरोध में खाप चौधरी, सामाजिक संगठन, विश्व हिन्दू परिषद, सरपंच तथा ब्राह्मण सभा उतर आई है। सभी 15 दिसम्बर को मंदिर के सरकारीकरण के विरोध में शहर में प्रदर्शन करेंगे और सरकारीकरण को रद्द किए जाने की मांग को लेकर डीसी को ज्ञापन सौंपेंगे। खाप चौधरियों तथा सामाजिक संगठनों ने चेताया कि अगर 15 दिसम्बर तक सरकार ने अपने फैसले को वापस नहीं लिया तो खापें तथा सामाजिक संगठन, कर्मचारी संगठन मिलकर आंदोलन शुरु कर देंगे। जाट धर्मशाला में सर्वजात सर्वखाप के राष्ट्रीय संयोजक टेकराम कंडेला, प्रदेशाध्यक्ष मेवासिंह छातर, प्रवक्ता मा. किताब सिंह भनवाला, सरपंच मुकेश, संजय, विहिप के पूर्व जिलाध्यक्ष फूलकुमार शास्त्री, ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष भगवानदास ने संयुक्त पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार ने बनभौरी मंदिर का सरकारीकरण कर उससे जुड़े परिवारों, भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। सदियों से ब्राह्मण परिवार मंदिर की देखरेख, रखरखाव करते आ रहे हैं। 36 बिरादरी के अलावा हिन्दू, सिक्ख तथा सिया मुस्लमान बनभौरी मंदिर में आस्था रखते हैं। सरकार के फैसले से भी जाहिर है कि इसमे षडयंत्र की बू आ रही है। मंदिर के सरकारीकरण के विरोध में 15 दिसम्बर को जिलेभर की खापें, सामाजिक संगठन, कर्मचारी, पंच सरपंच तथा जिला पार्षद एकजुट होकर शहर में विरोध प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन के माध्यम से सरकार को लोगों की भावना के बारे में अवगत करवाया जाएगा। उन्होंने कहा कि बनभौरी मंदिर के समकक्ष दर्जनभर पुजनीय स्थल हैं, जिनकी तरफ सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। केवल बनभौरी मंदिर को टारगेट किया गया है। 15 दिसम्बर को ही ठोस रणनीति भी बनाई जाएगी, जिसके लिए बकायदा एक कमेटी का गठन किया जाएगा जो आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेगी। खाप चौधरियों तथा सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार मंदिर का निजीकरण कर तानेबाने को तोडऩे की कोशिश कर रही है और भक्तों की आस्था से खिलवाड़ कर रही है। जिससे लोगों में अच्छा खास रोष है। उन्होंने चेताया कि अगर सरकार ने मंदिर के सरकारीकरण के फैसले को रद्द नहीं किया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इस मौके पर मानव सेवा समिति के प्रेम भारद्वाज, ब्राह्मण सभा के प्रवक्ता ओम नारायण, हरपाल ढुल, जीतगढ़ के सरपंच संजय, रामकुमार समेत कई लोग मौजूद थे।
सर्वजात सर्वखाप के राष्ट्रीय संयोजक एवं कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला ने कहा कि बनभौरी मंदिर से लाखों लोगों की आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। मंदिर की देखरेख कर रहे पुजारी परिवारों के साथ सरकार खिलवाड़ कर रही है। जिसे खापें बिल्कुल भी सहन नहीं करेंगी। 15 दिसम्बर को प्रदर्शन के माध्यम से रोष जताया जाएगा, उसके साथ ही आंदोलन की रणनीति भी बनाई जाएगी।
गांव ईक्कस के सरपंच प्रतिनिधि हरपाल ढुल ने कहा कि मंदिर का सरकारीकरण जनभावना से खिलवाड़ है। सरकार को स्वर्ण मंदिर के मामले से सबक लेना चाहिए। उस दौरान पंजाब में क्या हुआ था, अब हरियाणा में भी मंदिर का सरकारीकरण कर जनभावना को उकसाने का कार्य किया जा रहा है। 

Saturday, 9 December 2017

ऑनलाइन की तरफ लोगों के बढ़ते रुझान के साथ ठगी की वारदातें भी

जींद : ऑनलाइन की तरफ लोगों के बढ़ते रुझान के साथ ठगी की वारदातें भी बढ़ती जा रही हैं। ऑनलाइन शॉ¨पग, बैंक ट्रांजेक्शन और एटीएम से लेन-देन में ठग गिरोह लगातार सक्रिय है। ऐसे में तकनीक का फायदा मिलने के साथ नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। जागरूकता के अभाव में सालभर में लोगों के खातों से ऑनलाइन ठगी से दो सौ करोड़ रुपये गायब हो चुके हैं।
जिले में सालभर में ऑनलाइन ठगी के आठ बड़े मामले सामने आई। इसके अलावा 40 मामले डेबिट कार्ड बदलकर और फोन पर बैंक अधिकारी बनकर खाते की डिटेल लेकर लोगों के खातों से पैसे निकाले के सामने आए हैं। ऑनलाइन ठगी करने वाले इतने शातिर होते कि वे किसी को भी फोन लगा देते हैं और खुद को बैंक का अधिकारी बताते हैं। ये ठग बैंक खाता बंद व एटीएम बंद होने की बात कहकर व्यक्ति को अपने जाल में फंसा लेते हैं। खाता व एटीएम से निकासी सही करने के नाम पर ठग व्यक्ति से एटीएम नंबर, ओटीपी की जानकारी ले लेते हैं। उनके झांसे में आकर व्यक्ति ये जानकारियां दे देता है और उसके खाते से राशि निकालना शुरू कर देते है। जब तक वह कुछ समझ पाता है, तब तक अच्छी खासी चपत लग चुकी होती है। जब पुलिस तक मामला पहुंचता है वह नंबर बंद हो चुके होते हैं। साइबर टीम जब उनकी डिटेल को खंगालती है, तो वह नंबर फर्जी आइडी पर लिए होते हैं। ऐसे में पुलिस इन आरोपियों तक नहीं पहुंच पा रही है। इसके अलावा जिले में सबसे बड़ी ठगी का मामला सोशल ट्रेड का आया है। लोगों ने ज्यादा पैसा कमाने के चक्कर में लोगों ने मोटा पैसा इसमें निवेश किया। बाद में कंपनी में जिले के लोगों के करोड़ों रुपये डूब गए। इसके अलावा पंजाब की एक कंपनी में मोटी ब्याज दर देने के नाम पर जींद के लोगों के करोड़ों रुपये लेकर फरार हो गई। ठगी होने के बाद पुलिस ने मामले तो दर्ज कर लिए और कंपनी से जुड़े छोटे लोगों को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया, लेकिन लोगों की खून पसीने की कमाई आज तक नहीं लौटी है।
20 हजार लोग हुए ठगी का शिकार
पीड़ितों के मुताबिक जींद में करीब 20 हजार लोग एब्लाज एन्फो सोल्यूशन प्रा. लिमटेड नाम की इस कंपनी से जुड़े हुए थे। उनसे सौ करोड़ से ज्यादा की ठगी हुई है। ठगी का शिकार हुए अमन, प्रदीप, प्रमोद, सतीश ने बताया कि लालच देने वालों ने बताया था कि यह कंपनी सरकारी नियमों के अनुसार काम करती है। उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर कुछ पेज को लाइक करना है, जिसके लिए उन्हें रोजाना रुपये मिलेंगे और जल्दी वे भी अमीर बन जाएंगे। पीड़ित अमन, प्रमोद ने बताया कि साढ़े 57 हजार में एक आइडी बनती थी। इसके बाद हर रोज 125 क्लिक मिलते थे। हर क्लिक पर पांच रुपये मिलते थे। इसके अलावा नीचे दो आदमी जोड़ने पर प्रमोशन इनकम अलग से मिलती थी और 125 क्लिक की जगह 250 क्लिक मिलते थे। अपने नीचे 100 आदमी जोड़ने पर गोल्ड मेंबर बनाने का लालच दिया था। जिसके बाद 50 हजार रुपये प्रति महीना अलग से फिक्स राशि देने की बात कही थी। इस लालच में पीड़ितों ने अपने नजदीकी दोस्तों और रिश्तेदारों को अपने नीचे मेंबर बना दिया।
ज्यादा ब्याज का दिया झांसा
इस साल जींद के शिव कालोनी में ठगी का मामला सामने आया। जहां पर धर्मेंद्र नाम के एक युवक ने बताया कि उसने पंजाब की एक कंपनी के साथ मिलकर बैंक खोला है और उनकी राशि को जल्द ही डबल कर देंगे। इस पर लोग झांसे में आ गए और सैंकड़ों लोगों ने उनके पास पैसा निवेश कर दिया। शुरुआत में कंपनी के लोगों ने कुछ ब्याज तो दिया, लेकिन बाद में उनका पैसा डूब गया। इस दौरान कंपनी लोगों की लगभग 70 करोड़ रुपये के करीब लेकर फरार हो गई। बाद में पुलिस ने इस मामले में कंपनी के माध्यम बने शिव कालोनी के धर्मेंद्र, उसके भाई व पिता को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन पैसा वापस नहीं आया।
ऐसे बचें ठगी से
1. फोन पर किसी को भी बैंक खाते व एटीएम की डिटेल न दे
2. फोन या मेल पर खाते से संबंधित मैसेज आता है तो इसके बारे में पहले बैंक में जाकर पुष्टी करें
3. एटीएम का पासवर्ड व एटीएम के 16 नंबरों की डिटेल किसी को न दें
4. पैसा निकालने के दौरान किसी भी अनजान व्यक्ति को एटीएम कार्ड न दें
5. अगर किसी का फोन आता है तो इसकी सूचना तुरंत ही अपने बैंक व पुलिस को दें
नहीं पहुंच पाती पुलिस आरोपियों तक
फोन करके बैंक उपभोक्ताओं को चूना लगाने वाले नंबर को पुलिस साइबर सेल ट्रेस करने का प्रयास करती है, लेकिन उनको कोई सफलता नहीं मिल पाती है। पुलिस जांचों में सामने आया है कि यह गिरोह फर्जी सिमों से कॉल कर ठगी करते हैं। इनके फोन ट्रेस किए जाते हैं तो वे अन्य किसी व्यक्ति के नाम पर मिलते हैं, जो फोन चलाना भी नहीं जानते है।
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ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए लोगों को बार-बार आगाह किया जाता है। बैंकों की ओर से जागरुकता के प्रयास जारी है, इसके बावजूद भी लोग ठगी का शिकार हो रहे हैं। बैंकों की ओर से ग्राहकों को यह भी बताया जाता है कि उनकी तरफ से कभी भी कोई फोन नहीं किया जाता। लोगों को अपने पैसों को निवेश करने से पहले उसकी जांच पड़ताल कर लेनी चाहिए।
एमके झा, लीड बैंक मैनेजर, जींद

पुलिस विभाग करेगा ऑनलाइन मंच संचालन प्रतिभा खोज प्रतियोगिता

24 दिसंबर को गृहमंत्री व सीएम करेंगे स्टूडेंट पुलिस कैडेट कार्यक्रम का शुभारंभ

जींद
ऑनलाइन मंच संचालन प्रतिभा खोज प्रतियोगिता का आयोजन पुुलिस विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किया जा रहा है। इस प्रतियोगिता में आठवीं कक्षा से 12 वीं कक्षा तक के टैलेंटेड छात्र-छात्राएं अपनी प्रतिभा का दो मिनट का विडियो क्लीपिंग स्टूडेंट पुलिस के डेट प्रोग्राम डॉट इन पर भेज सकेंगे। इसके साथ ही 24 दिसंबर को गृहमंत्री राजनाथ सिंह भारत सरकार व हरियाणा के मुख्यमंत्री गुरुग्राम में स्टूडेंट पुलिस केडेट कार्यक्रम का शुभारम्भ भी संयुक्त रूप से करेंगे। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम होगा जिसमें देश के सभी राज्यों के साथ साथ केंद्र शासित प्रदेशों के पांच हजार कैडेट और कार्यक्रम प्रभारी व अधिकारी भाग लेंगे। इस कार्यक्रम के लिए यह निर्धारित किया गया है कि मंच का संचालन कोई और नहीं बल्कि स्कूली छात्र छात्रा द्वारा ही किया जाएगा। आत्मविश्वास, बोलने की कला, फेसबुक पर मिलने वाले लाईकस और शेयर की संख्या के आधार अनुभवी निर्णायकों की टीम द्वारा 16 प्रतिभाशाली छात्रों को चुना जाएगा और ऑडिशन के माध्यम से सर्वश्रेष्ठ चार जिसमें दो छात्र व दो छात्राओं का चयन किया होगा। जबकि अंतिम चार में जगह बनाने वाले इन छात्र छात्राओं को प्रशंसा पत्र एवं आकर्षक ईनाम जैसे कंप्यूटर, मोबाइल फोन, हार्ड ड्राइव, कोचिंग सेंटर का डिस्काउंट हैंपर मिलेगा। इसके साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य व संबंधित अध्यापकों को भी प्रशंसा पत्र एवं मंच पर विशेष स्थान दिया जाएगा। जिसमें बच्चों को बोलने की कला जो की एक महत्वपूर्ण स्कील है जिससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और स्टूडेंटस पुलिस कैडेट प्रोग्र्राम से छात्रों , शिक्षकों एवं माता पिता में भी जागरूकता पैदा होगी । इस प्रोग्राम के बारे में विस्तार से स्कूली बच्चों व प्रधानाचार्य को बताने के लिए डीएसपी परमजीत सिंह समोता ने जींद के डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, होली हर्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, लॉर्ड शिवा मॉडल स्कूल में पहुंचे। बच्चों द्वारा स्टूडेंट पुलिस केडेट प्रोग्राम के बारे में जानकर काफी प्रशंसा भी की।  

पराली को जलाने की बजाये पशु चारे के रूप में करें प्रयोग

पराली न जलाने वाले किसान समाज के सच्चे हितैषी : डीसी 
जींद जिला बना पराली ब्रिकी केंद्र की बहुत बड़ी मंडी
देशभर से व्यापारी पराली खरीद को लेकर आ रहे जींद

जींद 
पराली जलाना आज के समय की एक गम्भीर समस्या है। पराली जलाने से पर्यावरण तो प्रदूषित होता ही है साथ ही पशुओं के लिए चारे की समस्या भी बन जाती है। सरकार पराली न जलाने के लिए किसानों को प्रेरित करने के लिए समय- समय पर जागरूकता अभियान भी चलाती है, यहां तक की पराली जलाने पर सरकार द्वारा प्रतिबंध भी लगाया जा चुका है, उसके बावजूद भी किसान पराली जलाते रहते है। अगर यह कहा जाये कि किसान पराली जलाकर अपने जीवन तथा आने वाली पीढिय़ों के लिए गम्भीर समस्या पैदा कर रहे है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी। इस बीच कुछ किसान ऐसे भी है जो पराली को न जला कर इसे इक_ा करते हैं और अपने लिए मुनाफे का सौदा बना लेते है। यह किसान अन्य किसानों के लिए किसी प्रेरणा स्त्रोत से कम नहीं है। लोगों को चाहिए कि वे पराली को न जलाकर इसका प्रयोग पशुचारे के रूप में करे और अपने आर्थिक स्तर को भी मजबूत करने का काम करें। 
पराली इक_ा कर बेचने का व्यवसाय कर रहे युवा
मनोहरपूर गांव के किसान प्रमोद रेढू, राजकुमार, जगबीर सिंह, सुरेन्द्र ऐसे किसान है जो पराली को कभी नहीं जलाते बल्कि आसपास के इलाके की पराली को ईक्कठा कर इसकी ब्रिकी करते है। प्रमोद रेढू ने बताया कि फिलहाल उसके पास 14 हजार क्विंटल पराली का स्टॉक है। हर वर्ष वह पराली इक_ी करने का काम करता है, जिससे मोटा मुनाफा कमा कर परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करता है। उन्होंने बताया कि सीजन के दौरान 5००- 6०० रुपये के हिसाब से एक एकड़ क्षेत्र की पराली मिल जाती है। उन्होंने सीधे शब्दों में बताया कि सीजन के दौरान 1०० रुपये क्विंटल के हिसाब से पराली खरीद लेते हैं और कुछ समय के बाद इस पराली को लगभग 15० रुपये क्विंटल के हिसाब से बेचा जाता है। अगर पराली को काट कर बेचा जाये तो इसकी कीमत लगभग 19० रुपये प्रति क्विंटल तक हो जाती है। 
कौन है पराली के खरीदार
किसान प्रमोद रेढू, राजकुमार, जगबीर सिंह, सुरेंद्र ने बताया कि पराली के ज्यादातर खरीददार राजस्थान के व्यापारी हैं। ये व्यापारी हर वर्ष हरियाणा से लाखों टन पराली की खरीददारी करते हैं। पराली के कोई निर्धारित रेट नहीं होते हैं। अगर राजस्थान के क्षेत्रों में सही मात्रा में बारिश हो जाती है तो वहां चारे की कोई कमी नहीं रहती है, इस स्थिति में हरियाणा प्रदेश से व्यापारी कम मात्रा में पराली खरीदते हैं जिससे पराली के रेटो में काफी कमी आ जाती है। उन्होंने बताया कि कुछ व्यापारी हरियाणा प्रदेश के महेन्द्रगढ़, झज्जर जिलों से भी यहां पराली खरीदने के लिए आते हैं, यह व्यापारी वहां के बिजली पांवर प्लाटों को ईंधन के लिए पराली सप्लाई करने का कार्य भी करते हैं। इसके अलावा गता फैक्टरियों में पराली का प्रयोग होता है कुछ व्यापारी गता फैक्टरियों से भी पराली की खरीद के लिए यहां पहुंचते है। 
जिला में यहां है पराली की बड़ी मंडियां
पराली की मांग को देखते हुए जींद जिला में अनेक बड़ी-बड़ी मंडियां विकसित हो रही हैं। नगूरां, रामराये, सफीदों क्षेत्र में कई बड़ी मंडियां उभरी रही है। दूसरे प्रदेशों से हर वर्ष हजारों की संख्या में व्यापारी इन मण्डियों में पराली खरीद के लिए आ रहे है। मंडियों में कटी तथा साबुत पराली की ब्रिकी हो रही है। 
पराली व्यवसाय बन रहा है लाभ का सौदा
जिस पराली को किसान बेकार वस्तु मान कर जला देते थे, अब वही पराली किसानों के लिए लाभ का सौदा बन रही है। प्रति एकड़ लगभग 5०० से 1००० रुपये में किसान इसकी ब्रिकी कर रहे हैं। व्यापारी भी इसे अच्छा खासा लाभ प्राप्त कर रहे है। जब से पराली ब्रिकी ने व्यवसाय का रूप लिया है, तब से पराली को जलाना भी कम हुआ है। जिसका सीधा सकारात्मक असर मानव के जीवन पर पड़ रहा है। 
नंदीशालाओं के लिए कम रेट में पराली उपलब्ध करवाने को भी तैयार
मनोहरपूर गांव के पराली स्टोकर किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा गौवंश को सुरक्षित आश्रय स्थल उपलब्ध करवाने के लिए जीन्द में एक बहुत बड़ी अस्थाई नंदीशाला बनाई गई है। इस कार्य में अगर जिला प्रशासन सहयोग की अपील करता है तो वह काफी कम दरों पर पराली उपलब्ध करवा सकता है। इस तरह के परोपकार के कार्य करने वाले जिलाभर से अनेक किसान है। कुछ किसानों का कहना है कि सीजन के दौरान अगर जिला प्रशासन पराली लेना चाहे तो वे नि:शुल्क पराली उपलब्ध करवा सकते है।
कंबाइन मशीन द्वारा कटाई गई पराली है चिन्ता का विषय
किसान प्रमोद रेढू ने बताया कि  हाथ से काटी गई पराली की खरीद की जा सकती है। इसे किसानों को तो फायदा पहुंचता ही है, साथ ही पर्यावरण प्रदूषण पर भी अंकुश लगता है। फिलहाल अगर कोई समस्या है तो कंबाइन मशीन द्वारा काटी गई पराली है। इस पराली को जलाने के सिवाय किसान के पास कोई दूसरा चारा नहीं होता है। उन्होंने बताया कि अगर कोई इस तरह की तकनीक इजाद कर ली जाये कि इस पराली को खेत में ही काटकर इसका चारा बना दिया जाये तो पर्यावरण प्रदूषण की समस्या तो खत्म होगी ही साथ ही पशु चारे की कोई कमी भी नहीं रहेगी।

एएवाई के साथ बीपीएल को भी मिलेगी चीनी तथा सरसों का तेल

अप्रैल 2017 में बीपीएल परिवारों की बंद कर दी गई थी चीनी
निदेशालय ने जनवरी 2018 से सरसों तेल व चीनी वितरण के दिए आदेश
70215 एएवाई तथा बीपीएल परिवारों को होगा फायदा

जींद
एएवाई और बीपीएल परिवारों के लिए अच्छी खबर है खाद्य एवं आपूर्ति निदेशालय ने जनवरी 2018 से चीनी तथा सरसों तेल देने का निर्णय लिया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने अप्रैल माह में चीनी का वितरण रोक दिया था। हालांकि एएवाई को प्रति राशन कार्ड के हिसाब से महीने में एक किलोग्राम चीनी मिलती रही है लेकिन बीपीएल की चीनी को बंद कर दिया गया था। जनवरी माह में एएवाई तथा बीपीएल परिवारों को एक किलोग्राम चीनी तथा एक लीटर सरसों का तेल उपलब्ध करवाया जाएगा। चीनी को 13 रुपये प्रति किलोग्राम जबकि सरसों तेल 20 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दिया जाएगा। जिसका सीधा लाभ 70215 एएवाई तथा बीपीएल परिवारों को पहुंचेगा। 
जिले में किस राशन कार्ड के कितने हैं उपभोक्ता
राशन कार्ड                     उपभोक्ताओं की संख्या 
एएवाई (गुलाबी)             18763
बीपीएल (पीला)              51452
ओपीएच (खाकी)            102745
एपीएल (हरा)                155700
जिले में कितने हैं डिपू पर होता है राशन वितरित
खंड नाम               संख्या
जींद                      156
नरवाना                   162
सफीदों                    80
उचाना                    52
अलेवा                    35
जुलाना                   58
पिल्लूखेड़ा                 41
एएवाई के साथ बीपीएल को भी मिलेगा तेल व चीनी
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग अपने उपभोक्ताओं को कार्डो के अनुसार अलग-अलग मात्रा और कीमत में राशन देता है। बीपीएल और ओपीएच उपभोक्ताओं को पांच किलोग्राम प्रति व्यक्ति दो रुपये किलो गेहूं मिलता है। एएवाई (गुलाबी) उपभोक्ताओं को 35 किलोग्राम गेहूं दो रुपये प्रति किलोग्राम कीमत से तथा एएवाई को एक किलोग्राम चीनी प्रति महीना 13.00 रुपये प्रति किलो की दर से, एएवाई और बीपीएल उपभोक्ताओं अढाई किलो ग्राम दाल 20 रुपये प्रति किलो की दर से मिलती है। अब एएवाई के साथ बीपीएल को 13 रुपये किलो के हिसाब से चीनी तथा 20 रुपये लीटर के हिसाब से सरसों का तेल मिलेगा। पिछले अप्रैल माह में बीपीएल को चीनी वितरण पर रोक लगा दी गई थी। जबकि एएवाई को चीनी दी जाती रही है। 
क्या कहते हैं जिला खादय एवं आपूति निंयत्रक
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के नियंत्रक राजेश आर्य ने बताया कि जनवरी 2018 से एएवाई व बीपीएल कार्ड धारकों को प्रति राशन कार्ड के हिसाब से चीनी व एक लीटर सरसों का तेल मिलेगा। 

खुद को पर्यावरण के लिए महिला वकील ने कर दिया समर्पित

अब तक लगवा चुकी 177 त्रिवेणी जींद। महिला एडवोकेट संतोष यादव ने खुद को पर्यावरण की हिफाजत के लिए समर्पित कर दिया है। वह जींद समेत अब तक...