Friday, 16 November 2012

दावे बेमानी, आंगनबाड़ी में नहीं मिल रही पूरी सुविधाएं


अलेवा : 
सरकार द्वारा आंगनबाड़ी सेंटरों में छोटे-छोटे बच्चों के लिए भले ही पोषाहार तथा अन्य कामों के लिए बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हों, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखकर क्या कहा नहीं जा सकता कि सरकार द्वारा किए गए इन दावों का लाभ वाक्या में उन छोटे-छोटे बच्चों के पास के पास पहुंच भी रहा या फिर इन दावों पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।
जिले में इस समय नौ ब्लाकों में 1439 आगनबाड़ी सेंटर हैं तथा इनमें छह मास से छह साल तक के करीब 56634 बच्चे तथा 17353 माताओं द्वारा सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ लिया जा रहा है। सरकार द्वारा आंगनबाड़ी सेंटरों को सशक्त बनाने तथा नियमों को लागू करने के लिए जिला स्तर तथा ब्लॉक स्तर पर उन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए भरसक प्रयास तो किए जाते हैं। लेकिन जिले में अभी तक काफी आंगनबाड़ी सेंटरों के अधूरे भवनों तथा अधूरे शौचालय को देखकर धरातल पर इन प्रयासों में कहीं-कहीं कमी जरूर झलक रही है।
कहने को तो सरकार द्वारा छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी सेंटरों में खाना आदि पकाने के लिए गैस सिलेंडरों का प्रयोग किया जा रहा है, लेकिन अगर हकीकत में आंगनबाड़ी सेंटरों का दौरा किया जाए तो गैस सिलेंडर एक कोने में पड़े धूल फांकते नजर आएंगे। एक बात और देखने लायक है कि जिले में नौ ब्लॉकों के करीब 1439 सेंटरों में क्या विभाग द्वारा सरकार द्वारा दी जाने वाले सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है या फिर बच्चों के नाम पर दी जाने वाली सुविधाएं केवल कागजों तक ही सीमित है। सरकार द्वारा आंगनबाड़ी सेंटरों में आने वाले छोटे-छोटे बच्चों पर खाने के रूप में लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। खाने के रख-रखाव के निर्देशों के साथ-साथ भोजन तैयार करने के लिए भी राशि जारी की जाती है, लेकिन हकीकत में क्या आंगनबाड़ी सेंटरों में यह सभी सुविधाएं बच्चों तक पहुंच रही यह जांच का विषय है।
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'बच्चों तक पहुंचाया जा रहा लाभ'
अलेवा महिला एवं बाल विकास विभाग की अधिकारी किरण परूथी ने बताया कि सरकार द्वारा जो सुविधाएं पीछे से मुहैया करवाई जा रही उनका जमीनी स्तर पर बच्चों तक लाभ पहुंचाया जा रहा है।

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