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Monday, 19 November 2012
अस्थमा की उपेक्षा करना उचित नहीं
जींद : अस्थमा एक गंभीर बीमारी है। इसको मामूली बीमारी समझकर इसकी उपेक्षा करना उचित नहीं है। अस्थमा श्वास संबंधी रोग है। इसमें श्वास नलिकाओं में सूजन आने से वे सिकुड़ जाती हैं, जिससे सास लेने में तकलीफ होती है। अस्थमा का अटैक आने पर श्वास नलिकाएं पूरी तरह बंद हो सकती हैं, जिससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को आक्सीजन की आपूर्ति बंद हो सकती है। यह चिकित्सकीय रूप से आपात स्थिति है। यह बात छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद बंसल ने कही। अस्थमा मुख्य रूप से सास की नली की बीमारी है। अस्थमा से सास लेने में परेशानिया आती है। इसमें मरीज की सास की नली पतली हो जाती है। सास की नली पतली होने से सास लेने में परेशानी होती है और लगातार कफ की समस्या बनी रहती है। यह रोग एलर्जी से बढ़ जाता है। अस्थमा का अटैक कुछ समय से लेकर घटों तक रह सकता है। अगर अटैक ज्यादा लंबा हो जाए तो जानलेवा भी हो सकता है। मौजूदा हालात में यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। बच्चों में भी यह समस्या आम हो गई है। खानपान और दिनचर्या में हुए बदलावों के कारण बच्चे भी सास की बीमारी से परेशान होने लगे हैं। चिंता की बात तो यह है कि अब छोटे-छोटे बच्चे भी अस्थमा की चपेट में आने लगे हैं। अस्थमा होने पर कफ आना, घबराहट, सीने में जकड़न और सास लेने में परेशानी, एयरवेज सिकुड़ जाना, अक्सर खासी या सर्दी जुकाम की समस्या रहती है। खेल-कूद के दौरान बच्चों का जल्दी से जल्दी थक जाना और सास फूलना, सीने में जकड़न, नाक बंद होना व सीने में दर्द की शिकायत होना, सास लेने पर घरघराहट के साथ एक सीटी जैसी आवाज आना जैसी सास की परेशानिया आम हैं। मरीज अपना इलाज खुद न करें। डॉक्टर की बताई दवा ही लें। अस्थमा अटैक होने की स्थिति में जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचने की कोशिश करें। कोई भी दूसरी दवाई बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। कुछ दवाइया अस्थमा की परेशानी को बढ़ा देती हैं। किसी भी तरह का ऐसा व्यायाम न करें जिससे सास की नली पर दबाव पड़े।
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