Monday, 26 November 2012

प्राथमिक चिकित्सा में बच्चे होंगे ट्रेंड


जींद
अब सरकारी स्कूलों के सभी बच्चों को रेडक्रास शिक्षा (प्राथमिक चिकित्सा) नहीं मिलेगी जबकि प्रत्येक सरकारी स्कूल से कुछ बच्चों का चयन किया जाएगा और उन्हें यह प्राथमिक चिकित्सा की प्रशिक्षण प्रदान की जाएंगे। इससे यह बच्चे स्कूल में किसी प्रकार की प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत पड़ने पर मदद कर सकेंगे। रेडक्रॉस सोसायटी के जरिये प्राथमिक चिकित्सा की शिक्षा उनके वालेंटियर स्कूलों में जाकर प्रदान करेंगे।
अब तक शिक्षा विभाग द्वारा रेडक्रास सोसायटी के जरिये सरकारी स्कूलों में बच्चों को रेडक्रास शिक्षा (प्राथमिक चिकित्सा) प्रदान की जाती है। इसके तहत एक ही स्कूल में जाकर उसी स्कूल के लगभग सभी बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा के बारे में जानकारी प्रदान कर दी जाती थी, जिसके चलते एक ही स्कूल के सभी बच्चे ट्रेंड हो जाते थे।
हर साल बच्चों को ट्रेंड करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किए जाते थे, जोकि लगभग दो हजार बच्चों का होता था। इसके चलते मात्र 10 से 20 स्कूलों के बच्चे ही ट्रेंड हो पाते थे और बाकी सरकारी स्कूलों के बच्चे इस ट्रेनिंग से वंचित रह जाते थे। इसी के चलते अब शिक्षा विभाग व रेडक्रास सोसायटी ने सभी बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा की शिक्षा देने की बजाय हर स्कूल से कुछ बच्चों को ही यह शिक्षा देने का निर्णय लिया है।
इसके तहत प्रत्येक स्कूल से अब 20-20 बच्चों के ग्रुप को यह शिक्षा प्रदान की जाएगी ताकि अधिक से अधिक स्कूल कवर हो जाएंगे। यदि किसी स्कूल में किसी घटना के दौरान प्राथमिक चिकित्सा की जरूरत पड़ती है तो यह बच्चे प्राथमिक चिकित्सा दे सकेंगे। इससे पूर्व जिन स्कूलों के बच्चों को यह ट्रेनिंग नहीं मिलती थी, उन्हें यह दिक्कतें आती थी।
क्या-क्या दिया जाता है प्रशिक्षण
इसके तहत किसी प्रकार की घटना होने पर प्राथमिक चिकित्सा प्रदान की जाती है। मुंह से सांस देना, घाव होने पर दवाई लगाना, बेंडिड लगाना, घाव को साफ करना, हड्डी आदि टूटने पर उसे प्राथमिक चिकित्सा देना आदि शामिल है। यह शिक्षा प्राइमरी से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों तक के बच्चों को प्रदान की जाएगी।
अब प्रत्येक सरकारी स्कूल के कम से कम 20 बच्चों को प्राथमिक चिकित्सा की शिक्षा दी जाएगी। इससे पूर्व एक ही स्कूल के बच्चों को शिक्षा दी जाती थी, जिससे दूसरे सरकारी स्कूलों के बच्चे वंचित रह जाते थे। अब एक स्कूल के कुछ बच्चों का चयन किया जाएगा, जिससे अधिकतर स्कूलों को इसका फायदा मिलेगा।
वंदना गुप्ता, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी

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