नरवाना : यदि आप कोई कार्यक्रम देख रहे है और उसमें मेधा विनायक का नृत्य चल रहा है तो आप उस नृत्य को बीच में छोड़ कर नहीं जा पा पाऐंगे, बल्कि उस मन मोहक नृत्य में पूरी तरह खो जाएंगे। ऐसा नृत्य करती है महाराष्ट्र के पुणे की नृत्यागना मेधा विनायक। वह नृत्य के क्षेत्र में एक विशेष मुकाम हासिल करना चाहती है। नरवाना में एक कार्यक्रम में नृत्य के लिए आई मेधा विनायक ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही। पुणे की मेधा विनायक ने नृत्य की शिक्षा अपने गुरू दिल्ली के स्व. पंडित तीर्थराम आजाद व पंडित बिरजू महाराज व पुणे के रोशन दाते से ग्रहण की और वे नृत्य के कई कार्यक्रमों में भाग लेकर कई उपलब्धिया व पुरस्कार प्राप्त कर चुकी है।
पिछले 11 वर्षो से कत्थक, लोक नृत्य, पाश्चातय नृत्य का ज्ञान अर्जित कर नृत्य कार्यशालाएं भी आयोजित करती है। यहीं नहीं मेधा विनायक पिछले 10 वर्षो से उत्सव ललित कला शिक्षण सेवा संस्था, शिरपुर की निदेशक एवं प्रशिक्षक के रूप में कार्य कर रही है। उन्होंने राष्ट्र कथक नृत्य प्रतियोगिता में भी पुरस्कार प्राप्त किया था। मथुरा संग्रहालय द्वारा आयोजित नृत्य कला प्रदर्शन कार्यक्रम में उन्होंने कृष्ण की भूमिका में नृत्य प्रस्तुत कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। बंबई में 15 दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला जो नेहरू सेंटर बरली ने आयोजित की। उसमें पं. बिरजू महाराज एवं पं. शास्वती सेन से प्रशिक्षण प्राप्त वहा नृत्य की अद्भूत कला का प्रदर्शन किया। मेधा विनायक राजस्थानी, बृज, मराठी, कथक नृत्यों को केवल खुद ही नहीं करती बल्कि उसका प्रशिक्षण देने का कार्य भी करती है।
उत्तर महाराष्ट्र विद्यापीठ, जलगाव द्वारा आयोजित युवक महोत्सव-2006 में नृत्य प्रतियोगिता में न केवल रजत पदक प्राप्त किया बल्कि अगले वर्ष भी इस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक प्राप्त किया। महाराष्ट्र की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में राजस्थानी नृत्य भवई प्रस्तुत कर मेधा विनायक ने प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। मेधा ने बताया कि वे मनीषा कोईराला व गोविंदा की हिंदी फिल्म महाराजा में बाल कलाकार के रूप में गोविंदा की बहन का रोल भी कर चुकी है। वे विज्ञान स्नातक है और कंप्यूटर परीक्षा एमएससी आईटी विशेष योग्यता में उत्तीर्ण की हुई है और एनीमेशन में भी डिप्लोमा प्राप्त कर रखा है। कथक एवं गायन में विशारद की शिक्षा ग्रहण की है और अंग्रेजी, हिंदी, मराठी व बृज भाषा का उन्हे ज्ञान है। वह महाराष्ट्र में तो अपनी पहचान बनाने में सफल रही है, लेकिन वह देश के अन्य हिस्सों में भी अपनी कला के क्षेत्र में नाम कमाना चाहती है।
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