सर्वजात सर्वखाप महापंचायत के बाद पहली बार गांव में पैदा हुई कन्या
पैदा होते ही कन्या का नामकरण कर बीबीपुर गांव ने की नई परंपरा की शुरूआत
कन्या के पैदा होने पर गांव बीबीपुर में खुशी की लहर
जींद। रक्षा बंधन के पर्व पर ही गांव बीबीपुर में बच्ची की किलकारी से गांव में खुशनुमा माहौल हो गया है। गांव बीबीपुर निवासी राजेश कुमार की पत्नी रव्खा रानी ने बुधवार सुबह बच्ची को जन्म दिया और जैसे ही वीरवार को बच्ची को गांव में ले जाया गया तो पूरव् गांव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी और लड़की के छठी से पहले ही उसका नामकरण कर उसका नाम अंजलि रख दिया। जबकि रिवाज यह है कि लड़के के जन्म के छठे दिन बाद छठी के गीत गाकर उसका नामकरण किया जाता है और लड़की का नामकरण उस प्रकार नहीं किया जाता। लेकिन राजेश कुमार ने इस परंपरा को बदलते हुए कन्या भ्रूण हत्या के विरूद्ध अभियान चलाए हुए बीबीपुर की पंचायत व महिलाओं के अभियान में अपनी पहली आहुति डाल कर एक नई परंपरा का आगाज कर दिया है। गौरतलब है कि अंजलि खाप पंचायतों व महिला ग्राम सभा के बाद उस गांव में जन्म लेने वाली पहली कन्या है जो गांव कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ देश के मानचित्र पर पिछले दो माह से अपनी जोरदार हाजिरी दर्ज करवा चुका है। इस लिहाज से राजेश के घर पैदा हुई अंजलि की अहमियत और बढ़ गई ळै।
दो महीने के बाद हुआ गांव में कन्या का जन्म
२४ जनवरी २०१२ को भी बजी गांव बीबीपुर में थाली
गांव के सरपंच सुनील कुमार जागलान के घर पर जब गत २४ जनवरी को कन्या दिवस पर बेटी नंदनी का जन्म हुआ था तो उनके घर पर भी थाली बजायी ही नहीं बल्कि खुशियों में थाली को फोड़ दिया था। अब राजेश कुमार के घर पर बेटी का अंजलि का जन्म हुआ है तो गांव में फिर थाली बजी ओर सरपंच परिवार की महिलाओं ने गांव में शुभ संकेत देने के लिए अलग से थाली बजायी। ताकि कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ अभियान चला रही वीरांनगााओं में यह संदेश जाए कि उनके गांव में कन्या जन्म होने पर थाली बजने लगी हैं।
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