जींद। रोहतक रोड स्थित दीप निवास में हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था के तत्वाधान में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में जींद के वरिष्ठ साहित्यकार डा. केवल कृष्ण पाठक को उनकी विशेष् साहित्यिक उपलधी के लिए बधाई दी गई। गोष्ठी में अपनी रचना सुनाते हुए ओमप्रकाश चौहान ने मानव मन की वृतियों का वर्णन करते हुए कहा कि मन पापी के साथ आत्मा इस देही में वास करैं, रावण के घर सीता जैसे पिया मिलण की आस करै। रामफल सिंह खटकड़ ने कहा कि बनाएं देवघर कितने, सजाएं देवालय आंगन, रचाएं यज्ञ, हवनवेदी करव्ं, पूजन करव्ं अर्चन। वरिष्ठ साहित्यकार रामशरण युयुत्सु ने कहा कि सुनो मित्र मैं अहिल्या नहीं हुं और तुम भी राम नहीं हो। संस्था महासचिव नरव्ंद्र अत्री ने समसामायिक हालातों पर कहा कि सट्टा, फिसिंग रव्व में, काले धन का मेल, एक खेल में हो रहे, जाने कितने खेल, कैसे झेलें हम भला महंगाई का दंश, संग में सर पे है चढ़ा भ्रष्टाचारी का कंस। कवि राजेश ने पुराने ताने बाने पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भूलै तै बी भूल पड़ै ना, कदे आंसू कदे रोऊं सू, गया जमाना याद आवै से, चाहे जागू चाहे सोऊं सूं। कवि अनिल पांचाल ने कहा कि गरीब का निवाला लगा सिकुड़ने, फैलने लगी मंत्री की तोंद, कालाबाजारी के आगे, न्यायपालिका रही आंखें मूंद।
Monday, 18 June 2012
सट्टा, फिसिंग रव्व में, काले धन का मेल एक खेल में हो रहे, जाने कितने खेल कवियों ने अपनी रचनाओं से समसामायिक विष्यों पर किए कटाक्ष
जींद। रोहतक रोड स्थित दीप निवास में हिंदी साहित्य प्रेरक संस्था के तत्वाधान में गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में जींद के वरिष्ठ साहित्यकार डा. केवल कृष्ण पाठक को उनकी विशेष् साहित्यिक उपलधी के लिए बधाई दी गई। गोष्ठी में अपनी रचना सुनाते हुए ओमप्रकाश चौहान ने मानव मन की वृतियों का वर्णन करते हुए कहा कि मन पापी के साथ आत्मा इस देही में वास करैं, रावण के घर सीता जैसे पिया मिलण की आस करै। रामफल सिंह खटकड़ ने कहा कि बनाएं देवघर कितने, सजाएं देवालय आंगन, रचाएं यज्ञ, हवनवेदी करव्ं, पूजन करव्ं अर्चन। वरिष्ठ साहित्यकार रामशरण युयुत्सु ने कहा कि सुनो मित्र मैं अहिल्या नहीं हुं और तुम भी राम नहीं हो। संस्था महासचिव नरव्ंद्र अत्री ने समसामायिक हालातों पर कहा कि सट्टा, फिसिंग रव्व में, काले धन का मेल, एक खेल में हो रहे, जाने कितने खेल, कैसे झेलें हम भला महंगाई का दंश, संग में सर पे है चढ़ा भ्रष्टाचारी का कंस। कवि राजेश ने पुराने ताने बाने पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भूलै तै बी भूल पड़ै ना, कदे आंसू कदे रोऊं सू, गया जमाना याद आवै से, चाहे जागू चाहे सोऊं सूं। कवि अनिल पांचाल ने कहा कि गरीब का निवाला लगा सिकुड़ने, फैलने लगी मंत्री की तोंद, कालाबाजारी के आगे, न्यायपालिका रही आंखें मूंद।
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