नरवाना। शहर के लोगों को बंदरों के आंतक से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। नगर परिष्द ने मथुरा के एक ठेकेदार को एक हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया है। नगर परिष्द ने शनिवार से शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष् अभियान चलाया है। नगर परिष्द के सैनेटरी इंस्पेटर मुकेश शर्मा ने बताया कि शहर में पिछले फ्ब् दिनों से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष् अभियान चलाया जा रहा है और अब तक करीब फ्०० बंदर पकड़े जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने का यह अभियान वन्य प्राणी निरीक्षक राजवीर मलिक की देखरव्ख में चल रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में से लगभग एक हजार बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य फिलहाल रखा गया है और इन बंदरों को पकड़ कर फतेहाबाद के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। अभी तक राजकीय कन्या स्कूल, छोटूराम पार्क, मार्कीट कमेटी कार्यालय व सामान्य अस्पताल क्षेत्र से बंदरों को पकड़ा गया है और यह अभियान कई दिनों तक जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि नरवाना में पिछले काफी समय से बंदरों की संチया काफी अधिक बढ़ गई थी और बंदर झुंड बना कर कहीं भी पहुंच जाते थे और घरों में काफी नुकसान कर देते थे। बंदरों ने कई महिलाओं व बच्चों को काटकर अपना निशाना भी बनाया जिस कारण लोगों में बंदरों का काफी आतंक बना हुआ था।
Saturday, 23 June 2012
एक बंदर को पकड़ने पर खर्च होंगे १८० रुपये एक हजार बंदर काबू करने का टैंडर
नरवाना। शहर के लोगों को बंदरों के आंतक से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। नगर परिष्द ने मथुरा के एक ठेकेदार को एक हजार बंदर पकड़ने का ठेका दिया है। नगर परिष्द ने शनिवार से शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष् अभियान चलाया है। नगर परिष्द के सैनेटरी इंस्पेटर मुकेश शर्मा ने बताया कि शहर में पिछले फ्ब् दिनों से बंदरों को पकड़ने के लिए विशेष् अभियान चलाया जा रहा है और अब तक करीब फ्०० बंदर पकड़े जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि बंदरों को पकड़ने का यह अभियान वन्य प्राणी निरीक्षक राजवीर मलिक की देखरव्ख में चल रहा है। उन्होंने बताया कि शहर में से लगभग एक हजार बंदरों को पकड़ने का लक्ष्य फिलहाल रखा गया है और इन बंदरों को पकड़ कर फतेहाबाद के जंगलों में छोड़ा जा रहा है। अभी तक राजकीय कन्या स्कूल, छोटूराम पार्क, मार्कीट कमेटी कार्यालय व सामान्य अस्पताल क्षेत्र से बंदरों को पकड़ा गया है और यह अभियान कई दिनों तक जारी रहेगा। उल्लेखनीय है कि नरवाना में पिछले काफी समय से बंदरों की संチया काफी अधिक बढ़ गई थी और बंदर झुंड बना कर कहीं भी पहुंच जाते थे और घरों में काफी नुकसान कर देते थे। बंदरों ने कई महिलाओं व बच्चों को काटकर अपना निशाना भी बनाया जिस कारण लोगों में बंदरों का काफी आतंक बना हुआ था।
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